हाईकोर्ट ने टामन सिंह सोनवानी और ललित गनवीर की जमानत याचिका दूसरी बार की खारिज
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी पीएससी भर्ती घोटाले में हाईकोर्ट ने कहा है कि परीक्षा में दलाली हुई है। इसी के चलते हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु ने पीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और परीक्षा उप-नियंत्रक ललित गनवीर की जमानत याचिकाएं दूसरी बार खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं और इससे लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हुआ है। ऐसे में केवल लंबे समय से न्यायिक हिरासत में होने के आधार पर जमानत देना उचित नहीं होगा।
दोनों अफसरों ने किया पद का दुरुपयोग
सीबीआई के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षा में तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों और करीबी लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया।
आरक्षक भर्ती फिजिकल टेस्ट में गड़बड़ी, नियुक्ति पर रोक
6,000 पदों पर चल रही आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नई नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने पुलिस विभाग को अगले दो हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को तय की गई है। इस स्थगन आदेश के कारण पुलिस विभाग अगली सुनवाई तक किसी भी चयनित उम्मीदवार को नियुक्ति पत्र जारी नहीं कर सकेगा।
याचिकाकर्ताओं के वकील मतीन सिद्दिकी ने कोर्ट को बताया कि शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) में बड़े पैमाने पर धांधली हुई। उन्होंने बिलासपुर एसएसपी और चयन समिति के अध्यक्ष द्वारा 19 दिसंबर 2024 को पुलिस मुख्यालय रायपुर को लिखे गए पत्र का हवाला दिया, जिसमें फिजिकल टेस्ट के दौरान पाई गई गड़बड़ियों की आधिकारिक जानकारी दी गई थी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि कुल 6,000 पदों में से अब तक लगभग 2,500 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र बांटे जा चुके हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि इन नियुक्तियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।