मानव संग्रहालय में खास प्रदर्शनी, पेश की गई लद्दाख की पारंपरिक चाय केतली

मानव संग्रहालय में खास प्रदर्शनी, पेश की गई लद्दाख की पारंपरिक चाय केतली

भोपाल के मानव संग्रहालय में लद्दाख की संस्कृति और परंपरा की झलक दिखी। इसमें टिबरिल मेस्लांग चाय केतली प्रदर्शनी की गई।

By : स्वदेश डेस्क
मानव संग्रहालय में खास प्रदर्शनी, पेश की गई लद्दाख की पारंपरिक चाय केतली

भोपाल। मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में सोमवार के दिन संस्कृति और परंपरा से जुड़ी खास प्रदर्शनी देखने को मिली। इसके अंतर्गत सोमवार को टिबरिल मेस्लांग पारंपरिक चाय केतली नामक प्रदर्शनी आयोजित की गई। इसमें लद्दाख की जीवनशैली और लोक संस्कृति की झलक पेश की गई।

महीने में एक बारमाह की प्रदर्शनी श्रृंखला के अंतर्गत इसका उद्घाटन संग्रहालय के इनडोर परिसर वीथि संकुल में मुख्य अतिथि राघवेंद्र सिंह, आईएएस, पूर्व सचिव, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने किया। इस प्रादर्श की प्रस्तुति डॉ. उमेश कुमार झारिया, संग्रहालय एसोसिएट ने किया।

प्रदर्शनी में रखी गई अनोखी चाय केतली

इस अवसर पर राघवेंद्र सिंह ने झाम खांग समुदाय से जुड़ी इस अनोखी चाय की केतली को करीब से देखा और उसकी पारंपरिक बनावट, उपयोगिता और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी ली। उन्होंने प्रदर्शनी की सराहना करते हुए इसे जनजातीय जीवन को समझने का सशक्त माध्यम बताया।

संग्रहालय के जनसंपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि इससे पहले 2016 में भी लद्दाखी कुम्हार समुदाय की महिलाओं ने मानव संग्रहालय की कार्यशाला में पारंपरिक मिट्टी की केतलियों के निर्माण का जीवंत प्रदर्शन किया था।

ऐसी होती है लद्दाख की चाय की केतली

संग्रहालय एसोसिएट डॉ उमेश कुमार झारिया ने बताया कि टिबरिल मेस्लांग झाम खांग समुदाय लेह, लद्दाख में दिखता है। लद्दाख भारत का अत्यंत ठंडा पठारी रेगिस्तानी क्षेत्र है। यहां कठोर शीत जलवायु के कारण झाम खांग समुदाय चाय के बर्तन ऐसी सामग्रियों से बनाती है, जो ऊष्मा को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है।

ऐसे होती है तैयार

इसे पारंपरिक मिट्टी की टिबरिल यानि अंगीठी या सिगड़ी भी कह सकते हैं। इससे केतली में अधिक वसा एवं कैलोरी युक्त चाय लंबे समय तक गर्म रहती है। तांबे अथवा कांसे से बनी केतलियों का प्रयोग करते हैं। लद्दाख की प्रसिद्ध नमकीन मक्खन वाली चाय गुर-गुर चा इस मिट्टी की केतली में परोसी जाती है।

मिट्टी से निर्मित चाय की टिबरिल केतली लद्दाख में सर्वाधिक लोकप्रिय है। मिट्टी के अलावा तांबे और कांसे की केतलियां आर्थिक रूप से परिवारों में पाई जाती हैं। मिट्टी हो या तांबे- कांसे की केतलियों पर सोने और चांदी की परत से सुसज्जित कलाकृतियां अंकित की गई है।

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