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Gwalior Drug Crisis: Smack Addiction Ruining Youth

ग्वालियर: नशे की लत ने उजाड़ दिए परिवार

ग्वालियर में नशे का जाल गहराया, 18 से 45 आयु वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित। हर दिन 50 लाख की स्मैक खपत, परिवार उजड़ रहे


ग्वालियर नशे की लत ने उजाड़ दिए परिवार

युवा वर्ग सबसे ज्यादा नशे की लत में डूबा

  • 100 करोड़-ग्वालियर में प्रतिमाह

  • 50 लाख-प्रतिदिन की स्मैक खपती है ग्वालियर में

  • 18 से 45-आयु वर्ग के स्मैक-गांजा की गिरफ्त में

  • 380-बार आबकारी की दबिश फिर भी भट्टी चलती रही

ग्वालियर में स्मैक बेचने वाले और उसका सेवन करने वाले लोगों की हत्याएं हो चुकी है। कभी स्मैक तस्करों तक सीमित था लेकिन आज इसे नाबालिग व महिलाएं भी बेच रही है। पुलिस रिकार्ड में एक वर्ष में नशे का कारोबार 5 करोड़ से ज्यादा है जबकि इससे कई गुना नशे का सामान शहर में खपाया जा रहा है। शहर की घनी व पिछड़ी बस्तियों में स्मैक पीने वाले युवक बड़ी संख्या में शौकीन है, तो अब यह नशा छात्रों को भी गिरफ्त में ले चुका है। राजीव आवास योजना के तहत बनाए गए सरकारी आवासों में स्मैक, गांजा, शराब खुलेआम बेची जा रही है। उप्र-राजस्थान से सबसे ज्यादा स्मैक लाकर बेची जाती है। मंदसौर, नीमच, महाराष्ट्र, गुजरात, इटावा, धौलपुर, उरई आदि स्थान पास होने के कारण अब तस्कर दो पहिया वाहनों से भी स्मैक लेकर आ रहे हैं। स्मैक का कारोबार विदेशी युवक भी शहर में करने लगे हैं। अपराध शाखा ने एक नाइजीरियन युवक को स्मैक के साथ पकड़ा था। ग्वालियर में युवा वर्ग बड़े स्तर पर नशे की लत का आदी हो चला है। स्मैक के नशे की लत के कारण कई परिवार उजड़ गए।

ग्वालियर महानगर में नशे के प्रकार

ग्वालियर महानगर में सबसे ज्यादा नशा शराब का किया जाता है। इसके बाद गांजा और स्मैक का लोग नशा करते हैं। आजकल विद्यालय और महाविद्यालय के छात्र कुछ छात्राएं भी कफ सिरप का नशा करने लगे हैं। कफ सिरप का सेवन करने पर उसे प्रतिबंधित करना पड़ा है। चिकित्लाक के पर्ने पर कुछ स्थानों पर दवा मिलती है। फंसीडायल दवा को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्मैक का नशा ज्यादा किया जा रहा है। शराब के नशे में ग्रामीण क्षेत्रों में भट्टी और लाहन से भी शराब का निर्माण होता है। इसकी फेवटी भी ग्रामीण क्षेत्र में पकड़ी गई थी।

हुक्का बार का चलन तेजी से बढ़ा

नर प्रकार के नशों में हुक्का बार और सिगरेट में भी नशीले पदार्थ युवाओं तक पहुंचाए जा रहे हैं। पुलिस ने साल भर में कई बार हुका बार पर कार्रवाई की लेकिन यह कार्रवाई सिर्फ दिखावे की रहीं, इसलिए नशे का यह कारोबार बदस्तूर जारी है।

पुलिस की 80 कार्रवाई, नतीजा शून्य

गत एक साल में पुलिस ने गांजा, स्मैक बेचने वालों को पकड़ने की 80 कार्रवाई की हैं। गोला का मंदिर, बस स्टैंड, झांसी रोड, हजीर, पड़ाव, थाटीपुर में सबसे ज्यादा कार्रवाई नशे के खिलाफ की गई है। गोला का मंदिर इलाके में 28 लाख रुपए की स्मैक के साथ युवक संजय जाटव को पकड़ा था। झांसी रोड में पुलिस ने 25 लाख रुपए की गांजे की खेप पकड़ी थी, गांजा गमलों में छिपाकर ले जाया जा रहा था। इसके अलावा पुलिस ने साल भर में 90 लाख रुपए के मादक पदार्थ जबा किए हैं। इन सब कार्रवाइयों के बावजूद जिले में नशे का कारोबार पैर मजबूती के साथ पसारता ही जा रहा है। मतलब नतीजा शून्य।

वार्षिक नशा कारोबार करोड़ों में

युवाओं के साथ युवतिया भी भांति-भांति के नशे की गिरफ्त में है। ग्वालियर में प्रतिमाह नयी का कारोबार सी करोड़ के आतापास पहुंच जाता है जबकिवार्षिक कारोबार का आकड़ा पुलिस कार्रवाई के कारण ऊपर-नीचे होता रहता है।

नशा आपूर्ति का विदेशी लिंक भी मिला

ग्वालियर में नशे का विदेशी लिंक भी एक बार मिला है। एक साल पहले सिरील क्षेत्र में एक नाइजीरियाई युवक नशे की खेप के साथ मिला था। इसने खुलासा किया था कि वह शुद्ध स्मैक लेकर आता है और यहां पर उसमें मिलावट कर पुड़िया बनाता है और फिर उन्हें एजेंटों के जरिए आपूर्ति करवाता था। पुलिस ने इसके नेटवर्क में विदेशी के साथ शामिल कुछ स्थानीय लोगों को भी पकड़ा था।

