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Sawan Somwar Vrat Rules

सावन सोमवार व्रत में किन नियमों का रखें ध्यान, पूजा से लेकर पारण तक जानें जरूरी बातें

सावन सोमवार का व्रत रखने से पहले पूजा विधि, खानपान, पारण और जरूरी नियम जान लें। सही विधि से व्रत करने पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।


सावन सोमवार व्रत में किन नियमों का रखें ध्यान पूजा से लेकर पारण तक जानें जरूरी बातें

Sawan Somwar Vrit and paran |

धर्म। हिंदू पंचांग में देवशयनी एकादशी के बाद पड़ने वाला सावन महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान आने वाले सोमवार विशेष महत्व रखते हैं। इतना ही नहीं धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

अगर आप पहली बार सावन सोमवार का वृत रखने जा रहे हैं, तो केवल उपवास करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता है। इस व्रत में पूजा की सही विधि, सात्विक आचरण और नियमों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

सुबह की पूजा कैसे करें

सावन सोमवार के उपवास वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर पूजा स्थल की साफ-सफाई के बाद भगवान शिव का ध्यान करें। शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल चढ़ाकर पूजा करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिवलिंग पर केतकी के फूल और तुलसी दल भूलकर भी अर्पित नहीं करना चाहिए।

व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से बचें

सावन सोमवार व्रत में सात्विक भोजन को प्राथमिकता दें। सुबह फल, दूध या भूना हुआ मखाना लिया जा सकता है। दोपहर में साबूदाना खिचड़ी, समा के चावल या आलू से बने व्रत के व्यंजन खाए जा सकते हैं। शाम को नारियल पानी, फल या सूखे मेवे का सेवन किया जा सकता है। इस दिन प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से परहेज करने की परंपरा है। कुछ परिवार अपनी परंपराओं के अनुसार, दही, कढ़ी, बैंगन और कुछ हरी सब्जियों का सेवन भी नहीं करते।

पारण से पहले करे शाम की पूजा

वह श्रद्धालु रात में व्रत खोलते हैं उन्हें पहले भगवान शिव की संध्या पूजा और आरती करनी चाहिए। इसके बाद हल्के और सात्विक भोजन के साथ पारण करना उचित माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में पारण की परंपराएं अलग हो सकती हैं। इसलिए परिवार की मान्यताओं का पालन करना बेहतर माना जाता है।

व्रत के दौरान इन बातों का ध्यान रखें

सावन सोमवार का व्रत केवल भोजन से संयम रखने तक सीमित नहीं माना जाता। इस दिन अधिक से अधिक समय भगवान शिव के ध्यान, पूजा और मंत्र जाप में बिताने की परंपरा है। रुद्राक्ष की माला से 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करना शुभ माना जाता है। साथ ही क्रोध, झूठ अपशब्द और किसी का अपमान करने से बचने की सलाह दी जाती है,क्योंकि व्रत का उद्देश्य मन, वचन और कर्म की शुद्धता से भी जुड़ा माना जाता है।

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