नई दिल्ली। आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। 7 फरवरी से इसकी शुरूआत होने वाली है। वहीं, भारत और श्रीलंका इसकी मेजबानी करने वाले हैं। इस मेगा टूर्नामेंट से पहले सभी टीमें वॉर्म-अप मैचों के जरिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देंगी। ये अभ्यास मुकाबले 2 फरवरी से 6 फरवरी के बीच खेले जाएंगे, जिनमें टीमें अपनी रणनीति, प्लेइंग कॉम्बिनेशन और हालात के मुताबिक खिलाड़ियों को परखेंगी।
इस बार कुल 16 वॉर्म-अप मुकाबले तय किए गए हैं। ये मैच भारत के बेंगलुरु, नवी मुंबई और चेन्नई, जबकि श्रीलंका के कोलंबो में खेले जाएंगे। चूंकि ये मुकाबले सिर्फ तैयारी के लिहाज से हैं, इसलिए इनके नतीजों का असर न तो टूर्नामेंट की प्वाइंट्स टेबल पर पड़ेगा और न ही आईसीसी रैंकिंग पर।
टॉस के बाद टीम चुनने का मौका
वॉर्म-अप मैचों की खास बात यह है कि इनमें टीमें अपने पूरे 15 सदस्यीय स्क्वॉड को आजमा सकती हैं। टॉस के बाद अंतिम प्लेइंग इलेवन घोषित करना जरूरी नहीं होता और खिलाड़ियों को रोटेट करने की पूरी छूट रहती है।
भारत के लिए सबसे अहम टेस्ट
भारतीय फैंस की नजरें खासतौर पर 4 फरवरी पर टिकी होंगी, जब डिफेंडिंग चैंपियन भारत की टीम साउथ अफ्रीका से भिड़ेगी। यह मुकाबला नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेला जाएगा। इस मैच के जरिए टीम इंडिया अपनी बल्लेबाजी की गहराई और गेंदबाजी संयोजन को बड़े मंच से पहले परखना चाहेगी।
किन टीमों को मिलेगा मौका
वॉर्म-अप मैचों में अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीमें हिस्सा लेंगी। वहीं अमेरिका, नेपाल, इटली और कनाडा जैसी एसोसिएट टीमें भी वर्ल्ड कप से पहले बड़ी टीमों के खिलाफ खुद को साबित करने का मौका पाएंगी। हालांकि इंग्लैंड और श्रीलंका वॉर्म-अप मुकाबले नहीं खेलेंगे, क्योंकि दोनों टीमें इस दौरान आपस में टी20 सीरीज में व्यस्त रहेंगी।
क्या होते हैं वॉर्म-अप क्रिकेट मैच
वॉर्म-अप मैच मुख्य टूर्नामेंट से पहले खेले जाने वाले गैर-प्रतिस्पर्धी मुकाबले होते हैं। इनका मकसद जीत-हार नहीं, बल्कि मैदान, पिच और हालात के मुताबिक टीम को ढालना होता है। इन मैचों के नतीजे न तो अंक तालिका में जुड़ते हैं और न ही आईसीसी पॉइंट्स को प्रभावित करते हैं।
इन मुकाबलों में स्क्वॉड का कोई भी खिलाड़ी खेल सकता है और जरूरत के मुताबिक बदलाव किए जा सकते हैं। कई बार भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमें अपने कुछ वॉर्म-अप मैचों में टीम-ए के खिलाड़ियों को भी उतारती हैं, जिससे जिम्बाब्वे, अमेरिका और नामीबिया जैसी टीमों को शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का अनुभव मिलता है।
टी20 वर्ल्ड कप से पहले वॉर्म-अप मैच क्यों जरूरी
वॉर्म-अप मुकाबले टीमों को कम दबाव वाले माहौल में अपनी तैयारियां परखने का मौका देते हैं। ऑफिशियल टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की तुलना में इनमें ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी होती है। खिलाड़ी रोटेशन, वर्कलोड मैनेजमेंट और अलग-अलग कॉम्बिनेशन आजमाने की आजादी टीमों को बिना किसी दबाव के रणनीति तैयार करने में मदद करती है।