मध्यप्रदेश की राजनीति और अफसरशाही में हलचल तेज है। सिंहस्थ की तैयारी से लेकर कांग्रेस की रणनीति और भाजपा संगठन तक, अंदर की पूरी कहानी।
अनुराग उपाध्याय
मोहन का फोकस उज्जैन पर
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का फोकस उज्जैन पर है। वजह है अगला सिंहस्थ। मुख्यमंत्री यादव चाहते हैं इस बार का सिंहस्थ ऐतिहासिक बने इसलिए वे कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। चाहे केंद्र से मिलने वाली इमदाद हो या राज्य और जिले का समन्वय हर काम वे खुद देख रहे हैं। मुख्यमंत्री यादव कहते हैं 'मैं उज्जैन से आता हूँ. इसलिए मेरी जवाबदारी और बढ़ जाती है।" मुख्यमंत्री सिंहस्थ को लेकर हर सड़क, बिज और अन्य निर्माणों की मॉनिटरिंग तक खुद कर रहे हैं। उन्हें पता है सिंहस्थ के दौरान किस सड़क पर कितना दबाव पड़ेगा और कितने लोग आएंगे। बैठकों में तो कई बार स्थानीय अधिकारी तक हैरान रह जाते हैं कि उन्हें एक एक गली मोहल्ला तक पता है। मुख्यमंत्री का दावा है सिंहस्थ तक उज्जैन कायाकल्प हो जाएगा और सिंहस्थ में आने वाली भीड़ को मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
दिग्विजय सिंह संभालेंगे एमपी कांग्रेस
दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश कांग्रेस की कमान संभाल सकते हैं। प्रदेश कांग्रेस के नेता यह मान के चल रहे हैं कि दिग्विजय सिंह के बिना कांग्रेस का काम चलने वाला नहीं है। हालाँकि दिग्विजय सिंह ने अपने पते नहीं खोले हैं। लेकिन ये माना जा रहा हैं कि राज्यसभा छोड़ने के पीछे दिग्विजय सिंह का बड़ा प्लान है। बताते है कांग्रेस के तमाम नेताओं से दिग्विजय सिंह सतत संपर्क में हैं और अगले विधानसभा चुनाव पर फोकस करने को कह रहे हैं। कांग्रेस सरकार गिरने की वजह दिग्विजय सिंह कांग्रेस में हाशिये पर आए थे। तब से दिग्विजय सिंह के मन में एक टीस है। जाहिर है वे अब अपने दम पर एक बार फिर कांग्रेस को एमपी में खड़ा करना चाहते हैं। दिग्विजय सिंह से जुड़े लोग बताते हैं अगले साल से वे प्रदेश कांग्रेस के दफ्तर में कार्यकर्ताओं के साथ बैठना शुरू करेंगे।
आईएएस अवि ने की तीसरी शादी
वल्लभ भवन में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा युवा आईएएस अवि प्रसाद की है। अवि प्रसाद की चर्चा उनकी शादियों को लेकर हो रही है। पिछले दिनों अवि प्रसाद ने 2017 बैच की आईएएस अंकिता धाकरे से कूनो रिजॉर्ट में विवाह किया। यह उनका अब तक तीसरा विवाह है। अवि प्रसाद को लेकर मंत्रालय में कई कथाएं चल रही हैं। बताते हैं तंत्र इस मामले पर नजरें लगाए हुए है। अवि प्रसाद ने इससे पहले 2016 बैच की आईएएस अफसर मीशा सिंह से विवाह रचाया था जो ज्यादा नहीं चला। 2014 बैच के अवि प्रसाद ने पहली शादी अपने ही बैच की आईएएस अफसर रिजु बाफना से की थी लेकिन इनकी शादी एक साल ही चल पाई। अवि प्रसाद के मामले में सबसे खास बात यह है कि इन्होने तीनों ही शादियां आईएएस अफसरों से की हैं।
शुक्ला आयुक्त बनने के चक्कर में
प्रमोटी आईएएस चंद्रशेखर शुक्ला सेवा क्षेत्र से जुड़े एक विभाग में आयुक्त बनने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। हालोंकि सरकार की इन पर टेढ़ी निगाहें हैं। शुक्ला अभी लूप लाइन में पड़े हुए हैं। सिंगरौली में कलेक्टर रहते शुक्ला उस समय चर्चा में आये थे जब वहां 800 रुपये में कटोरी चम्मच खरीदे गए थे। इसके बाद सरकार की बड़ी छीछालेदर हुई और शुक्ला को सिंगरौली से चलता किया गया। उस समय कटोरी चम्मच काण्ड के चलते महिला बाल विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया गया था।
यति की मनमानी पर रोक
कहते हैं सावधानी हटी और दुर्घटना घटी। ऐसा ही कुछ भोपाल में भाजपा के साथ हुआ। जिला अध्यक्ष रविंद्र यति ने अपने मनमर्जी से जिला कार्यकरणी बना ली और उसे सोशल मीडिया पर जारी कर दिया इसके बाद भोपाल भाजपा में घमासान मच गया। क्या मंत्री और क्या विधायक और क्या सांसद सब ने इस कार्यकरणी पर आपत्ति जाहिर कर दी। बताते हैं इसके बाद एक मंत्री ने तो यहाँ तक कह दिया कि अगला चुनाव संगठन इसी कार्यकारिणी से करवा लें। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि जिला कार्यकारिणी के लिए उन्होंने जो नाम दिए थे उन पर विचार ही नहीं किया गया। बस फिर क्या था प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने यति की कार्यकारिणी को निरस्त कर दिया। अब नए सिरे से सभी से रायशुमारी कर नई जिला कार्यकारिणी बन रही है। इस घटना के बाद से भोपाल भाजपा की जम के किरकिरी हो रही है।