भोपाल फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा रही फिल्मों और मेहमानों को लेकर विवाद गहराया, मप्र टूरिज्म बोर्ड के सहयोग पर उठे सवाल
अनुराग उपाध्याय भोपाल
मध्यप्रदेश का टूरिज्म बोर्ड एक बार फिर अपने आयोजन की विषय बस्तु को क लेकर विवादों के केंद्र में है। भोपाल के मिंटो हॉल में शनिवार 21 फरवरी से दो दिन का भोपाल फिल्म फेस्टिवल मप्र टूरिज्म बोर्ड (एमपीटी) के सहयोग से शुरू हो रहा है। निजी आयोजकों के साथ मिलकर आयेजित इस फेस्टिवल में कुछ फिल्में ऐसी भी हैं जो भारतीय समाज और परिवार व्यवस्था को दूषित करती है। इसमें उन चेहरों की मौजूदगी भी है जो न केवल शाहीन बाग धरने में सक्रिय रहे है बल्कि मोदी सरकार के हर निर्णय के विरुद्ध भी खड़े नजर आते हैं।
मप्र टूरिज्म बोर्ड और मप्र के हितः फिल्म उद्योग के लिए मन आकर्षण का केंद्र बन रहा है। बॉलीवुड की कई फिल्मों की शूटिंग अब मप्र में होने लगी है। फिल्मों के निर्माण और प्रमोशन के लिए यहां सशक्त फिल्म समितियां भी काम कर रही हैं, लेकिन मध टूरिज्म बोर्ड जिस फिल्म फेस्टिवल में प्रायोजक बना है, उसमें मप्र केंद्रित किसी भी फिल्म को नहीं दिखाया जा रहा है.प्रदेश के कलाकारों या यहां के महत्व की रेखांकित करने वाले भी कोई ऐसे प्रदर्शन इस फेस्टिवल में नहीं हैं, जिनसे मप्र के पर्यटन को प्रमोशन मिलता हो, इसके बावजूद टूरिज्म बोर्ड ने इस आयोजन की अपने आधिकारिक इवेंट में क्यों शामिल किया है? बड़ा सवाल यह कि मप्र के स्थानीय कलाकारों के लिए प्रायोजक बनने से कतराने पाला बोर्ड ऐसे विवादित आयोजनों के लिए किसको शह पर अपनी भागीदारी तय करता है।
भाजपा को कोसने वाले मेहताः हंसल मेहला एक वामपंथी निर्देशक हैं, जो बहुत ही सॉफ्ट प्रोपेगेंडा के माध्यम से अपनी वामपंथी सोच को भारतीय युकओं को चेतना में डालते हैं। 22 फरथ्री को दोपहर 3:15 बजे भोकल फिल्म फेस्टिवल द्वारा उनका एक सत्र आयोजित किया गया है, जिसका विषय है 'Finding Your Voice in Indian Cinema उनके कुछ कामों पर गौर किया जाए तो उनमें से उनकी एक फिल्म है Omerta है। कुछ आलोचकों ने इस फिल्म पर आरोप लगाया कि यह एक आतंकी का मानकीकरण करती है। इसके अलावा जिस मप्र सरकार का टूरिज्म बोर्ड इस पूरे आयोजन को प्रायोजित कर रहा है, उसी सरकार की वे कई बार खुले तौर पर आलोचना करते रहते हैं। आम चुनाव से पाले साल मेहता अन्य फिल्मकारों के रसभ एक अपील पर हस्ताक्षर करते हुए लोगों से भाजपा के विरुद्ध धर्मनिरपेक्ष दलों के पक्ष में मतदान करने का आग्रह करते नजर आए थे। हंसल भाजपा को जीत पर निराशा भी व्यक्त कर चुके हैं। अब उसी भाजपा सरकार का पर्यटन बोर्ड हंसल मेहता का लाल कारपेट मिला कर स्वागत कर रहा है।
एलजीबीटीक्यू का महिमा मंडनः फिल्म निर्देशक जाँग नांवियर की मास्टर क्लास' भी रविवार 22 फरवरी सुबह 10:30 से 11:30 बजे मिटी हाल में दिखाई जा रही है, इसका विषय 'आधुनिक लेखक के मन और पद्धति के अंदर है। बता दें जाँय द्वारा 2024 में निर्देशित की गई फिल्म 'पोर' में जबरजस्ती 'एलजीबीटीक्यू प्लस' विषय जोड़ा गया था। फिल्म में एक ही कक्षा में पढ़ने वाली दो लड़कियां सेन सेक्स रिलेशनशिप में दिखाई गई है। एक चरित्र को बैकस्टोरी में बच्चों के यौन उत्पीड़न का मुद्दा चित्रित किया गया है।
किशोरियों के यौन सुख का प्रदर्शन
फिल्म की स्क्रीनिंग की जा रही है। इसमें दिखाया गया है कि भीषाल फिल्म फेस्टिवल द्वारा एक निजी कॉलेज के सहयोग से कुकुरः दइव' (Kuchur The fitch) नामक एक लघु कैसे एक किशोरी जिज्ञासावश कम उम्र में ही 'फीमेल प्लेजर का आनन्द लेती है। ऐसी फिल्मों का एकमात्र उद्देश्य समाज में भारतीय बेटियों के बीच विमर्श को दुषित करना है। पृष्ठभूमि में सोची-समझी रणनीति के तहत एक रूढ़िवादी भारतीय परिवार को दिखाया गया है। भोपाल के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में इसे प्रदर्शित कर आयोजक लोग क्या बढ़ावा देना बाहते हैं? इस फिल्म की निर्देशक सुश्री वैदांगी शर्मा और निर्माता सुमेधा मित्तल है।
कागज नहीं दिखाने वाले ग्रोवर....
'किस' (2022) एक हिंदी लघु फिल्म है. जिसका निर्देशन वरुण ग्रोवर ने किया है। कहानी एक छोटे शहर के स्कूल में घटित होती है। दो किशोरों ने एक 'किस' (चुंबन) विवाद का कारण बन जाता है। किस जैसी पूरी तरह 'वीक' प्रोपेगेंडा कही जाने वाली फिल्मी का उद्देश्य समाज में वोक विचारधारा को युवाओं के बीच खड़ा करना है। ऐसी फिल्मों से एलजीबीटीक्यू विचारधारा को बढ़ावा मिलता है। फिल्म के निर्देशक वरुण ग्रोवर लंबे समय से अपने स्टैंड-अप शॉ और इंटरव्यू के माध्यम से युवाओं में कमपंथी विचारों को बढ़ावा देते रहे हैं। ये भाजपा और हिंदुत्व के विरुद्ध भी असहमति दर्ज कराते रहे हैं। सीरए-एनआरसी के विरोध में हुए शाहीन बाग घटनाक्रम में वरुण सक्रिय रहे। उन्होंने ही कागज नहीं दिखाएंगे' जैसा नारा बुलंद किया था।