युवाओं से संवाद, अराजकता पर होसबाले की चेतावनी

सज्जन शक्ति की चुप्पी से बढ़ती है अराजकता : होसबाले

आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने युवाओं से संवाद, डिजिटल माध्यमों के संस्कारपूर्ण उपयोग और एसआईआर के समर्थन पर जोर दिया। उन्होंने काशी-मथुरा मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का समर्थन किया।

By : नरेंद्र कुमार
सज्जन शक्ति की चुप्पी से बढ़ती है अराजकता : होसबाले

युवाओं से संवाद का समर्थक है संघ

डिजिटल चुनौती मामले में कानून से ज्यादा आज संस्कारों की जरूरत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि संघ काशी, मथुरा, भोजशाला के लिए राम मंदिर की तरह किसी आन्दोलन के पक्ष में नहीं है। ये मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं और संघ भावनात्मक रूप से हिन्दू समाज और संत महात्माओं के साथ खड़ा है। एसआईआर के राजनीतिक विरोध पर असहमति व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक, सामाजिक सुरक्षा के लिए मतदाता सूची का परीक्षण आवश्यक है। कार्यकारी मंडल की तीन दिन चली बैठक के समापन पर पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने जेन जी, डिजिटल मीडिया विनियमन, संघ के पंजीयन, पंच परिवर्तन, नशे की चुनौती, महिलाओं की भागीदारी से लेकर पर्यावरण जैसे मुद्दों पर विस्तार से पक्ष रखा।

सज्जन शक्ति की निष्क्रियता से अराजकता बढ़ती हैः युवाओं के आन्दोलन पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी इच्छाओं, स्किल, योग्यता और सपनों को समझने का काम होना चाहिए। लेकिन स्मरण रखना चाहिये कि भारत को कमजोर करने वाली आंतरिक और बाहरी ताकतों को अराजकता फैलाने का अवसर न मिले। समाज में जो सज्जन शक्ति है उसकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि जब यह वर्ग निष्क्रिय या तटस्थ होने लगता है तब अराजकतावादी लोग समाज को कमजोर करने में लग जाते हैं।

एसआईआर लोकतांत्रिक और विधि सम्मतः मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखने की आवश्यकता का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में नहीं होने चाहिए। 13 करोड़ का आंकड़ा इसलिए है क्योंकि अनेक नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हैं। जो लोग भारत के नागरिक नहीं हैं उनके नाम मतदाता सूची में होना आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से सही नहीं है। एसआईआर के विरोध को राजनीतिक बताते हुए उन्होंने कहा कि केवल विरोध के लिए विरोध उचित नहीं है। नीतिगत मुद्दों पर विरोध का स्वागत होना चाहिए लेकिन एसआईआर का विरोध ठीक नहीं।

हर मामले में राम मंदिर जैसा संघर्ष जरूरी नहींः काशी, मथुरा और ज्ञानवापी जैसे मामलों पर पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रत्येक विषय को एक ही तरीके से नहीं देखा जा सकता। राम जन्मभूमि का मामला देश के सामने प्रमुखता से उठाना आवश्यक था, इसलिए संघ उसमें सक्रिय रूप से जुड़ा। दूसरे मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया से आगे बढ़ने देना चाहिए। संघ इस मामले में सकल हिन्दू समाज की भावनाओं के साथ खड़ा है।
महिला सहभागिताः श्री होसबाले ने संघ के सामाजिक कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी की चर्चा करते हुए कहा कि हिंदू सम्मेलनों के लगभग 95 प्रतिशत आयोजनों में कम से कम एक महिला वक्ता शामिल थीं। महिला मिलन और प्रबोधन में उन सभी विषयों पर चर्चा होती है जो महिलाओं से जुडे होते हैं।

संघ अंतरराष्ट्रीय संगठन बनने नहीं जा रहा हैः एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि संघ भारत की सीमाओं में ही काम करता है। हिन्दू समाज के लोग विदेशों में उन देशों के कानूनों का सम्मान करते हुए हिन्दू संगठन के लिए काम करते है। संघ का उनको समर्थन है। होसबाले ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक और उससे प्रेरित लोग लगभग 80 देशों में काम कर रहे हैं, लेकिन संघ का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संगठन बनना नहीं है। विदेशों में लोग अपनी प्रेरणा से काम कर रहे हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और नई पीढ़ीः डिजिटल माध्यम से खड़ी चुनौती पर उन्होंने कहा कि इसका विनियमन हो लेकिन समाजिक संगठनों, उपयोगकर्ताओं और विशेषज्ञों के साथ सँवाद कर निर्णय लिया जाना चाहिए। अन्य देशों में भी 13 साल से कम आयु के बच्चों के लिए इंटरनेट के उपयोग के नियम बनाये गए हैं। भारत में इसके लिए नियम बनाये जा सकते हैं लेकिन इस समस्या का समाधान कानून की जगह घर, स्कूल में संस्कारों की गांरन्टी से ही संभव है। इसलिए संघ परिवार प्रबोधन को अभियान के रूप में हाथ में ले रहा है।

