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पुलिस आयुक्त प्रणाली : बदलते वक्त का सही निर्णय

मुख्यमंत्री योगी वक्त-जरूरत को ध्यान में रखते हुए फैसला लेते हैं। कानून व्यवस्था के मुददे को बेहद गंभीरता से लेते हैं।

पुलिस आयुक्त प्रणाली : बदलते वक्त का सही निर्णय
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लखनऊ/जितेंद्र प्रताप सिंह। राजधानी लखनऊ और गौतमबुद्धनगर (नोयडा) और अब कानपुर तथा वाराणसी में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू कर दी गई है। मात्र 14 महीनों में राज्य के चार बड़े शहरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे की कानून व्यवस्था को बेहतर करने के अपने मजबूत इरादों को दर्शाया है। इसके साथ ही यह भी जताया है कि राज्य के कई अन्य शहरों में भी इसी तरह चरणबद्ध तरीके से इस प्रणाली को लागू किया जाएगा। ताकि कानून-व्यवस्था बेहतर हो और जनता अमन चैन महसूस करे। मुख्यमंत्री के इस फैसले को सूबे में डीजीपी रह चुके कई अधिकारी बदलते वक्त का सही फैसला बता रहें हैं।

यूपी के अन्य शहरों में भी लागू की जाएगी पुलिस आयुक्त प्रणाली, योगी आदित्यनाथ सरकार कर रही तैयारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी कुछ ऐसा ही मत है। वह वक्त और जरूरत को ध्यान में रखते हुए फैसला लेते हैं। सभी को पता है कि वह कानून व्यवस्था के मुददे को बहुत ही गंभीरता से लेते हैं। सूबे की सत्ता संभालने के तत्काल बाद उन्होंने सबसे पहले किसानों की कर्ज माफी और कानून-व्यवस्था के मुददे को ही गंभीरता से लिया था। जिसके चलते उन्होंने अपनी पहली कैबिनेट में किसानों के कर्ज माफ करने का फैसला लिया। और इसी के साथ उन्होंने अपराधियों को प्रदेश छोड़ देने की चेतावनी देते हुए पुलिस को अपराधियों के एनकाउंटर करने की छूट दी थी। मुख्यमंत्री की इस ऐलान का गिरोहबंद अपराधियों परअसर दिखा। कई दुर्दांत अपराधियों ने पुलिस की गोली के डर से खुद अदालतों में जाकर समर्पण किया। गैंगेस्टर अधिनियम के अंतर्गत 12,032 अभियोग पंजीकृत कर 37,511 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गई। अपराधियों की करीब 1,000 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई और उनकी अवैध संपत्ति भी ध्वस्त की है। सरकार की ऐसी सख्ती से अब जेल में बंद दुर्दांत अपराधी भी जेल से बाहर आने के बचने लगे। अपराधियों को इस तरह डरा देख कर आम जनता में सरकार की सराहने का भाव आया क्योंकि मुख्यमंत्री सार्वजनिक मंचों से अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की मंशा जाहिर कर अपराधियों के हौसले तोड़ रहे थे।


यूपी में एक भी दंगा न होना सरकार की उपलब्धि

उसी का नतीजा था कि तीन तलाक, अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे संवेदनशील मसले का फैसला आने पर भी शांति बनी रही। लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कम बूथ होने के बावजूद काफी हिंसा हुई, पर उत्तर प्रदेश में बड़ी बूथ संख्या होते हुए भी कहीं से हिंसा की सूचना न आना यहां की कानून-व्यवस्था की उपलब्धि रहा। योगी सरकार में यूपी में एक भी दंगा ना होना भी एक बड़ी उपलब्धि है। यहीं नहीं वर्ष 2018 में आयोजित हुए इंवेस्टर समिट के दौरान कई उद्यमियों ने सूबे में कानून व्यवस्था के माहौल की ना सिर्फ तारीफ की बल्कि बड़े पैमाने पर यूपी में निवेश भी किया। उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार निजी क्षेत्र में लगभग तीन लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतरे, जिससे सूबे में औद्योगीकरण को गति मिली। सूबे के नौजवानों के लिए 35 लाख से अधिक नौकरियां सृजित हुई।

