पंडित धीरेंद्र शास्त्री 11 हजार KM की रथयात्रा करेंगे। हिंदू एकता और 'घर वापसी' अभियान को बढ़ावा देने के लिए बागेश्वर धाम में आयोजित कन्या विवाह महोत्सव में हिस्सा लिया।
खजुराहो। खजुराहो के पास बागेश्वर धाम में सातवां सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव भव्य तरीके से जारी है। शुक्रवार को 301 बेटियों की हल्दी रस्म हुई, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए। इस अवसर पर बागेश्वर बाबा पंडित धीरेंद्र शास्त्री को भी हल्दी लगाई गई। मीडिया से बात करते हुए पंडित शास्त्री ने सनातन हिंदू एकता और 'घर वापसी' अभियान को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि इस बार पदयात्रा का स्वरूप बदलकर रथयात्रा के रूप में निकाली जाएगी।
आज बागेश्वर धाम में मेंहदी और संगीत
सातवें सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव में शनिवार को मेंहदी और संगीत समारोह आयोजित किया जाएगा। दुल्हनों को मेंहदी लगाने के लिए जयपुर और स्थानीय जिले की टीमें मौजूद रहेंगी। संगीत समारोह में फिल्मी कलाकार मनोज तिवारी प्रस्तुति देंगे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल और राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी शामिल होंगे। भोजन प्रसादी की व्यवस्था भी बड़े पैमाने पर की गई है, जिसमें सब्जी, पूड़ी, खिचड़ी, खीर, मिठाई, अचार, सलाद, रोटी, दाल और चावल परोसे जाएंगे।
हिंदू एकता और 'घर वापसी' अभियान
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि समाज की सहभागिता से ही सामूहिक कन्या विवाह का काम सफल हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बार 3000 बेटियों के विवाह कराने का भरोसा दिखाया है, और यह पूरी तरह समाज की मदद और सहभागिता से ही संभव होगा। भाईचारे और सामाजिक समरसता पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई। केवल बातों से नहीं, मंदिरों में संतों के माध्यम से ही हिंदू एकता संभव है।" उनका मानना है कि यह संदेश बागेश्वर धाम से पूरे भारत में फैलना चाहिए।
बागेश्वर धाम में सातवां सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव
पंडित शास्त्री ने रथयात्रा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इस बार पदयात्रा का स्वरूप बदला गया है और अब 11 हजार किलोमीटर की रथयात्रा निकाली जाएगी। इसका उद्देश्य सनातन हिंदू एकता और 'घर वापसी' अभियान को देशभर में फैलाना है। धीरे-धीरे यात्रा के दौरान विभिन्न जगहों पर हिंदू एकता का मंच बनाकर लोगों से शपथ ली जाएगी। गुरुकुल और शिक्षा पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि बागेश्वर धाम वैदिक गुरुकुल, कैंसर अस्पताल और अन्नपूर्णा प्रकल्प के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के क्षेत्र में काम कर रहा है। उनका कहना है कि ऐसा करके वे सनातन मूल्यों को पूरी दुनिया में उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं।