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अब 'ईसीबीसी' मानकों के आधार पर ही हो सकेगा 'नए भवनों' का निर्माण

- ऊर्जा संरक्षण भवन नियमावली पर डीईआई में आयोजित कार्यशाला

अब ईसीबीसी मानकों के आधार पर ही हो सकेगा नए भवनों का निर्माण
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- ईसीबीसी के अनुसार 25 प्रतिशत ऊर्जा संरक्षण को देनी होगी प्राथमिकता

आगरा/स्वदेश वेब डेस्क। इमारतों व बड़े भवनों के निर्माण में ऊर्जा संरक्षण के नियमों को परिवर्धन व लक्षित करने के लिए वर्तमान में 'ईसीबीसी' को अपनाना बेहद जरूरी है। आर्किटेक्ट के छात्रों को 'ऊर्जा संरक्षण भवन नियमावली' (ईसीबीसी) के प्रति उनकी जिज्ञासाओं के समाधान व जानकारी देने के लिए दयालबाग शिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यशाला में गुडगांव से आए मनोज सिंह ने छात्रों को भवन निर्माण के दौरान हाॅट वाटर एंड पम्पिंग, लाइटिंग व कन्ट्रोल आदि की जानकारी दी।

काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर एवं ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यशाला में मनोज सिंह ने बताया कि व्यावसायिक इमारतों में ईसीबीसी के अनुसार कम से कम 25 प्रतिशत ऊर्जा संरक्षण को प्राथमिकता देनी है। उन्होंने छात्रों को भवन निर्माण के दौरान पंखे, ट्यूबुलर फ्लोरोसेंट लैंप, डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर, सीलिंग माउंटिड और फ्लोर स्टैंडिंग एयर कंडीशनर, डायरेक्ट कूल रेफ्रिजरेटर, कलर टेलीविजन, इलेक्ट्रिक वॉटर हीटर व अन्य उपकरणों के सापेक्ष भवन निर्माण के दौरान खिड़कियों व अन्य वैकल्पिक ऊर्जा के साधनों को अपनाने की बात कही। वहीं ऊर्जा संरक्षण के दौरान इन उपकरणों के किस प्रकार के अनुपातों को रखा जाए, इसके बारे में भी बताया। इससे पूर्व कार्यशाला में मौजूदा इमारतों में ऊर्जा दक्षता में सुधार की आवश्यकताओं पर भी चर्चा की गई।

क्या है ऊर्जा संरक्षण भवन कोड (ईसीबीसी)

भवन निर्माण क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा ऊर्जा संरक्षण भवन कोड (ईसीबीसी) शुरू किया गया था। विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार, ऊर्जा दक्षता ब्यूरों (बीईई) के परामर्श से भारत के विभिन्न राज्यों में ईसीबीसी लागू है। ईसीबीसी का उद्देशय भवन में रहने वालों के आराम से समझौता किये बिना, ऊर्जा दक्ष डिजाइन और ऊर्जा दक्ष इमारतों का निर्माण और न्यूनतम आवश्यकताएं प्रदान करना हैं।

कर सकते हैं 30 प्रतिशत तक विद्युत बचत

विद्यमान भवन में ईसीवीसी कोड लागू करने पर हम लगभग 30 प्रतिशत तक विद्युत की बचत कर सकते हैं। इसके लिए हम विद्यमान भवन में रेटोफिटिंग कर सकते हैं और वर्तमान भवन को लगभग ईसीबीसी कोड के अनुरूप बना सकते है।

वर्तमान में नए व्यावसायिक व अन्य इमारतों का निर्माण ईसीबीसी के निर्धारित मानकों के आधार पर हो सकेगा। अगर देखा जाए तो भवन निर्माण की प्राचीन प्रणालियों में ऊर्जा संरक्षण पर विशेष ध्यान रखा जाता था। भवन के बीच में आंगन व हवा और प्रकाश के लिए खिड़कियों को भवन की उपरी सतह पर स्थान दिया जाता था। कुछ समय से भवन निर्माण में ऊर्जा संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। ईसीबीसी के निमयों के अनुपालन में ऊर्जा की बचत सम्भव है।

- प्रीति भटनागर, आर्किटेक्ट एवं असिस्टेंट प्रोफेसर, डीईआई।

इस कार्यशाला का उद्देश्य आर्किटेक्ट के छात्रों को शिक्षित करना है कि आगे से जो भी भवन बनेगा, उसमें वातावरण व प्रकृति से सामंजस्य स्थापित हो सके। वर्तमान में भविष्योन्मुखी भवन निर्माण की तकनीकों के सम्बंध में ईसीबीसी के नियम कई मायनों में लाभदायक है। भवन निर्माण की प्रवृतियों, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को इमारतों के डिजाइन में कैसे शामिल करें, इसके बारे में कार्यशाला में विस्तार से चर्चा की जा रही है।

- प्रो. मौली केप्रीहन, विभागाध्यक्ष, आर्किटेक्ट विभाग, डीईआई एवं कार्यशाला समन्वयक।


Updated : 31 Jan 2019 7:01 PM GMT
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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