लखनऊ, नोएडा के बाद कानपुर, वाराणसी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मत है कि रूल ऑफ लॉ की परिकल्पना को तेजी से साकार करने के चलते ही यूपी बीमारू राज्य से उबरते हुए समर्थ राज्य के रुप में उभर रहा है। यही नही यूपी देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का राज्य बनने की ओर अग्रसर है। इसकी मुख्य वजह है सूबे की बेहतर हुई कानून व्यवस्था। इसे बेहतर करने में मुख्यमंत्री की सोच तथा उनकी प्रयास मुख्य है। राज्य की क़ानून व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने के तहत मुख्यमंत्री ने सूबे के बड़े शहरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली करने का फैसला दो वर्ष पूर्व लिया था। परन्तु इसे लागू करना आसान नहीं था, लेकिन मुख्यमंत्री ने सारे अवरोधों को किनारे करते हुए 13 जनवरी 2020 को लखनऊ और नोयडा में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू कर दी। इसके बाद 25 मार्च को कानपुर और वाराणसी में भी पुलिस आयुक्त प्रणाली करने का फैसला मुख्यमंत्री ने ले लिया। अब योगी आदित्यनाथ राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हो गए हैं, जिन्होंने यूपी के चार बड़े शहरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू की है।


आसान नहीं था फैसले पर अमल

पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने को लेकर जमीन पर उतारने के लिए अब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो किया है वह आसान नही था। पुलिस आयुक्त प्रणाली प्रदेश में पहली बार 43 साल पहले लागू की गई थी। कानपुर को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया था। 1978 में बासुदेव पंजानी को बतौर पुलिस कमिश्नर तैनाती देकर उन्हें मद्रास और मुम्बई कमिश्नरेट की स्टडी के लिए भेज दिया गया। पुलिस आयुक्त प्रणाली के उपलब्ध इतिहास के अनुसार, ब्रिटिश काल में पुलिस आयुक्त की व्यवस्था केवल प्रेजिडेंसी नगरों- कलकत्ता, बंबई और मद्रास (तत्कालीन नाम) में लागू थी। यह लंदन मेट्रोपोलिटन पुलिस (बॉबी) के मित्र पुलिस के मॉडल पर आधारित थी, क्योंकि यहां यूरोपीय नागरिक बड़ी संख्या में रहते थे। शेष भारत के लिए आयरिश पुलिस कांस्टेबुलरी के विद्रोही इलाकों के लिए बनाए गए दमनकारी मॉडल पर जिलाधिकारी पुलिस अधीक्षक की व्यवस्था 1861 के पुलिस एक्ट द्वारा बनाई गई थी। निजाम ने भी अपनी राजधानी हैदराबाद में पुलिस आयुक्त नियुक्त किया हुआ था। बाद में इसे कई अन्य राज्यों में लागू किया गया।

1978 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहली बार कानपुर बनी थी कमिश्नरी

उत्तर प्रदेश में 1978 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राम नरेश यादव ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत कानपुर में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू की थी। बासुदेव पंजानी को पुलिस कमिश्नर कानपुर नियुक्त करने के बाद उन्हें मद्रास पुलिस कमिश्नरेट की स्टडी करने के लिए भेज दिया गया। पंजानी वापस आते इससे पहले ही आईएएस लॉबी ने सक्रिय होकर इस फैसले को निरस्त करा दिया। इसके बाद वर्ष 2009 में भी पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने के लिए मायावती ने सहमति दे दी थी। जिलों के चयन और प्रस्ताव में हुए विलंब के कारण निर्णय नहीं हो सका था। फिर 2014 में डीजीपी रिजवान अहमद ने पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रस्ताव सौंपा, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में चला गया। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी की जरूरतों को ध्यान में रखते इसे लागू करने का निर्णय लिया और लागू भी किया। उत्तर प्रदेश के शहरों का जिस तरह से विस्तार हुआ है, उसमें इसकी जरूरत महसूस की जा रही थी। फिलहाल मुख्यमंत्री के इस फैसले की सूबे के डीजीपी रह चुके तमाम अफसर कानून व्यवस्था को बेहतर करने वाला बताते रहे हैं।

वाराणसी के पहले कमिश्नर ने काशी के कोतवाल से आशीर्वाद ले ग्रहण किया कार्यभार


वाराणसी: बनारस के पहले पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश शनिवार को महादेव की नगरी काशी के शर्किट हाउस पहुंचे। वहां पर अधिकारियों से रूबरू होने के बाद वो सीधे काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में पहुंचे। जहां उन्होंने माथा टेका और आर्शिवाद प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने अपना पदभार ग्रहण किया। काशी की मान्यता है कि जिसकी भी यहां तैनाती होती है वो सबसे पहले काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव का दर्शन करता है और उसके बाद भी अपना चार्ज लेता है। बनारस के पहले पुलिस कमिश्नर ए.सतीश गणेश ने भी उसी परंपरा को कायम रखा और उन्होंने शनिवार को आने के बाद सबसे पहले बाबा के दरबार में पहुंचकर हाजिरी लगाई। चार्ज लेने के बाद उन्होंने पुलिस विभाग के जिम्मेदारों के साथ एक बैठक की। जिसमें शहर के ट्रैफिक और यहां के अपराध पर चर्चा की।

Updated : 27 March 2021 4:50 PM GMT
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Swadesh Lucknow

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