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आर्थिक प्रगति के युग में पिछड़ गया जम्मू कश्मीर

क्या ऊपरी तत्वों को ध्यान रखते हुए हमारे देश में जम्मू कश्मीर राज्य के विकास में बाधा बन रही धारा 370 तथा 35ए को क्यों नहीं हटाने पर विचार किया जा रहा है।

आर्थिक प्रगति के युग में पिछड़ गया जम्मू कश्मीर
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- कर्नल शिवदान सिह

90 के दशक में संयुक्त राष्ट्र संघ के संरक्षण में आर्थिक उदारीकरण का दौर आरंभ हुआ तथा 1948 के गेट व्यापारिक समझौते के स्थान पर विश्व व्यापार संघ (डब्ल्यूटीओ) की 1995 में स्थापना की गई। इस संघ में विश्व के 124 देश शामिल हुए तथा इसकी नीति इस प्रकार निर्धारित की गई, जिससे सदस्य देशों के बीच बिना अड़चन लालफीताशाही तथा सुरक्षा के साथ व्यापार किया जा सके। व्यापारिक विवादों को निपटाने तथा लेन-देन को सुरक्षित बनाने के प्रावधान किए गए। इस प्रकाविश्व में व्यापार को गति मिली तथा एक प्रकार से पूरा विश्व सामूहिक बाजार बन गया। इस समझौते के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने विश्व के अलग-अलग देशों में उन देशों की सरकारों द्वारा सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद निवेश करके इन देशों में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा दिया। इस प्रकार विश्व में आर्थिक प्रगति आई तथा गरीब देश विकासशील तथा विकसित देशों की श्रेणी में आए। संबंधित देशों ने निवेशकों को उद्योग लगाने की भूमि तथा आधारभूत ढांचा उपलब्ध करवाया। इतना सब होने के बावजूद विश्व के ऐसे देश भी हैं, जो इस आर्थिक प्रगति से अछूते ही रह गए। यह सब केवल इन देशों की सामंती सोच तथा आंतरिक व्यवस्था के कारण हुआ। इसके उदाहरण हैं एशिया के मुस्लिम देश तथा हमारे पड़ोसी अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान इत्यादि। सामंती व्यवस्था हमेशा औद्योगिकरण को अपना दुश्मन समझती है, क्योंकि इसके द्वारा एक साधारण नागरिक भी रोजगार पा जाता है तथा इस प्रकार का नागरिक उनकी सामंती व्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाता है। ये सामंती लोग अपनी व्यवस्था चलाने के लिए धार्मिक कट्टरपंथ का सहारा लेते हैं और इसी कारण इन सब देशों में मुस्लिम कट्टरपंथ वहाबी सोच के रूप में अपनाया गया है। इस प्रकार के वातावरण में चारों तरफ हिंसा तथा अशांति देखी जाती है और ऐसा ही इन देशों में है। इसका उदाहरण हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान है। इस कारण पाकिस्तान औद्योगीकरण में पिछड़ने के कारण आर्थिक रूप से एक असफल देश घोषित होने वाला है। करीब-करीब यही स्थिति हमारे देश के राज्य जम्मू कश्मीर में भी धारा 370 तथा 35ए के कारण देखी गई है। इन धाराओं के कारण इस राज्य में कोई भी निवेश या उद्योग धंधा बाहर से नहीं आ सका क्योंकि 35ए के कारण बाहर का कोई भी व्यक्ति इस राज्य में भूमि तथा रहने के लिए मकान भी नहीं खरीद सकता। इस कारण यहां औद्योगिकरण हुआ ही नहीं।

