फुलेरा दूज को फूलों की होली भी कहा जाता है। जान लीजिए इसकी सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा के नियम क्या हैं?
फुलेरा दूज को साल का सबसे बड़ा अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन पंचांग देखे बिना सभी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। यह केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने गोपियों और राधा रानी के साथ फूलों की होली खेली थी।
आइए जान लेते हैं कि इस बार फुलेरा दूज कब है, इसकी तिथि और शुभ मुहूर्त क्या हैं, और इस दिन कौन से कार्य नहीं करने चाहिए?
क्या है सही तिथि?
भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि इस साल 18 फरवरी 2026 की शाम 04:57 बजे से शुरू होकर 19 फरवरी 2026 की दोपहर 03:58 बजे तक रहेगी। क्योंकि हिंदू धर्म में उदया तिथि पर त्योहार मनाया जाता है। इसलिए इस साल 19 फरवरी को फुलेरा दूज मनाई जाएगी।
अबूझ मुहूर्त
शास्त्रों में इस दिन को ‘अबूझ मुहूर्त’ कहा गया है। माना जाता है कि इस दिन सभी शुभ कार्य बिना पंचांग देखे किये जा सकते हैं। जैसे शादी, सगाई, गृह प्रवेश और सभी मांगलिक कार्य। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन शुरू किये गए कार्यों में सफलता जरूर मिलती है और करियर में तरक्की होती है।
ध्यान देने योग्य बातें
फुलेरा दूज के दिन कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए और घर में केवल सात्विक भोजन ही बनाना चाहिए। मांस, मदिरा और तामसिक चीज़ों से दूर रहना चाहिए। साथ ही, इस दिन किसी का अपमान न करें और अपने मन में ईर्ष्या, क्रोध या नकारात्मक भाव न रखें। क्योंकि यह पर्व प्रेम, सद्भाव और क्षमा का प्रतीक माना जाता है।
कैसे करें पूजा?
इस शुभ दिन पर कई धार्मिक कार्य करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना और राधा-कृष्ण के पूजन का संकल्प लेना चाहिए। पूजा में ताजे और सुगंधित फूलों का प्रयोग करना चाहिए। खासकर पीले फूल भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी को अर्पित करना चाहिए। क्योंकि यह पीलें रंग के फूल भगवान श्री कृष्ण के अति प्रिय माने जाते हैं। प्रसाद में माखन-मिश्री और सफेद मिठाइयों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इस दिन पूरे विधि विधान से पूजा करने से जीवन में भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की विशेष कृपा बनी रहती है।