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AI Revolution in Logistics and Transport Sector in

लॉजिस्टिक्स और परिवहन में एआई क्रांति

एआई और डेटा साइंस भारत के परिवहन और लॉजिस्टिक्स सिस्टम को स्मार्ट बना रहे हैं। ट्रैफिक, रेलवे और सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव दिख रहा है

लॉजिस्टिक्स और परिवहन में एआई क्रांति

प्रो. मनोज चौधरी

परिवहन और लॉजिस्टिक्स (आवागमन और माल ढुलाई) देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ने वाले प्रमुख इंजन हैं। हम जो भी सामान इस्तेमाल करते हैं, जो भी यात्रा करते हैं और जिन शहरों में रहते हैं, सब कुछ लोगों, सामान और सेवाओं की सुचारु आवाजाही पर निर्भर करता है. लेकिन पूरी दुनिया में, और खास तौर पर भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देशों में, परिवहन व्यवस्था के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ हैं, जैसे शहरों में जाम, सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी, ईंधन की बढ़ती कीमतें, प्रदूषण और जटिल होती सप्लाई चेन। पुरानी योजना और काम करने की पारंपरिक पद्धतियां अब इतनी बड़ी और जटिल व्यवस्था को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसी स्थिति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा माइंस एक बड़ा बदलाव लाने वाली तकनीक बनकर सामने आए हैं, जो यह बदल रहे है कि परिवहन और लॉजिस्टिक्स सिस्टम कैसे बनाए जाएं, कैसे चलाए जाएँ और कैसे बेहतर बनाए जाएँ। 

एआई और डेटा साइंस से परिवहन में बड़ा बदलाव आज की परिवहन व्यवस्था से बहुत बड़ी मात्रा में डेटा बनता है जैसे ट्रैफिक सेंसर, जीपीएस वाले वाहन, इलेक्ट्रॉनिक टोल सिस्टम, टिकटिंग प्लेटफॉर्म, निगरानी कैमरे, मौसम की जानकारी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस इस कच्चे और तेजी से आने वाले भारी डेटा को उपयोगी जानकारी में बदल देते हैं। इससे परिवहन सिस्टम पहले से अंदाजा लगाने वाला, हालात के अनुसार बदलने वाला और जादा मजबूत बन जाता है।

यह बदनाव खास तौर पर भारत में साफ दिखाई देता है, जहां बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म और नई बुनियादी डांचा परियोजनाएँ यह तप कर रही है कि लोगों की आवाजारी और सामान की कुलाई की योजना कैसे बनाई जाए और कैसे चलाई जाए। शहरों और हाईवे पर यातायात में अब मशीन लर्निंग पर आधारित इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम ट्रैफिक और टोल संचालन का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। इसका एक प्रमुख उदाहरण है फास्टैग, जिससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल पूरी तरह डिजिटल हो गया है। इससे वाहनों की आवाजाही, ट्रैफिक की भीड़ और रास्तों के इस्तेमाल से जुड़ा रियल टाइम डेटा मिलता है। यह डेटा जाम का विश्लेषण करने, ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संभालने और सही आधार पर नई सड़क तव बांचा योजना बनाने में मदद करता है। इसी तरह कई भारतीय शहरों में एआई आधारित ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम लगाए गए हैं, जो कैमरों और सेंसर से मिलने वाले लाइन डेटा के आधार पर सिग्नल का समय ठीक करते हैं, बेवजह रुकने का समय घटाते हैं और चौराहों की सुरक्षा बढ़ाते हैं।

लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूएलआईपी) जैसे डेटा प्लेटफॉर्म एआई आधारित फैसलों की दिशा में बड़ा कदम हैं। यह प्लेटफॉर्म रेलवे, बंदरगाह, सड़क परिचान और कस्टम्स का डेटा एक साथ जोड़कर भारत के लॉजिस्टिक्स सिस्टम की एक साइन डिजिटल रीढ़ तैयार करता है। इस पर एआई और उन्नत विश्लेषण से मांग का अनुमान, बेहतर रूट चुनना और सप्लाई चेन में अटकाव वाले स्थानों की पहचान करना आसान होता है। ये सुविधाएँ खास तौर पर तब बहुत जरूरी हो जाती हैं, जब देश में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, गति शक्ति कार्यों टर्मिनाल और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, ताकि लॉजिस्टिक्स लागत घंटे और सप्लाई चेन ज्यादा भरोसेमंद बन सके। 

नदीं बुनियादी ढांचा परियोजनाएँ एआई और डेटा साइंस की भूमिका को और मजबूत बनाती हैं। उदहरण के तौर पर चिनाब ब्रिज जैसी बड़ी परियोजनाओं में सुरक्षा और लंबे समय तक भरोसेमंद संचालन के लिए सेंसर से मिलने बाला उंटा, बांचे की सेहत की निगरानी और पहले से अंदाजा लगाने वाली तकनीक का खूब इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह बंदे भारत ट्रेनों में बहुत तेजी से और बड़ी मात्रा में डेटा मिलता है, जिससे एआई समय-सारणी बेहतर बनाने, बिजली की खपत घटाने, मात्रियों की भीड़ को संभालने और रखरखाव की योजना बनाने में मदद करता है। 