1947 में जम्मू कश्मीर के विलय के समय वहां के शासक राजा हरि सिंह तथा कुछ प्रभावशाली राजनीतिज्ञ जिनमें शेख अब्दुल्ला प्रमुख थे ने विलय की शर्तों में 370 इसलिए जुड़वाए जिससे देश का संविधान तथा केंद्रीय कानून इनकी सामंतशाही तथा निरंकुश सत्ता को चुनौती न दे सके, इन्हीं के दबाव के कारण 1956 में संविधान में राष्ट्रपति द्वारा धारा 35ए जोड़ी गई। इस धारा के अनुसार राज्य के बाहर का व्यक्ति राज्य में कोई संपत्ति या जमीन नहीं खरीद सकता। धारा 370 के कारण केंद्र सरकार तथा देश की संसद इस राज्य के लिए केवल रक्षा, विदेश तथा संचार के विषयों पर ही कानून तथा नीतियों का निर्धारण कर सकती है। बाकी विषयों पर प्रदेश की विधायिका के द्वारा अनुमोदित कानून तथा नीतियां ही राज्य में लागू होंगी। केंद्रीय कानूनों के अभाव में यहां पर एक प्रकार से राजनीतिक सामंतशाही तथा तानाशाही का राज हो गया। देश में भ्रष्टाचार मिटाने के लिए लोकपाल, सीएजी तथा सीबीआई की व्यवस्था है परंतु इस राज्य में ये तीनों लागू नहीं है। यह केवल धारा 370 के कारण है। इस प्रकार के वातावरण में जम्मू कश्मीर राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है, जिसका उल्लेख वहां के भूतपूर्व राज्यपाल श्री जगमोहन ने अपनी किताब में भरपूर किया है और उल्लेखित किया है इस भ्रष्टाचार के कारण वहां के नौजवान न तो रोजगार पा रहे हैं और ना वहां पर आंतरिक व्यवस्था सुचारु रुप से चल रही है। उपरोक्त कारणों से इस राज्य में न तो उदारीकरण के समय औद्योगिकरण ही हुआ और न ही कोई बाहरी निवेश यहां पर आया। इस समय जहां पूरे देश में प्रगति हुई, गरीबी मिटी तथा देसी तथा विदेशी निवेशकों ने देश के हर कोने में विकास पहुंचाया, वहीं पर भूमि तथा आधारभूत ढांचा न मिलने के कारण जम्मू कश्मीर इस प्रगति से दूर ही रहा। इस प्रगति के युग में हर देश तथा राज्य निवेशकों को उद्योग लगाने के लिए हर तरह की सुविधांएं उपलब्ध कराने के लिए हर समय तैयार रहते हैं परंतु जम्मू कश्मीर की सरकार उद्योगपतियों को तथा निवेशकों को कुछ भी उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं है। इस कारण यहां पर उद्योगीकरण नहीं हुआ और ना ही रोजगार के मौके यहां के युवाओं को मिले। इस कारण जम्मू कश्मीर उद्योगों के क्षेत्र में 1960 की स्थिति में ही है। अभी भी यहां पर बागवानी, कृषि, कालीन बुनना जैसे कुटीर उद्योग ही हैं, जिनमें रोजगार प्रदान करने की क्षमता बहुत कम है। इस राज्य में रोजगार केवल सरकारी क्षेत्र में ही है, जिसकी क्षमता सीमित है तथा सरकारी नौकरियों सत्ताधारी राजनेताओं द्वारा अपने चहेतों तथा भ्रष्टाचार के द्वारा दी जाती हैं जो यहां पर युवाओं में आक्रोश तथा असंतोष का मुख्य कारण है। जम्मू कश्मीर में बेरोजगारी चरम पर है। इस समय छह लाख युवा रोजगार के लिए सरकारी एंप्लॉयमेंट एक्सचेंज में अपने नाम पंजीकृत करा कर रोजगार का इंतजार कर रहे हैं । बहुत सी केंद्रीय संस्थाओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि जम्मू कश्मीर में बेरोजगारी तथा युवाओं में असंतोष देश में अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। इसके साथ-साथ यह राज्य स्वास्थ्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में भी केवल इसलिए पिछड़ रहा है, क्योंकि यहां पर प्राइवेट क्षेत्र को अस्पताल तथा स्कूल खोलने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है। सरकारी अस्पतालों तथा स्कूलों की स्थिति से सब भली भांति परिचित हैं कि इन संस्थानों में किस प्रकार की सेवा मिलती है। इसलिए जहां देश के अन्य राज्यों के निवासियों को जहां आधुनिक शिक्षा, इलाज तथा रोजगार मिल रहा है, वहीं पर जम्मू कश्मीर के निवासी आधारभूत जरूरतों के लिए भी तरस रहे हैं तथा मायूसी में जीवन बिता रहे हैं।

