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उत्पादन से उपयोग तक सर्व घातक : टुबैको टोक्सिन, इच्छाशक्ति से ही समस्या का समाधान सम्भव

डॉ. सुखदेव माखीजा

उत्पादन से उपयोग तक सर्व घातक : टुबैको टोक्सिन, इच्छाशक्ति से ही समस्या का समाधान सम्भव
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वेबडेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विभिन्न माध्यमों से सम्पन्न विविध,सर्वेक्षणों,अध्यनोंतथा शोध कार्यों के अनुसार बहु आयामी विकास के गत तीन दशकों के दौरमें निरंतर औद्योगिक विस्तार, सतत आधुनिकीकारण, नैसर्गिक संसाधनों के अनियंत्रितदोहन,बाजारवादकी जटिलताओं तथा सामाजिक विषमताओं के कारण वैश्विक, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय,सामाजिक, पारिवारिक एवं व्यक्तिगत परस्तर किसी न किसी रूप में दुश्प्रभाव होता रहा है,परन्तु तम्बाकू तथा तम्बाकू जन्य पदार्थों के कारण,उनके उत्पादन से उपयोग तक की अनेक प्रक्रियाओं के दौरान,पृथ्वी केसंसाधनोंऔर मानव जीवन परचहुँ ओर से जो विषकारक प्रभाव हो रहे हैं वे सर्व घातकएवं सर्व विनाशक हैं|

यह हो सकता है कि किसीवस्तु के उत्पदान के आरम्भ का प्रथम चरणपर्यवारण का प्रतिघाती हो परन्तु विकास के सिद्दांतों एवं उन्नति के उदेश्यों के अनुसार उसवस्तु काअंतिमलक्ष्य जीवन उपयोगी ही होता है|लेकिन यह एक विडम्बनाहैकितम्बाकू एवं आधारित पदार्थों के उत्पादन से उपयोग तक की प्रत्येक स्तिथि में "अंतका आरम्भ (स्टार्ट टू फिनिश" जुड़ा हुआ है|तम्बाकू तथा उससे जनित उत्पादन ,सिगरेट, बीड़ी, हुक्का,पान मसाला ,गुटका आदि उत्पादन अनेक प्रकार सेपृथ्वी ,पर्यावरण तथा जीवन को गम्भीर हानियाँ पंहुचाते हैं |विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधीन संचालित "वर्ल्ड हेल्थ ओब्ज़र्वेटर एजेंसी" के अनुसार इन घातक हानियों से पृथ्वी, जल एवं वायु के मुख्यतः पांच स्तरों पर भयंकरप्रदूषण केसाथ व्यापक आर्थिक हानि भीहोती है|वैश्विकपर्यावरण पर प्रति वर्ष होने वालेदुष्प्रभावों के भयावह आंकड़े

चरणबद्द रूप से निम्नानुसार हैं -

प्रथम चरण :उत्पादन:तम्बाकू कीखेती करनेसे 3.50 मिल्लियन हेक्टेअर भूमिनष्ट होती है,लगभग 200,000 हेक्टेअरक्षेत्र मेंवनसंहार होता है,600,000,000 वृक्षों की कटाई होती हैजल,जीवाश्म ,जलीय जंतुओं को अप्पूर्ण क्षति,मिटटी,मिनिरल तथा मेटलस के भूमिगत स्त्रोतों को हानि|

द्वितीय चरण: तम्बाकू पदार्थों का औद्योगिक उत्पादन:वार्षिक 6 ट्रिलियन सिगरेट्स के निर्माण में 84 मिल्लियन टन कार्बन डाईओक्साईड गैस का उत्सर्जन,22,000,000,000 टन जल का दुरुपयोग होता है|

तृतीय चरण: वितरण/उपयोग 70 प्रकार के कैसर कारक रसायनों काविष सेवन,500/-बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर राशि का अनावश्यक व्यय|

चतुर्थ चरण:विषैले अपशिष्टों का गम्भीर फैलाव:4.50 ट्रिलियन सिगरेट बट्स के निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था का अभाव|

