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Drug Menace in Jabalpur: Ganja, Smack and Injectio

संस्कारधानी जबलपुर में पसरती नशाखोरी

संस्कारधानी जबलपुर में गांजा, स्मैक और एमडी ड्रग्स का फैलता कारोबार, छात्र-युवा सबसे ज्यादा चपेट में


संस्कारधानी जबलपुर में पसरती नशाखोरी

शिव कुमार कुशवाहा

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जबलपुर शहर को संस्कारधानी कहा जाता है, लेकिन सच्चाई बिलकुल इसके विपरीत नजर आने लगी है। पैसों की भूख ने इंसान को इतना लालची बना दिया है कि वह उन वस्तुओं का भी व्यापार करने लगा है, जिसका अंत अंततः बुरा ही होता है। शहर में गांजा तस्कर वर्षभर में 400 करोड़ का गांजा बेचते हैं। इस धंधे में लगे छोटे आपूर्तिकर्ता ग्राहकों को पसंदीदा जगह पर पुड़िया पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। गांजे की छोटी पुड़िया (2-4 ग्राम) 100 रुपए में बेची जाती है। जबलपुर शहर में एमडी ड्रग्स समेत नशीले सूखे पदार्थों की बिक्री 35 वर्ष पहले शुरू हुई थी। सबसे पहले यहां पर ड्रग्स आदतन नशाखोरों के बीच ही बेची जाती थी, लेकिन अब इसकी गिरफ्त में युवा, प्रौढ़, महिलाएं, युवतियां आ चुके हैं। शहर में ड्रग्स से घिरे लोगों की संख्या हजारों में है। इन्हें ड्रग्स की एक पुड़िया 300 रु. में मिलती है। ड्रग्स का यह कारोबार साल में 100 करोड़ को पार करता है।

  • महाविद्यालय में पढ़ने वाले 5 प्रतिशत से अधिक युवा स्मैक नशे की गिरफ्त में

  • कटनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, सिवनी, दमोह, सागर, बीना तक स्मैक की तस्करी का खेल

वर्षभर में बिकता है 400 करोड़ का गांजा

  • 8000 इंजेक्शन जब्त किए

  • 600 किलो गांजा पकड़ा

  • 18 से 45 आयु के गिरफ्त में

  • 100 से 300 में में विकती है पुड़िया

ओडिशा उत्तराखंड वाया मध्यप्रदेश गांजा आपूर्ति

मध्यप्रदेश में शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता हो, जब गांजा तस्करी का मामला न पकड़ा जाता हो। वाहनों में भरकर आया कई क्विंटल गांजा जब्त किया जा रहा है।गांजा तस्करी के लिए ओडिशा से वाया छत्तीसगढ़ होकर मध्यप्रदेश में सप्लाई किया जा रहा है।अब तक जितने कैस गांजा तस्करी के पकड़े गए, उनमें यही निकलकर सामने आया कि भारी मात्रा में गांजा ओडिशा से लाया जाता है।इसके अलावा उत्तराखंड से गांजे की तस्करी मध्यप्रदेश तक हो रही है।

ओएसटी केंद्र

स्थानीय विक्टोरिया अस्पताल में एक ओरल सब इंस्टीट्यूशन चैरेपी केंद्र, जिसे संक्षेप में ओएसटी कहते हैं, संचालित होता है। यहां पर नशे के आदी लोगों को दवाएं भी दी जाती हैं। उनकी काउंसलिंग भी की जाती है। इस केंद्र में हर रोज 100 से ज्यादा लोग उपचार के लिए आते हैं।

यहां से बिक रही नशे की खेप

डीएनडी बस स्टैंड/दीनदयाल बस स्टैंड के आसपास पुलिस ने बस स्टैंड के पास बड़ी मात्रा में गांजा जब्त किया था, जो इस इलाके को एक तस्करी/डीलिंग नोटिसबल पॉइंट बनाता है।

