मध्यप्रदेश सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में मंदिर प्रबंधन के लिए एमबीए पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है।
मध्यप्रदेश सरकार आस्था के क्षेत्र में रोजगार सुनिश्चित करने का अभिनव प्रयोग करने जा रही है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन से इसकी शुरुआत दो वर्षीय एमबीए पाठ्यक्रम के साथ होने जा रही है। नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 में यह पाठ्यक्रम 30 विद्यार्थियों के साथ शुरू होगा।
विश्वविद्यालय प्रबंधन के अनुसार, सरकार की मंशा के अनुरूप मंदिरों के प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा और धार्मिक पर्यटन से जुड़े एमबीए पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। पाठ्यक्रम समिति की निगरानी में चल रहे इस कार्य का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक प्रबंधन कौशल के साथ मिलाकर छात्रों को मंदिर संचालन में प्रभावी रूप से योगदान देने के लिए तैयार करना है।
मिलेंगे कुशल प्रबंधक, होगा समस्याओं का समाधान
मध्यप्रदेश में महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर, ओरछा और प्रदेश के अन्य बड़े धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ का प्रबंधन चुनौती बनता जा रहा है। सरकार की इस पहल से जहां कुशल प्रबंधक मिल सकेंगे, वहीं समय के अनुरूप समस्याओं का समाधान भी हो सकेगा।
सरकार की प्राथमिकता में है मंदिर प्रबंधन की पढ़ाई
उच्च शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मंदिर प्रबंधन की पढ़ाई को प्राथमिकता में रखा है। उज्जैन के बाद इसे क्रमशः प्रदेश के अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में भी शुरू किया जाएगा। इस संबंध में कार्य योजना पर विचार किया जा रहा है। महत्वपूर्ण यह है कि भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी धार्मिक अध्ययन या धर्मशास्त्र से जुड़े पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जो चर्च, मस्जिदों या अन्य धार्मिक स्थलों के संचालन और प्रबंधन पर केंद्रित होते हैं।
जुलाई से शुरू होगी प्रवेश प्रक्रिया
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, नए एमबीए पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया जुलाई से शुरू हो जाएगी। इसके बाद नए शैक्षणिक सत्र में 30 विद्यार्थियों के साथ पाठ्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। इसके अलावा डिप्लोमा और पोस्ट ग्रेजुएट स्तर के कोर्स भी संचालित किए जाएंगे। छात्रों को थ्योरी की पढ़ाई के साथ प्रैक्टिकल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
पाठ्यक्रम में शामिल होंगे ये विषय
पाठ्यक्रम में धार्मिक पहलुओं के साथ वर्तमान समस्याओं के प्रबंधन को भी शामिल किया जाएगा। इसमें छात्रों को भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सफाई व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही मंदिरों में चढ़ने वाले फूल-माला, नारियल और अन्य पूजन सामग्री के उपयोग एवं डिस्पोजल की वैज्ञानिक व्यवस्था पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। पार्किंग सिस्टम और व्यवस्थाओं के संचालन से जुड़े विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे।
“तैयारी पूरी हो चुकी है”
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के रजिस्ट्रार अनिल शर्मा ने कहा कि मंदिर प्रबंधन में एमबीए पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से यह पाठ्यक्रम 30 सीटों के साथ शुरू कर दिया जाएगा।