पंचम चरण: दीर्घकालीन प्रदूषण :1.7 बिल्लियन पौंड तम्बाकू अपशिष्ट से निकले संग्रहित, 7000 विषैले रसायान अनेक वर्षों तक पर्यावरण प्रदूषण के साथ विष जन्य रोग उत्पन्न करते रहते हैं| भयावह व्यसन की भीषण व्यथा:विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अधिसूचित "विश्व तम्बाकू एपिडेमिक प्रतिवेदन 2019" के अनुसार वर्तमान में विश्व में तम्बाकू पदार्थ सेवी व्यक्तियों की संख्या लगभग एक अरब तीस करोड़ है | इनमें से प्रतिवर्ष लगभग 80 लाख रोगियों की की मृत्यु तम्बाकू जन्य रोगों की जटिलताओं के कारण होती है| वैश्विक तम्बाकू व्यसन स्तर में भारत का द्वितीय स्थान है | देश में तम्बाकू उत्पादों से व्यसन ग्रस्त व्यक्तियों की संख्या लगभग 12 करोड़ है तथा प्रतिवर्ष लगभग10 लाखरोगियों की मृत्यु तम्बाकू जन्य रोगों की गम्भीर्ताओं के कारण होती है |

उपरोक्त तथ्यों से उपजित अत्यधिक चिंता का विषय यह है किविश्व में प्रति सेकंड एक मृत्यु तम्बाकू जन्य शारीरिक जटिलताओं के कारण होती है |इनमें लगभग दस लाख वे निर्दोष व्यक्ति होते हैं जो स्वयं तो धूम्रपान नहीं करते लेकिन धूम्रपान करने वालों के शौक एवं व्यसन के कारण द्वतीयक धूम्रपान(सेकंडरी स्मोकिंग) केशिकार हो जाते हैं|इनमे लगभग 28 % वे मासूम बच्चे भी होते हैं जिन्हें अपने ही अभिभावकों तथा परिजनोपरिजनों के व्यसन का दंड भुगतना पड़ता है|चूंकि सेकंडरी स्मोकिंग में "अन्फिल्टरड" घातक गैसेस फेफड़ों में सीधे प्रवेश होता है इसलिए विशेषकर बच्चों में इस प्रकार का धूम्रपान प्रत्यक्षधूम्रपानसे बहुत अधिक हानिकारक होता है |

मानव शरीर का ऐसा कोई भाग अथवा अंग नहीं है जिस पर तम्बाकू जन्य व्यसन का दुष्प्रभाव न होता हो परन्तु प्राणवायु को संधारित करने वाले जीवनदायी अंगों"फेफड़ों" पर इस व्यसन का विषजन्य प्रभाव प्राणघातक होता है| विश्व स्वास्थ्य संगठन के माध्यम से संपन्न किए गए विभिन्न अध्यनों के अनुसार तम्बाकू तथा उसके विषैले धुएँ में पाए जाने वाले विषैले रसायन मानव शरीर के श्वसन तंत्र पर जो घातक प्रहार करते हैं उनसे उत्पन्न जटिल रोग निम्नानुसार हैं :-

फेफड़ों का कैंसर -

इस प्राणघातक रोग के मुख्य कारक तम्बाकू से उत्सर्जित धुंएँ के कैंसरकारी "कोम्प्लेक्स केम्मिकल्स" होते हैं | विश्व में प्रति वर्ष "लंग कैंसर" के कारण मृत रोगियों की गणना में तम्बाकू जन्य "लंग कैंसर" के रोगियों की संख्या लगभग दो तिहाई होती है| धूम्रपान के आदी व्यक्ति इसे छोड़ दें तो दस वर्ष तम्बाकू मुक्त रहने के बाद फेफड़े के कैंसर रोग की आशंका आधी हो जाती है |

दीर्घ कालीन श्वसन रोग (क्रोनिक रेस्पिरेटरी डिसीज़) : साँस अवरोधित करने वाले इस रोग में श्वसन नलिकाओं में विकार उत्पन्न हो जातें हैं जिसके कारण "ब्रोंकाइटिस" की खांसी कुछ समय बाद दमे के दौरे के रूप में आकर फेफड़ों की कार्य क्षमता को कम कर देती हैं |

अस्थमा -

इम्यून सिस्टम" कमजोर होने के कारण यह श्वास अवरोधी रोग प्राय: किशोरावस्था में ही प्रारंभ हो जाता है परन्तु धूम्रपान के धुंएँ में उपस्थित विषैले रसायनों की "एलर्जी" के कारण इस रोग के दौरों की संख्या एवं जटिलता बढ़ जाती है|

