1984 सिख दंगा केस : सज्जन को सुप्रीम कोर्ट से झटका

Update: 2020-05-13 07:31 GMT

दिल्ली। 1984 सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत न देते हुए कहा है कि इसपर जुलाई में विचार किया जाएगा। बता दें कि साल 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के दौरान देशभर में सिखों के खिलाफ हिंसा भड़की थी। इसके बाद दिल्ली में हुए दंगों के मामले में पूर्व कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद रह चुके सज्जन कुमार को कोर्ट ने दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

गौरतलब है कि पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सिख विरोधी दंगे के एक मामले में निचली कोर्ट के आदेश को पलटते हुए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी करार दिया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने सज्जन कुमार पर पांच लाख का जुर्माना भी लगाया था। दोषी सज्जन कुमार दिल्ली से लोकसभा सांसद रह चुके हैं। उन पर हत्या, साजिश रचने, दंगा भड़काने और भड़काऊ बयानबाजी करने का आरोप लगा था। ये सभी आरोप हाईकोर्ट ने मानते हुए सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

दिल्‍ली हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर, 2018 को सुनाए अपने एक अहम फैसले में निचली अदालत के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें सज्‍जन कुमार को आरोपों से बरी किया गया था। जस्टिस एस. मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल की पीठ ने आईपीसी की विभिन्‍न धाराओं के तहत सज्‍जन कुमार को सजा सुनाई थी।

सज्जन कुमार को जिस मामले में उच्च न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए सजा दी वह एक-दो नवंबर 1984 को दिल्ली छावनी के राज नगर पार्ट-1 इलाके में पांच सिखों की हत्या और राज नगर पार्ट-2 में एक गुरुद्वारे को जलाने से संबंधित है। गौरतलब है कि 31 अक्टूबर 1984 को दो सिख अंगरक्षकों द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे।

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