उपरोक्त स्थिति आतंकवादी गतिविधि चलाने के लिए एक आदर्श स्थिति मानी जाती है। इसलिए हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान ने इस स्थिति का फायदा उठाकर अपनी पुरानी दुश्मनी को पूरा करने के लिए जम्मू कश्मीर में निजाम ए मुस्तफा तथा मुस्लिम राज जैसे नारों के द्वारा वहां के असंतुष्ट नौजवानों को अपने आतंकी तथा अलगाववादी संगठनों में मिलाना शुरू कर दिया। इसके लिए उसने पाकिस्तान में पनप रहे आतंकी संगठनों का रुख कश्मीर की तरफ कर दिया तथा यहां पर आतंकवादी गतिविधि शुरू कर दी। इसके लिए उसने अपने एजेंटों के द्वारा अलगाववादियों तक धन तथा हर प्रकार की सुविधा पहुंचाने की कोशिश की इसमें उसने सोशल मीडिया तथा संचार माध्यमों का भरपूर इस्तेमाल किया। इसका उदाहरण है पत्थरबाजी के लिए युवाओं की भीड़ जुटाना। पाकिस्तान की इस मुहिम में कश्मीर की मुस्लिम बहुल आबादी का उसने धार्मिक कट्टरपंथ के नाम पर भरपूर उपयोग किया तथा वहाबी इस्लाम का प्रचार करते हुए शरीयत के मुताबिक राज चलाने की मुहिम यहां पर चलाई तथा इसको जिहाद का नाम दिया। पाकिस्तान के द्वारा कश्मीर में फैली बेरोजगारी तथा असंतोष से ग्रस्त नौजवानों का शोषण उन्हें आतंकवाद में धकेल रहा है। बेरोजगारी से ग्रस्त युवाओं को थोड़े-थोडेए धन का लालच देकर उनसे आतंकी तथा पत्थरबाजी जैसी देश विरोधी गतिविधियां करवाई जाती है। एक बार जब कोई नौजवान इस में फंस जाता है तो उसको ब्लैकमेल करके इससे निकलने नहीं दिया जाता तथा इस प्रकार उस नौजवान का जीवन बर्बाद हो जाता है। इस तथ्य को वहां का एक आम नागरिक अच्छी प्रकार से जानता है तथा वह दबी जुबान में बार बार गुहार लगाता है कि कश्मीर से धारा 370 तथा 35ए हटा कर वहां पर देश के अन्य राज्यों के जैसा माहौल बनाया जाए जिससे वहां पर रोजगार तथा विकास हो। परंतु वहां के स्वार्थी राजनीतिज्ञ अपनी सामंती सोच के कारण इन धाराओं को नहीं हटाने दे रहे हैं तथा इन धाराओं को कश्मीरियत का रक्षक मान रहे हैं। परंतु वास्तव में ये धाराएं कश्मीर की रक्षा के स्थान पर वहां गरीबी, बेरोजगारी तथा पाकिस्तान द्वारा अशांति फैलाने का काम कर रही हैं। कश्मीर की इसी स्थिति का फायदा उठाकर पाकिस्तान की आईएसआई ने वहां पर अपना नेटवर्क अलगाववादियों के रूप में फैला रखा है जो अपनी गतिविधियां जमीन के ऊपर चलाते हैं तथा आतंकवादियों के द्वारा वहां पर असुरक्षा का वातावरण पैदा करके एक आम नागरिक को डराकर अपनी बात मनवाते हैं

आज पूरे विश्व में तरह-तरह के गतिरोधों तथा बंधनों को दूर कर के विकास को हर हिस्से में पहुंचाया जा रहा है। इसका सटीक उदाहरण उत्तरी कोरिया तथा अमेरिकी राष्ट्रपति की अभी हाल में हुई मुलाकात है। तो क्या ऊपरी तत्वों को ध्यान रखते हुए हमारे देश में जम्मू कश्मीर राज्य के विकास में बाधा बन रही धारा 370 तथा 35ए को क्यों नहीं हटाने पर विचार किया जा रहा है। इसका केवल एक ही कारण है सत्ता प्राप्ति के लिए तुष्टीकरण का तरीका। जबकि सत्ता प्रजातंत्र में मुद्दों के आधार पर प्राप्त की जानी चाहिए और इस समय जम्मू कश्मीर के लिए सबसे बड़ा मुद्दा केवल यह धारा ही है।

अब समय आ गया है जब जम्मू कश्मीर के आम नागरिकों को तथा देश की राष्ट्रवादी शक्तियों को एकजुट होकर धारा 370 तथा 35ए को हटाने के लिए संघर्ष करना चाहिए और इन धाराओं की आड़ में भ्रष्टाचार तथा सत्ता पर काबिज होने वाले राजनीतिज्ञों का खुलासा करना चाहिए। आज कश्मीर की जनता कष्ट में है और यह मानवता के प्रति बहुत बड़ा अपराध है। विश्व के हर धर्म एवं समुदाय के अनुसार गरीबी तथा बेरोजगारी एक बहुत बड़ा पाप है इसलिए आइए जम्मू कश्मीर से उन स्थितियों को समाप्त करें जिससे वहां पर बेरोजगारी तथा गरीबी जैसा पाप करने के लिए वहां के निवासी मजबूर हैं।

Updated : 2018-07-11T22:22:25+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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