नशे की सप्लाई चेन

पुलिस सूत्रों के मुताबिक सम्भाग के कटनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, सिवनी के अलावा दमोह, सागर, बीना तक स्मैक की तस्करी की जा रही है। स्मैक की सबसे बड़ी मंडी जबलपुर और कटनी में है। अनुमान के मुताबिक कॉलेज में पढ़ने वाले पांच प्रतिशत युवक स्मैक के नशे की गिरफ्त में हैं।

599 किलो गांजा तस्करी, दो आरोपी गिरफ्तार

एसटीएफ (स्पेशल टॉस्क फोर्स) ने 26 दिसांबर 2025 को अनूपपुर-अंगहरी इाराके में एक ट्रक से ९२० किलो गांजा जब्त किया, जिसमे 2 करोषियों की गिरफ्तार किया है।

पकड़े गए आरोपियों के नाम

अंकित विश्वकर्मा, धनंजय सिंह पटेगर, दोनों को मौके से गिरफ्तार किया गया है और उनसे पूछताछ जारी है, ताकि पूरे गैंग और नेटवर्क का पता चल सके

85 किलो गांजा के साथ 4 तस्कर गिरफ्तार

मंदलाल राठौर (20), राम सिंह ठाकुर (24) राम बाबू (28), संदीप राठौर (30) इनके कब्जे से लगभग 85 किलो गांजा बरामद हुआ था।

हुक्का बार और ई-सिगरेट

जैसे-जैसे शहर में नशीली वस्तुओं का बाजार बढ़ता जा रहा है वैसे जैसे नशे को नई-नई चीजें भी बाजार में उपलब्ध होती जा रही हैं। इस समय शहर में हुक्का बार और ई सिगरेट का प्रचलन भी देखने में आने लगा है। हालाकि शुरू में यह खुलेतौर पर होटल आदि में उपलब्ध हो जाता था, लेकिन पुलिस की निरंतर दबिश के कारण अब यह चोरी-छुपे नक्युक्कों को अपने जाल में फंसा सहा है। कम उम्र के बच्चे विशेषकर राईस परिवार के घर के लड़के और लड़कियां इसकी लत के दायरे में आ रहे हैं।

छात्रों के बीच में घुसपैठ

जबलपुर शहर शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। यहां पर शिक्षा ग्रहण करने के लिए दूसरे शहर के छात्र भी आते हैं, जो कि बड़ी संख्या में छात्रावास में रखकर पढ़ाई करते हैं और कुछ मोहलते बस्तियों में किराये के मकान लेकर रहने लगते हैं। इप्स के तस्करों ने इन छात्र-छाओं के बीच में अपनी अच्छी घुसपैठ बना ली है। और उनकी मांग के हिसाब से समय-समय पर इन्हें नशा परोसते रहते हैं। तस्करों के व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इन कम उम्र के छात्र छात्राओं से ही प्राप्त होता है।

एमडीएम ड्रग्स की सप्लाई राजस्थान से

वहीं, एमडीएम जैसे जानलेवा इम्स की तस्करी मध्यप्रदेश में राजस्थान से होती है। इसका स्ट मध्यप्रदेश व राजस्थान के बॉर्डर पर मंदसौर, रतलाम व नीमच जिले से हैं। एमडीएम इग्स के जितने मामले पकड़े गए, उनमें पूछताछ में ये बात निकलकर सामने आई कि राजस्थान में इसे यहां लाया जाता है और आगे बढ़ाकर तस्कर इसे गुजरात उक सप्लाई करते हैं।

इन थाना क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे हैं मामले

जबलपुर में बेलचाग, ओमती, घमापुर, रांझी, अधारताल, हनुमानताल और गोहलपुर थाना क्षेत्र में सबसे अधिक नशा करने वाले क्षेत्रों में गिने जाते हैं। हाल ही में जबलपुर पुलिस में 1 या दो हजार नहीं जचकि करीब 18 हजार इंजेकाशन को जब्त करने की कार्रवाई की थी। जिसे इनों क्षेत्रों में सप्लाई करने की योजना बनाई जा रही थी। जहां जबलपुर पुलिस ने शातिर अपराधियों को घेराबंदी कर दबोचा था। हालाकि हैरान करने बाली बात यह थी, जिन इलाकों में इन इंजेक्शन की सप्लाई की जानी थी, वहां अपराधियों का पहले से ही अलग नेटवर्क था। जहां फुटकर तरीके से नशेड़ियों को इंजेक्शन की सप्लाई की जाती थी।

