रायसेन किले से देसी तोप चलाकर विवादित नारे लगाने के वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने 4 युवकों को गिरफ्तार किया है। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी नोटिस जारी कर प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है।
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से सामने आए एक वायरल वीडियो के बाद विवाद गहराता जा रहा है। ऐतिहासिक रायसेन किले से देसी तोप चलाकर विवादित नारे लगाने के आरोप में पुलिस ने चार युवकों को गिरफ्तार किया है। इस मामले ने तूल पकड़ा तो अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
रील बनाकर सोशल मीडिया पर किया वायरल
पुलिस के अनुसार यह वीडियो खुद आरोपियों ने बनाया था। वीडियो में चार युवक ऐतिहासिक रायसेन किले की प्राचीर से देसी तोप चलाते दिखाई देते हैं। तेज धमाके के बाद कुछ विवादित नारे भी सुनाई देते हैं। बाद में इस वीडियो को रील के रूप में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इसे गैरजिम्मेदाराना और खतरनाक बताया। कई लोगों ने आशंका जताई कि इस तरह की हरकत से इलाके का सांप्रदायिक माहौल प्रभावित हो सकता है।
पुलिस ने चार युवकों को किया गिरफ्तार
वीडियो वायरल होने के बाद रायसेन पुलिस ने जांच शुरू की। साइबर सेल की मदद से वीडियो में दिख रहे युवकों की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस ने भोपाल और रायसेन से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
NHRC ने जारी किया नोटिस
इस पूरे मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत नोटिस जारी कर संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने यह नोटिस आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के क्षेत्रीय निदेशक, रायसेन के जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और संस्कृति मंत्रालय को भेजा है। शिकायत में कहा गया है कि रायसेन किला एक संरक्षित ऐतिहासिक धरोहर है और वहां अवैध तरीके से तोप चलाने से न केवल लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, बल्कि किले की संरचना को भी नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कथित तौर पर भड़काऊ बयान दिए जाने की बात भी कही गई है।
किले की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद रायसेन किले की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रदेश की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है और यहां इस तरह की गतिविधियां सुरक्षा में बड़ी चूक को दिखाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षित स्मारकों में इस तरह के हथियारों का उपयोग न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे ऐतिहासिक संरचनाओं को भी नुकसान पहुंच सकता है।