तपेदिक (टी.बी.) -

दीर्घ अवधी तक तम्बाकू सेवन/धूम्रपान करने से शरीर में रोग प्रतिरोध क्षमता कम हो सकती है,परिणाम स्वरुप तपेदिक होने की आशंका अधिक हो जाती है|

"वाईटल कैपेसिटी" की कमी -

घर अथवा कमरे के अन्दर बार बार धूम्रपान करने से वहां उत्पन्न वायु प्रदूषण के कारण उस स्थान पर रहने वाले ऐसे निर्दोष व्यक्ति एवं मासूम बच्चे भी "पैसिव स्मोकिंग" का शिकार हो जाते हैं जो स्वयं धूम्रपान नहीं करते | कई दिनों तक तम्बाकू के "अन फिल्टर्ड" धुएं को सांस के साथ लेने के कारण श्वसन क्षमता कमजोर होने लगती है जिससे सामान्य कार्य शक्ति कम हो जाती है |एक बंद कमरे में धूम्रपान के बाद उसके विषैले धुंएँ का प्रभाव लगभग पांच घंटे तक रहता है |

तम्बाकू मुक्त विश्व अभियान में "विश्व तम्बाकू निषेध दिवस" की भूमिका -

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा संचालित आठ स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में से एक प्रमुख स्वास्थ्य अभियान है "विश्व तम्बाकू निषेध अभियान". इस विश्वव्यापी अभियान का प्रतीक दिवस है "विश्व तम्बाकू निषेध दिवस" जिसका प्रति वर्ष 31 मई को पूरे विश्व में आयोजन किया जाता है. वर्ष 1987 से निरंतर आयोजित किए जा रहे इस वार्षिक महा अभियान हेतु इस वर्ष का चेतावनी सन्देश वाक्य है

" तम्बाकू से पृथ्वी प्रदूषण एवं जीवन संकट से मुक्ति"

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा समस्त देशों हेतु वर्ष 2025 तक तम्बाकू सेवी जनसंख्या में न्यूनतम तीस प्रतिशत की कमी का लक्ष्य निर्धारित किया है | इस सन्दर्भ में भारत शासन द्वारा एक सौ चार करोड़ रुपए की राशि का आवंटन किया है | विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2030 तक असंक्रामक रोगों के कारण मृत्यु दर को लगभग एक तिहाई कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है | "लंग कैंसर" तथा "क्रोनिक रेस्पिरेटरी" रोग भी असंक्रामक रोगों की

श्रेणी में आते हैं अत: इन रोगों को नियंत्रित करना ही विश्व तम्बाकू निषेध दिवसमुख्य उदेश्य है |इस संकल्प की पूर्ती के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शासकीय तथा स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से जन जागरूकता हेतु दिशा निर्देश प्रतिपादित किये हैं जो निम्नानुसार हैं :-

  • - स्वस्थ शरीर में स्वस्र्थ श्वसन तंत्र के महत्व के बारे में अवगत करना|
  • -तम्बाकू तथा इसके उत्पादनों के प्राणघातक प्रभावों के सम्बन्ध में जागरूक करना
  • - धूम्रपान से फेफड़े केकैंसर के बारे में चेतवानी जारी करना |
  • - तम्बाकू उत्पादन तथा इसके सार्वजनिक उपयोग को नियंत्रित करना |
  • - तम्बाकू जानी महामारी से विश्व को बचाना |
  • - तम्बाकू उत्पादनों के व्यापार को प्रतिबंधित करना |
  • - तम्बाकू उत्पादनों के निर्माण तथा व्यापार पर अधिकतम कर लागू कराना |
  • - तम्बाकू की कृषि को रोक कर किसानों कप वैकल्पिक कृषि हेतु प्रोत्साहन देना |

तम्बाकू मुक्ति से जीवनदायी लाभ:विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों तथा विभिन्न सन्दर्भ पत्र –पत्रिकाओं में उल्लेखित तथ्यों के अनुसार तम्बाकू सेवन एवं धूम्रपान छोड़ने मानव शरीर में अनेक जीवनदायी परिवर्तन होते हैं जो मुख्यतः निम्नानुसार हैं :