जिले में 8 माह में 161 लोगों पर प्रकरण दर्ज

पिछले 8 महीने में जिले की पुलिस ने लगभग 161 लोगों पर प्रकरण दर्ज किए थे। इनमें से 47 लोगों पर गांजा बेचने का आरोप था। इनसे लगभग ढाई सौ किलो गांजा पकड़ा गया था। इसके साथ ही 48 आरोपियों से 8000 इंजेक्शन जब्त किए गए थे। अन्य लोगों से दूसरे प्रकार के नशीले पदार्थ पकड़े गए थे। छोटे तस्करों की यह गिरफ्तारी मात्र नाम की है। नशे का यह व्यापार तो निरंतर अपने विकास को गति दे रहा है।

काउंसलिंग से नशे की लत से छुटकारा दिलाने की कोशिश

इंजेक्शन से नशा करने वालों की यहां पर काउंसलिंग की जाती है। इसका नशा करने वालों में कई प्रकार के गंभीर संक्रमण का खतरा बना रहता है। ड्रग्स लेने वालों को केंद्र से दवाइयां फ्री में दी जाती हैं। काउंसलिंग से नशा की लत से छुटकारा दिलाने की कोशिश की जाती है।

-डॉ. रत्नेश कुरारिया, मनोरोग चिकित्सा

नशे के भंवर में फंसे लोगों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभा रहे नशा मुक्ति केंद्र

लोगों को नशीले पदार्थों की लत से बचने के लिए राज्य सरकार की तरफ से अनेक कोशिशें की जाती हैं, इसके साथ ही अनेक एनजीओ ऐसे भी हैं, जो इस दिशा में सकारात्मक कार्य कर रहे हैं। शहर में संचालित एक ऐसा ही केंद्र है परमार्थ नशा मुक्ति केंद्र एवं पुनर्वास केंद्र। इस केंद्र के संचालक नरेंद्रसिंह लोधी हैं। वे नशे में डूब चुके लोगों को अपने यहां रखकर उनकी काउंसलिंग करते हैं, उन्हें नशे के दुष्प्रभावों को बताते हैं तथा नशा छोड़ने के लिए कहते हैं। इसके लिए व्यक्ति के परिवार वालों से पैसा भी लेते हैं। इसके लिए उन्हें सरकार की तरफ से पैसा भी दिया जाता है। इन नशा मुक्ति केंद्र के संचालकों का कहना है कि नशे को पूरी तरह से छोड़ना हर किसी के बस की बात नहीं है। इसके लिए व्यक्ति में मजबूत इच्छाशक्ति होना जरूरी है। इसके 593 साथ ही उसमें जीने की लालसा भी होना चाहिए। ऐसे अनेक लोग उनके यहां आते हैं, जो यह कहते हैं कि वह अब और जीना नहीं चाहते। वह ऐसा इसलिए कहते हैं, क्योंकि वे इस बात को भली-भांति जानते हैं कि उनकी इस नशे की आदत के कारण ना तो उनके घर में कोई इज्जत है और ना ही कोई समाज में। वे हर तरफ से दुत्कारे जाते हैं। स्थानीय नेताजी सुभाषचंद्र बोस कारागार में कैदियों की नियमित काउंसलिंग करने वाले एक काउंसलर का कहना है कि जेल में आने के बाद ऐसे कैदी जिनको सजा सुना दी जाती है, वह सभी ना चाहते हुए भी नशा छोड़ देते हैं। क्योंकि उन्हें यह सब जेल में नहीं मिल पाता है। हां, यह जरूर है कि शुरू में उन्हें ड्रग्स ना मिलने के कारण शारीरिक तथा मानसिक कष्ट झेलना पड़ता है।