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लखनऊ में सुजीत पांडेय और गौतमबुद्धनगर में आलोक सिंह बने पहले पुलिस कमिश्नर

- योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, मंगलवार से लागू होगी पुलिस कमिश्नर प्रणाली

लखनऊ में सुजीत पांडेय और गौतमबुद्धनगर में आलोक सिंह बने पहले पुलिस कमिश्नर
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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को लोकभवन में हुई कैबिनेट की बैठक में लखनऊ व गौतमबुद्धनगर में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। लखनऊ व गौतमबुद्धनगर में अब पुलिस कमिश्नर होंगे। लखनऊ में एडीजी सुजीत पांडेय और गौतमबुद्धनगर में एडीजी आलोक सिंह पहले पुलिस कमिश्नर होंगे।

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की दृष्टि से आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। हमारी सरकार ने बेहतर पुलिसिंग के लिए बड़ा कदम उठाया है। आज के समय में लखनऊ में करीब 40 लाख तथा गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में करीब 25 लाख के आसपास की आबादी है। लखनऊ में अभी तक कुल 40 थाने हैं। अब लखनऊ में पुलिस आयुक्त प्रणाली होगी जिसमेें एडीजी रैंक के अफसर पुलिस कमिश्नर होंगे। प्रदेश मेें आयुक्त प्रणाली मेट्रोपॉलिटन सिटी में लागू होगी।

इसके साथ ही दोनों जगह पर महिला एसपी रैंक की अधिकारी को अलग से नियुक्ति दी जाएगी, जिससे महिलाओं की सुरक्षा के लिए अलग से काम हो सके। उनके साथ एएसपी रैंक की अधिकारी भी रहेंगी। लखनऊ तथा गौतमबुद्धनगर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए एसपी तथा एएसपी रैंक के अधिकारी तैनात होंगे, जिससे यातायात की व्यवस्था मजबूत हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 राज्यों में पुलिस कमिश्नर हैं। लखनऊ में दो थाने बढ़ाए गए हैं। अब यहां 40 थाने हो गए हैं। कानून व्यवस्था में सुधार के लिए फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि लम्बे समय से उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था के लिए इसकी मांग की जा रही थी। उसको पूरा किया गया है। प्रदेश सरकार के मुताबिक इस फैसले से आम आदमी के लिए त्वरित न्याय​ मिलना आसान होगा और आम लोगों के दरवाजे पर ही न्याय मुहैया होगा।

कई दशकों से उठ रही थी मांग, मुख्यमंत्री योगी ने दिखाई दृढ़ इच्छा शक्ति

पिछले कई दशकों से यूपी में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की मांग उठ रही थी। धरमवीर कमीशन (तीसरे राष्ट्रीय पुलिस आयोग) ने 1977 भी पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की सिफारिश की थी। नौकरशाही के एक बड़े तबके और राजनीतिक आकाओं ने सालों से कमिश्नर सिस्टम की फाइल दबा रखी थी। कमिश्नर सिस्टम राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में यूपी में कभी नहीं लागू हो पाया। पूर्व में कोई भी मुख्यमंत्री पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने का साहस नहीं कर पाए। सरकारें पुलिस को फ्री हैंड देने से डरती रहीं। मुख्यमंत्री योगी ने दृढ राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई।

इस तरह होगी नई व्यवस्था

लखनऊ में 40 थाना मेट्रोपॉलीटन श्रेणी में आएंगे। यहां पर एसपी रैंक के नौ अधिकारी तैनात होंगे। गौतमबुद्धनगर में डीआईजी रैंक के दो अधिकारी एडिशनल पुलिस कमिश्नर पद पर तैनात होंगे। एसपी रैंक के भी पांच अधिकारी तैनात होंगे। यहां पर दो नए थाना भी बनाए जा रहे है। नोएडा में डीआईजी रैंक के दो जॉइंट कमिश्नर होंगे। नोएडा को तीन जोन में बांटा जाएगा। नोएडा में एसपी स्तर के कुल छह अधिकारी तैनात किए जाएंगे। इनके साथ कुल 9 एडिशनल एसपी की भी तैनाती होगी। एसीपी के पद पर 15 डिप्टी एसपी तैनात होंगे। इसमें से 10 डिप्टी एसपी सर्किल में रहेंगे और बाकी पांच ट्रैफिक, अपराध, अभिसूचना और मुख्यालय की जिम्मेदारी संभालेंगे।