  • बड़ी हुई ह्रदय गति लगभग 30 मिनट में सामान्य हो जाती है|
  • विषैली गैस कार्बन मोनो ऑक्साईड का रक्त स्तर लगभग 12 घंटे में सामान्य हो जाता है|
  • उचरक्तचाप लगभग 30 मिनट में कम होने लगता है |
  • दो से आठ सप्ताह में रक्त संचार सुधरने लगता है |
  • एक से छ: माह में खांसी का प्रकोप कम हो जाता है |
  • 6 से12 माह में सांस फूलने की प्रवृति क्षीण होने लगती है |

एक वर्ष में तम्बाकू जन्य ह्रदय रोगकीआशंका, निरंतर धूम्रपानकरने वालों की तुलना में लगभग50% कम हो जाती है। 4 वर्षों में तम्बाकू सेवन के कारण उत्पन्न मस्तिष्क आघात की आशंका भीकाफी कम हो जाती है |

व्यसन मुक्ति के उपाय -

तम्बाकू एक धीमी गति का विष है | तम्बाकू सेवन पर निर्भरता (एडिक्शन) विभिन्न रोगों का एक जटिल संकुल है |इसमें शरीर की क्रियाओं,विचारों एवं व्यवहार को प्रभावित करने वाले रोग उत्पन्न होते हैं जिनका उपचार बहुत ही कठिनतथा दीर्घकालिक होता है| परन्तु एक आशाजनक पहलु यह भी है कियदि समय पर उपचार प्राप्त हो तो इसके निदान में सफलता मिल सकती है | चेतावनी,सम्वेदना,उपहार तथा उपचार के चार सूत्री सिद्दांतो पर आधारित बहुआयामी उपायों से इस व्यसन से मुक्ति संभव है |व्यक्तिगत,पारिवारिक,सामजिक,राष्ट्रीय तथा विश्व स्तर पर तम्बाकू मुक्ति के व्यापक अभियानों द्वारा आर्थिक तथा जीवनघाती समस्या का समाधान सम्भव है |

तम्बाकू मुक्ति के व्यक्तिगत तथा व्यवहारिक उपाय -

प्रबल इच्छाशक्ति से तत्काल रूप से एक ही प्रयास में तम्बाकू त्याग करना, धीरे धीरे प्रयास करने से अधिक प्रभावी होता है | स्वयं त्याग कर दूसरों को प्रेरित करने से आत्मसंतोष प्राप्त होता है | योग तथा आयुष चिकित्साप्रणालीके विकल्प भी उपलब्ध हैं |

परामर्श का प्रभाव -

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार तम्बाकू जन्य रोग " पूर्ण रोकथाम योग्य रोगों की श्रेणी में आतें हैं|सामुदायिक चिकित्सा विज्ञान के एक सर्वे के अनुसार सामाजिक परामर्शदाता द्वारा दी गए 5 मिनट के परामर्श से लगभग 20% प्रतिशत व्यति तम्बाकू सेवन छोड़ देते हैं| वहीं चितिसक द्वारा दिए गए 30 मिनट के परामर्श से लगभग 70% प्रतिशत व्यक्ति तम्बाकू सेवन से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं |

वैधानिक तथा प्रशासकीय प्रयास: तम्बाकू निषेध अभियान के उद्देश्यों के लक्ष्य प्राप्त करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा"फ्रेमवर्क कन्वेनशन ऑन टुबेको कण्ट्रोल:2003 लागू किया गया है| भारत सहित 180 देशोंके संगठन इस अभियान के सहभागी हैं| राष्ट्रीय स्तर पर इस परियोजना को लागू करने हेतु राष्ट्रीयस्वास्थ एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा"राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम:2007 लागू किया गया है जिसके अधीन सार्वजनिक धूम्रपान दंडनीय अपराध है |इसके अतरिक्त तम्बाकू त्तथा सिगरेट पदार्थों के उत्पादन ,व्यापार,वितरण,विज्ञापन तथा उपयोग के नियंत्रण के लिए केन्द्रीय शासन द्वारा अधिसूचित"कोटपा एक्ट :2003 एवं संशोधन 2015 तथा"खाध्य सुरक्षा अधिनियम 2011भी प्रभावशील है |

Updated : 31 May 2022 1:08 PM GMT
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स्वदेश वेब डेस्क

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