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माघ सप्तमी के दिन अवतरित हुए सूर्य देव, इसीलिए कहते हैं भानु सप्तमी

डॉ मृत्युञ्जय तिवारी

माघ सप्तमी के दिन अवतरित हुए सूर्य देव, इसीलिए कहते हैं भानु सप्तमी
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वेबडेसक। महर्षि कश्यप और देवी अदिति के गर्भ से हुआ था सूर्य देव का जन्म, इस दिन तीर्थ स्नान करने से सात प्रकार के महापापो का नाश होता है ।इस दिन दान-पुण्य का हजार गुना फल, अचला सप्तमी, रथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी आदि कई नामों से जाना जाता है।

पूरे माह महीने के स्नान का फल देने वाला पवित्र दिन है अचला सप्तमी। इस बार यह 28 जनवरी शनिवार को है । माघ महीना भारतीय महीनों में ग्यारहवें क्रम पर आता है। शुक्ल पक्ष के समयावधि में माघ महीने में 7 वें दिन, अर्थात सप्तमी तिथि, रथ सप्तमी का उत्सव मनाया जाता है। श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी ने बताया कि सूर्य पुराण के अनुसार इसी दिन महर्षि कश्यप और देवी अदिति के गर्भ से सूर्य देव का जन्म हुआ था । इसीलिए जो रथ सप्तमी पर सूर्य की उपासना करता है उसे आरोग्य, धन और संतान की प्राप्ति होती है ।

रथ सप्तमी का त्योहार वसंत पंचमी समारोह के दो दिन बाद किए जाते हैं। रथ सप्तमी का त्योहार पूरे भारत में मनाया जाता है। इस त्योहार के अन्य लोकप्रिय नाम माघ सप्तमी, माघ जयंती और सूर्य जयंती हैं। रथ सप्तमी को अचला सप्तमी, विधान सप्तमी और आरोग्य सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। रथ सप्तमी त्योहार भगवान सूर्य की जयंती के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर प्रकट हुए थे। इसीलिए इस सप्तमी तिथि को रथ सप्तमी के नाम से जाना जाता है। भगवान सूर्य देव ने इसी दिन अपना प्रकाश प्रकाशित किया था। इसलिए इसे सूर्य जयंती भी कहा जाता है। इस दिन भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए उनकी उपासना की जाती है। डॉ तिवारी के अनुसार माघी सप्तमी के दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और भगवान सूर्य का पूजन करती हैं। इस दिन व्रत रखने से महिलाओं को सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन सबसे पहले प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करें और विधि विधान से सूर्य देव का पूजन और अर्चन करें।

स्नान और अर्घ्यदान करने से आयु, आरोग्य व संपत्ति की प्राप्ति होती है। माघ मास का नियम पालन कर रहे श्रद्धालुओं को इस दिन सूर्यास्त के बाद भी स्नान करना चाहिए। स्नान से पहले उन्हें आक और बेर के सात पत्तों को तेल से भरे दीपक में रखकर अपने सिर के ऊपर से घुमाकर पुण्यसलिला नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। दीपक प्रवाहित करने से पहले 'नमस्ते रुद्ररूपाय, रसानां पतये नम:। वरुणाय नमस्तेस्तु' मंत्र का उच्चारण अवश्य करें। इसके बाद भगवान भास्कर की आरती करनी चाहिए। इस दिन केवल एक बार ही भोजन करना चाहिए। इस प्रकार रोग शोक आदि का नाशक यह महान व्रत है ।

माघी सप्तमी कथा

डॉ तिवारी बताते हैं कि स्कंद पुराण के अनुसार, एक गणिका नाम की महिला ने अपने पूरे जीवन में कभी कोई दान-पुण्य का कार्य नहीं किया था। जब उस महिला का अंत काल आया तो वह वशिष्ठ मुनि के पास गई। महिला ने मुनि से कहा कि मैंने कभी भी कोई दान-पुण्य नहीं किया है तो मुझे मुक्ति कैसे मिलेगी। मुनि ने कहा कि माघ मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अचला सप्तमी है। इस दिन किसी अन्य दिन की अपेक्षा किया गया दान-पुण्य का हजार गुना प्राप्त होता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान कर भगवान सूर्य को जल दें और दीप दान करें तथा दिन में एक बार बिना नमक के भोजन करें। ऐसा करने से महान पुण्य की प्राप्ति होती है। गणिका ने वशिष्ठ मुनि द्वारा बताई हर बात का सप्तमी के दिन व्रत और विधि पूर्वक कार्य किया। कुछ दिन बाद गणिका ने शरीर त्याग दिया और उसे स्वर्ग के राजा इंद्र की अप्सराओं का प्रधान बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

Updated : 23 Jan 2023 1:49 PM GMT
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स्वदेश वेब डेस्क

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