नौकरशाही का एक बड़ा तबका भी करता रहा विरोध

खास बात है कि नौकरशाही का एक बड़ा तबका भी इस सिस्टम का विरोध करता रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हर विरोध को दरकिनार करते हुए पारदर्शी और जनहित के फैसले लेने वाला कमिश्नर सिस्टम लागू करने का काम किया।

पुलिस को मिले अब ये अधिकार, जवाबदेही भी तय

प्रदेश सरकार के इस फैसले से पुलिस को पर्याप्त अधिकार मिलने के साथ पर्याप्त जवाबदेही तय हो गई है। अब दंगाइयों, उपद्रवियों पर बल प्रयोग के लिए पुलिस को मजिस्ट्रेट का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब जो दंगा-उपद्रव करेगा, आमजन और पुलिस पर हमला करेगा, सार्वजनिक संपत्तियों को बर्बाद करेगा, उससे पुलिस सीधे निपटेगी। इस तरह पुलिस में भी सिंगल विंडो सिस्टम लागू हो गया है। पुलिस को अब गुंडों, माफियाओं और सफेदपोशों को चिन्हित कर उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई का पूरा अधिकार होगा। अपराधियों, माफियाओं और सफेदपोशों के असलहों के लाइसेंस कैंसिल करने के लिए भी पुलिस को सीधे अधिकार मिल गये हैं। इसके साथ ही 151 और 107, 116 जैसी धाराओं में पुलिस को गिरफ्तार कर सीधे जेल भेजने का अधिकार होगा।

पूर्व में फैसला करने के बाद पीछे हट गई थी सरकार

कई पूर्व आईपीएस अधिकारियों के भी मुताबिक इस कदम से आमजन के हित के फैसलों में नौकरशाही का मकड़जाल खत्म होगा। तीसरे पुलिस कमीशन, धरमवीर कमीशन की सिफारिश के बाद पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव ने यूपी में कमिश्नर सिस्टम लागू किया था। वासुदेव पंजानी को कानपुर का पुलिस कमिश्नर बनाया था, लेकिन उनके काम शुरू करने से पहले ही यह फैसला वापस ले लिया गया। इसके बाद यूपी में कमिश्नर सिस्टम कभी लागू नहीं हो पाया।

इसी के बाद प्रदेश की नौकरशाही ने मान लिया था कि यूपी में कोई भी सरकार ये क्रांतिकारी फैसला नहीं ले पाएगी, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मिथक को तोड़ने का काम किया। देश के 15 राज्यों के 71 शहरों जिनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलुरू, अहमदाबाद, राजकोट, बड़ौदा, हैदराबाद, त्रिवेंद्रम आदि शामिल हैं, वहां ये सिस्टम लागू है और बेहतर कार्य कर रहा है। कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक प्रशासनिक उत्कृष्टता के लिए ये कदम बेहद जरूरी था और इसके सकारात्म्क परिणाम देखने को मिलेंगे। कमिश्नर सिस्टम से जहां पुलिस की जवाबदेही बढ़ेगी, थाने स्तर पर आम लोगों की सुनवाई और बेहतर होगी पहीं पुलिस की गड़बड़ी पर भी अंकुश लगेगा।

डीजीपी बोले स्मार्ट पुलिसिंग को मिलेगा बल

पुलिस महानिदेशक ओपी ​सिंह ने इस फैसले के बाद कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ एवं नोएडा में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने की महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक घोषणा की है। इस निर्णय से जहां सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था कि स्थिति बेहतर होगी, वहीं स्मार्ट पुलिसिंग को भी बल मिलेगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर इस इस विश्वास के लिए मुख्यमंत्री का आभारी जताया है।

Updated : 13 Jan 2020 7:26 AM GMT
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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