जैसे-जैसे भारत हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे डेटा के आधार पर नियंत्रण, रिकल टाइम निगरानी और पहले से मरम्मत की तैयारी करना बेहद जरूरी से जाएगा, ताकि तेज रफ्तार में भी सुरक्षा, समय की पाबंदी और कामकाज की क्षमता बनी रहे। रेलवे, विमानन और हाईवे, तीनों क्षेत्रों में एआई का सबसे असरदार उपयोग 'प्रीडिक्टिव मेंटेनेंस' यानी पाहते से खराबी का अंदाजा लगाकर रखरखाव करना है। पटरी, ट्रेन के डिब्बे, सिग्नल सिस्टम, पुल और विमान के हिस्सों से मिले डेटा का विश्लेषण करके एआई शुरुआती स्तर पर ही खराबी के संकेत पहचान लेता है। इससे हादसों का खतरा कम होता है, सेवाओं में रुकावट कम होती है और बुनियादी ढांचे की कुल लागत भी काफी कम हो जाती है। इन सभी उपयोगों को आगे बढ़ाने में कुछ सहायक तकनीके भी बहुत महत्वपूर्ण हैं, जैसे निरीक्षण को अपने-आप करने के लिए कंप्यूटर विजन, जटिल परिवहन सिस्टम का डिजिटल मॉडल बनाने के लिए डिजिटल ट्विन, लगातार निगरानी के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रियल टाइम डेटा विश्लेषण प्लेटफॉर्म।

ये सभी मिलकर परिव्वान व्यवस्था को पुराने तरीके की बिखरी और समस्या आने के बाद कार्रवाई करने वाली प्रणाली से बदलकर, पहले से अनुमान लगाने वाली, आपस में जुड़ी हुई और समझदारी से चलने वाली प्रणाली बना रही हैं। यही बदलाच भारत के उस लक्ष्य का आधार है, जिसमें देश एक सुरक्षित, कुशल और दुनिया में प्रतिस्पर्धा करने वात्त्ता परिवहन और लॉजिस्टिक्स तंत्र बनाना चाहता है। परिवहन और लॉजिस्टिक्स को विशेष एआई विशेषज्ञों की जरूरत क्यों है भारत रेलवे, एक्सप्रेसवे, बंदरगाह, हवाई अड्डों और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क में बहुत बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है। इसके लिए ऐसे पेशेवरों की जरूरत है, जिन्हें एआई की तकनीक भी आती हो और परिवहन व लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की वास्तविक सीमाओं और जरूरतों की समझ भी हो।

इस बदलाव के केंद्र में ऐसे नए तरह के इंजीनियरों की मांग है, जो केकल एल्गोरिदम और डेटा ही नहीं जानते हों, बल्कि परिवहन नेटवर्क, सामान की आवाजाही और बुनियादी ढांचा प्रणालियों के काम करने के तरीके को भी अच्छी तरह समझते हों। इस राष्ट्रीय और वैश्विक जरूरत को पूरा करने के लिए गति शक्ति विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। इस विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य भारत के परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए भविष्य के लिए तैयार प्रतिभाएँ तैयार करना है। यह देश का पहला विश्वविद्यालय है, जो केवल परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर केंद्रित है। इसका शिक्षा मॉडल सामान्य इंजीनिसरिंग पढ़ाई से आगे जाकर व्यावहारिक तकनीक, मल्टीमॉडल परिवहन, लॉजिस्टिक्स की दक्षता और बड़े स्तर पर डेटा आधारित फैसलों पर जोर देता है। 

इस विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी ताकत उद्योग और शिक्षा के बीच मजबूत जुड़ाव है। रेलवे, साईवे बंदरगाह, विमानन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों के साथ लगातार संपर्क बना रहता है, जिससे पढ़ाई वास्तविक समस्याओं से जुड़ी रहती है। इससे छात्रों को असली डेटा, मौजूदा सिस्टम और नई तकनीकों के साथ काम करने का मौका मिलता है। नतीजा यह होता है कि छात्र पढ़ाई को सीधे व्यवहार में बदल पाते हैं और करियर की शुरुआत से ही सार्थक योगदान दे पाते हैं। देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए विशेष और आधुनिक शैक्षणिक कार्यक्रमों के जरिए गति शक्ति विश्वविद्यालय इस बदलाव की अगली कतार में खड़ा है। यह विश्वविद्यालय ऐसे इंजीनियर तैयार कर रहा है जो आने वाले समय के परिवहन सिस्टम को डिजाइन करेंगे, बेहतर बनाएँगे और उसका नेतृत्व करेंगे। रूट प्लानिंग को बेहतर बनाना, राजस्व प्रबंधन और रखरखाव व सुरक्षा के लिए भविष्य का अनुमान लगाने वाली तकनीकों पर होने चात्य उन्नत शोध, देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने की मजबूत नींव बनेगा।