हरदोई के राजेपुर में प्लॉटिंग साइट पर प्रशासनिक जांच में सरकारी जमीन पर स्थायी अवैध कब्जा नहीं मिला। 17 सितंबर की सुनवाई से पहले यह जानकारी सामने आई।
हरदोई। सांडी रोड स्थित राजेपुर की चर्चित प्लॉटिंग साइट को लेकर चल रहे विवाद में प्रशासनिक जांच के बाद तस्वीर कुछ बदलती नजर आ रही है। सदर तहसील की राजस्व टीम ने संबंधित चार गाटों का मौके पर निरीक्षण किया, लेकिन सरकारी जमीन पर स्थायी अवैध कब्जे की पुष्टि नहीं हुई। यह जांच 17 सितंबर को होने वाली सुनवाई से पहले सामने आई है।
राजस्व टीम ने गाटा संख्या 798ख, 799, 800 और 801 की पड़ताल की। रिपोर्ट के मुताबिक इन गाटों में बंजर, चरागाह और चकरोड की जमीन शामिल है, लेकिन निरीक्षण के दौरान किसी हिस्से पर स्थायी अवैध अतिक्रमण नहीं मिला।
सांडी रोड पर राजेपुर के चर्चित प्लॉटिंग प्रकरण में सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों की प्रशासनिक जांच में नया तथ्य सामने आया है। नोटिस जारी होने के बाद कराई गई जांच में संबंधित गाटा संख्याओं पर स्थायी अवैध कब्जा नहीं मिला। सदर तहसील प्रशासन की रिपोर्ट ने इस तरह सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगा दिया है।
पहले भी हुई थी जांच, नहीं मिली थी सरकारी भूमि खुर्दबुर्द
राजस्व टीम ने राजेपुर स्थित गाटा संख्या 798ख, 799, 800 और 801 का मौके पर निरीक्षण किया। इन गाटों में बंजर, चारागाह और चकरोड की भूमि सम्मिलित पाई गई, लेकिन मौके पर किसी प्रकार का स्थायी अवैध कब्जा नहीं मिला। जांच के दौरान संबंधित भूखंडों में करीब पांच से सात फीट तक पानी भरा होने से राजस्व टीम फेंसिंग भी नहीं करा सकी। खास बात यह है, प्रशासनिक रिपोर्ट में इन गाटा संख्याओं की पूर्व में हुई जांच का भी उल्लेख है, जिसमें तब भी अवैध अतिक्रमण नहीं पाया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है, पानी निकलने के बाद अधिकारियों के निर्देशानुसार फेंसिंग कराई जाएगी।
नोटिस में था बिना अनुमति निर्माण का आरोप
22 अगस्त को नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र/उप जिलाधिकारी सदर की ओर से एसपीएसएस डेवलपर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में 20 अगस्त की रिपोर्ट का हवाला देते हुए राजेपुर में कृषि भू-उपयोग वाली भूमि पर बिना आवश्यक अनुमति ले-आउट स्वीकृत कराए सड़क/नाली निर्माण किए जाने का आरोप लगाया गया था। संबंधित पक्ष को 17 सितंबर को जवाब के लिए तलब किया गया था।
प्रतिद्वंद्वी का खेला!
प्रशासनिक जांच में कब्जा नहीं मिलने के बाद पूरे प्रकरण के पीछे कारोबारी प्रतिद्वंद्विता की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं। संबंधित कंपनी के प्रतिस्पर्धी कारोबारी हितों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कहा जा है, कतिपय तत्वों को ’उपकृत’ कर अवैध प्लॉटिंग को हवा दी गई। हालांकि, जांच से खेल ही पलट गया। नोटिस में बिना अनुमति निर्माण को लेकर कार्रवाई की बात थी, जबकि उसके बाद सरकारी जमीन पर कथित कब्जे के आरोपों की हुई जांच में स्थायी अवैध कब्जा नहीं मिला। यानी कब्जे को लेकर लगाए गए आरोप जांच में पुष्ट नहीं हुए।
जांच ने क्या साफ किया
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बिंदु
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प्रशासनिक जांच का निष्कर्ष
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जांच किए गए गाटे
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798ख, 799, 800 और 801
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जमीन की प्रकृति
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बंजर, चरागाह और चकरोड
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स्थायी अवैध कब्जा
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नहीं मिला
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मौके की स्थिति
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5 से 7 फीट तक जलभराव
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फेंसिंग
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पानी भरने के कारण नहीं हो सकी
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अगली अहम तारीख
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17 सितंबर की सुनवाई
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