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जीव दया एवं सामाजिक सद्भाव हेतु समर्पित जीवन: साधु वासवानी

शाकाहार दिवस के रूप में मनाई जाती है साधु वासवानी जयंती

जीव दया एवं सामाजिक सद्भाव हेतु समर्पित जीवन: साधु वासवानी
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डॉ. सुखदेव माखीजा

स्वदेश वेबडेस्क। "जीव सेवा जगदीश्वर सेवा" की पुण्य सद्भावना से सिंचित कर्मयोगी साधु वासवानी जी के सद्संदेशों के उदेश्यों में जीव दया एवं सामाजिक सद्भाव का चिंतन समग्र रूप से समाहित था| 25 नवम्बर 1879 के दिन अखण्ड भारत के सिन्ध प्रान्त के हैदराबाद में जन्मे,अहिन्साव्रती,दार्शनिक,शिक्षाविद,स्वतंत्रता सैनानी,समाज चिन्तक साधु थावारदास लीलाराम वासवानी की याद में उनका जन्मदिन ने देश-विदेश में "शाकाहार दिवस" के रूप में मनाया जाता है |

अन्धकार को दोष न देते हुए प्रकाश के प्रसार के लिए युवा वासवान 20 साल की आयु में मुंबई विश्विद्यालय से स्नातकोत्तर करने के बाद मेट्रोपोलिटन कोलेज" में दर्शनशास्त्र आचार्य के रूप में नौकरी की। उन्होंने अपने अध्यापन काल में चरित्र निर्माण से राष्ट्र निर्माण" के सन्देश के माध्यम से विद्यार्थियों में संस्कारों की भावना जागृत करने के लिए महत्वपूर्ण अभियान चलाया। शिक्षा जगत में उन्हें "उपनिषद",गुरुग्रंथवाणी "बाईबल" तथा कुरान जैसे पवित्र धर्मग्रंथों की सटीक व्याख्या के पारंगत विद्वान के रूप में मान्यता प्राप्त थी |

1910 में बर्लिन में आयोजित "विश्व धर्म सम्मेलन में उन्होंने भारतीय धर्मशास्त्र के मानवीय मूल्यों एवं विश्वशान्ति पर आधारित विषय पर सारगर्भित व्याख्यान देकर अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की तथा भारत वापस आकर आपनी माताश्री वर्णादेवी से आशीर्वाद लेकर आजीवन अविवाहित जीवनव्रती के रूप में राष्ट्रीय चेतना तथा समाज सेवा के समर्पित जीवन में पदार्पण किया| 1933 में हैदराबाद में उन्होंने "मीरा मिशन" के माध्यम से बालिकाओं हेतु शिक्षण संस्थान तथा युवाओं के लिए संस्कार केंद्र स्थापित किए | महात्मा गांधीजी द्वारा प्रकाशित "यंग इंडिया" पत्रिका में राष्ट्रीय तथा सामजिक विषयों पर समसामयिक आलेखन के साथ साथ उन्होंने "असहयोग आन्दोलन" के प्रस्ताव लेखन की भूमिका में भी सहभागिता प्रदान की| साहित्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान बहुआयामी रहा है | मीरादेवी की कृष्ण भक्ति पर आधारित उनका काव्य सृजन "नूरी ग्रन्थ" के शीर्षक से प्रकाशित है | उनके द्वारा लिखित "मदरलैंड,बिल्डर्स ऑफ़ टुमॉरो,इंडिया इन चेन्स ,अपोस्टलस ऑफ़ फ्रीडम , इंडियन एडवेंचर्स,इंडिया अराएजंस,सीक्रेट्स ऑफ़ एशिया" आदि प्रमुख पुस्तकों तथा पत्र पत्रिकाओं का भी शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में विशेष स्थान है|

उनकी मृत्यु 16 जनवरी 1966 को पुणे में हुई। अंतर्राष्ट्रीय "ऊंथान सम्मान" से सम्मानित कर्मयोगी साधु टी एल वासवानी की अमूल्य संदेशों को चिरस्थायी रखने के लिए "साधु वासवानी मिशन" के माध्याम से आज भी शिक्षा, स्वास्थय ,जीव संरक्षण, अहिंसा , चरित्र निर्माण, नारी उत्थान,सामजिक समरसता ,विश्वशान्ति हेतु जन कल्याण सेवाएं संचालित हैं| भारत शासन द्वारा उनके समर्पित व्यक्तित्व तथा कृतित्व की स्मृती के लिए 25 नवम्बर 1966 को उनकी 87 वीं जयंती के उपलक्ष्य में विशेष डाक टिकट भी प्रकाशित किया गया है।

Updated : 2020-11-25T17:47:41+05:30
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स्वदेश वेब डेस्क

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