सामाजिक समानता आने तक जारी रहे आरक्षण संघ आरक्षण: समाप्त करने के पक्ष में नहीं है। ऐतिहासिक और सामाजिक भेदभाव के कारण पिछड़े रह गए वर्गों को आरक्षण मिलना चाहिए और सामाजिक असमानता तथा भेदभाव समाप्त होने तक व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। आरक्षण का लाभ सभी पात्र और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने तथा वंचित पात्र वर्गों के लिए आवश्यक सुधारों किया जा सकता है। आरक्षण को वोट बैंक की राजनीति का विषय न बनाने की बात कही। उन्होंने बताया कि अमेरिका में अफर्मेटिव एक्शन के अलावा अन्य देशों में भी इस तरह के आरक्षण की व्यवस्था है।

जेन जीः विरोध नहीं, संवाद की जरूरतः युवाओं के आंदोलनों, जेन-जी की नई राजनीतिक चेतना और कथित रिजीम चेंज की चर्चाओं पर पूछे गए सवालों के जवाब में होसबाले ने युवाओं की आकांक्षाओं और चिंताओं को समझने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने जयप्रकाश नारायण आंदोलन के समय स्वयं युवा पीढ़ी का हिस्सा होने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन चुनाव के माध्यम से होना चाहिए। हिंसा, अशांति और समाज में विभाजन पैदा करके सत्ता परिवर्तन का प्रयास उचित नहीं है।

संघ का पंजीयन

पंजीयन संबंधी सवाल पर श्री होसबाले ने कहा कि देश में ऐसा कोई सामान्य कानूनी प्रावधान नहीं है जो प्रत्येक सामाजिक संगठन के लिए पंजीयन अनिवार्य करता हो। संघ समाज का अभिन्न अंग है और देश के कानूनों के अनुसार काम करता है। तमिलनाडु में हाल ही में संघ के कार्यक्रम के लिए कोर्ट ने अनुमति दी है जिससे साबित होता है कि संघ में कुछ भी गैर कानूनी नहीं है।

दो हुतात्माओं पर वक्तव्य जारीः बुधवार को हुतात्मा स्मरण के साथ अभा बैठक में सरकार्यवाह ने शुद्धि आंदोलन के प्रखर नायक स्वामी श्रद्धानंदजी एवं धर्म रक्षा हेतु प्राणार्पण करने वाले बलिदानी संत स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती पर वक्तव्य जारी किया।

मुझे भी मिला नोटिस

श्री होसबाले ने एसआईआर के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि कर्नाटक में उनके गृह जिले श्रृंगेरी में उन्होंने पिछले 20 साल से मतदान नहीं किया है। मैं अपना वोट बेंगलुरू में करता हूं। लेकिन गांव की सूची में उनका नाम होने का नोटिस उन्हें भी मिला। जाहिर है कि एसआईआर आवश्यक है। उन्होंने जोड़ा कि जब बिहार में टीएन शेषन ने यह काम कराया था तब इसका विरोध क्यों नहीं हुआ।

युवाओं में नशा और जनजागरण

श्री होसबाले ने युवाओं में नशीली दवाओं की लत को गंभीर चुनौती बताया। ड्रग्स के अंतरराष्ट्रीय कारोबार और नेटवर्क का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसे रोकने की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की है। संघ की संभावित सामाजिक भूमिका में जागरूकता, सामाजिक संगठनों को जोड़ना, काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक समस्याओं पर ध्यान तथा नशामुक्ति और पुनर्वास के प्रयासों में सहयोग शामिल हैं।

मध्य क्षेत्र में चार प्रांत की जगह नौ संभाग होंगे

मप्र एवं छत्तीसगढ़ (मध्य क्षेत्र) में संघ की संरचना में अगले साल मार्च से बड़ा संरचनात्मक बदलाव अमल में आएगा। मध्य क्षेत्र में मध्य भारत, महाकौशल और मालवा प्रांतों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। ये तीनों प्रांत अब नई रचना में मप्र राज्य इकाई में समाहित होंगे। मध्य क्षेत्र में अब मप्र और छत्तीसगढ़ दो राज्य होंगे। प्रांत के स्थान पर अब राज्य प्रचारक होंगे। देश भर में 46 प्रांतों के स्थान पर 88 संभाग की रचना निर्धारित की है। जिसकी घोषणा आज सरकार्यवाह श्री होसबाले ने इंदौर में की है। इसी आधार पर मध्य भारत की मौजूदा रचना में अब भोपाल और ग्वालियर संभाग अस्तित्व में आएंगे। इसी तरह मालवा में अब उज्जैन और इंदौर संभाग एवं महाकौशल में जबलपुर के साथ रीवा और सागर संभाग अस्तित्व में आएंगे। सभी संभाग के लिए एक संभाग प्रचारक होंगे। छत्तीसगढ़ में रायपुर और बिलासपुर दो संभाग होंगे। इस तरह वर्तमान मध्यक्षेत्र में अब चार प्रांतों की जगह 9 संभाग होंगे। संभाग प्रचारक क्षेत्र प्रचारक के निर्देशन में काम करेंगे। राज्य प्रचारक के साथ राज्य कार्यवाह भी दायित्व में रहेंगे। यह नई रचना अगले साल मार्च में प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद अमल में आ सकती है।

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