तस्करों के मकान तोड़ने की हो चुकी कार्रवाई

इन्दस्गंज थाना क्षेत्र स्थित झाडू वाला मोहला में रहने वाले बहादुर खान के दो बेटी पर स्मैक बेचने पर शासन ने कार्रवाई करते हुए मकानों की तोड़ा था। स्मैक बेचने की पुलिस से शिकायत करने के संदेह में बहादुर के बेटे ने कल्लू खान की बेरहमी से हत्या कर शव के टुकड़ों को नाले में फेंक दिया था। घड़ बोरे में बंद मिला था।

तस्कर नशेड़ी हाईटेक, मोल-भाव में पारंगत

नशा कारोबार से जुड़े तस्कर और नशेड़ी अब हाईटेक हो गए हैं। यही नहीं मोल-भाव में भी पारंगत है। नमेक बंधने वाले जेब में घड़ी जैसा तौलने वाला कांटा साथ रखते हैं ती वहीं उसे खरीदने वाला भी सीने के भाव बिकने वाली स्मैक की तौलकर ही लेता है। पुलिस से बचने के लिए तरकर मोबाइल पर सिर्फ मैसेज करते हैं। कोई भी आकर खरीदार को स्मैक देकर चला जाता है।

स्मैकः खून-खराबा और हत्या

थाटीपुर अशोक कॉलोनी पर अज्जू जाटव की उसके ही साथियों ने पांच वर्ष पहले गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसे दौड़ा-दौड़ाकर मारा था। इसी तरह नदी पार मोनू रजक को भी उसके ही साथियों ने स्मैक की टशन के चलते मौत के घाट उतारकर शव नदी में फेंक दिया था। तो वहीं बैंक संचालक के बेटे की स्मैक बेचने के विवाद पर मुरार थाने से बंद कदम की दूरी पर हत्या कर दी थी।

राजस्थान-उत्तरप्रदेश से आती है स्मैक की खेप

वर्ष 2025 में स्मैक के खिलाफ कार्रवाई हुई और दो करोड़ की स्मैक तस्करों से पकड़ी गई थी, गांजा भी बड़ी मात्रा में पकड़ा गया। 19 अक्टूबर दीपावली से एक दिन पहले पौधों से भरे ट्रक के बीच में छिपाकर 2 क्विंटल 80 किलो गांजा जिसकी कीमत 28 लाख रुपए थी, आंध्रप्रदेश व तमिलनाडु से लाया जा राय था जिसे झांसी रोड थाना पुलिस ने पकड़ा था। पड़ाव थाना पुलिस ने रेलवे स्टेशन के पास से कई बार उड़ीसा से गांजा खेप को पकड़ा है। वर्ष 2024 में मेला मैदान से 70 लाख रुपाए स्मैक की बड़ी खेप पकड़ी जा चुकी हैं। चार शहर का नाका पर राठौर दम्पति के अलावा संजय नगर पुल के नीचे रहने वाले चौहान दम्पति और हिना जाटव, नदीपार टाल पर चाची उर्फ रामबेटी स्मैक बेचने का काम खुलेआम करती है। थाटीपुर थाना क्षेत्र में स्थित भीमनगर आदिवासी बस्ती में अधिकतर घरों में महिलाएं, बच्चे, स्मैक बेचाने काम करती है। यहां पर पुलिस भी दबिश देने से संकोच करती है। स्मैक बेचने वाले तस्कर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्तमान समय में शहर में 50 लाख रुपए की स्मैक हर दिन खपाई जा रही है तो वहीं गांजा और शराब का आंकड़ा अलग है। हैरानी की बात है कि खाकीवदर्दी वाले भी इस गोरखधंधे में शामिल हैं। यह बात स्वयं नशा बेचने व सेवन करने वाले कह चुके हैं।

इन क्षेत्रों से ग्वालियर में पहुंचती हैं नशे की खेप

ग्वालियर में उत्तप्रेदश के इटावा, मैनपुरी, जालौन, उरई, झांसी और राजस्थान में धौलपुर, बाड़ी-मई से विशेषतः नशे की आपूर्ति शहर में की जाती है। इसके अलावा उड़ीसा से गांजे की खेप भी इस साल पकड़ी गई है। यह शहर में नशे का नया रास्ता मिला है। पिछले पांच साल में पुलिस ने जितने भी नशे के तस्कर पकड़े हैं उनमें 80 फीसदी संख्या इन जिलों से आने वाले तस्करों की है।

स्थानीय स्तर पर अवैध नशा निर्माण के अड्डे

ग्वालियर शहर और इसके आसपास के इलाके में अवैध रूप से शराब बनाए जाने के अड्ढे हैं। दो माह पहले ही माटीगांव में अवैध रूप से शराब बनाए जाने की फैक्ट्री पकड़ी गई थी। इस फैक्ट्री में हरियाणा का लिंक मिला था। यह लोग शराब बनाने के केमिकल हरियाणा से लाते थे और यहां पर शराब बन्ककर उसे देश और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई करते थे। इसके अलावा जिले में पाटीगांव, भितरवार, डबर, चीनौर, मोहना, पुरानी छावनी, जलालपुर, बड़ा गांव में भी भट्टले लगाकर अवैध शराब बनाई जाती है। इन अड्डों पर साल भर में पुलिस और आबकारी विभाग ने कई बार काई की है। इन भट्टियों पर इन दोनों विभागों ने साल भर में 380 बार दबिश दी है। कई बार इन्हें अवैध शराब मिली है तो कई बार खाली हराम भी पुलिस और आबकारी विभाग का अमला लौटा है।

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नशे में युवा ही सबसे ज्यादा लिप्त

शहर में नशे के दो ट्रेंड सक्रिय रहे। एक अवैध शराब और दूसरा स्मैक, गांजा सहित अन्य मादक पदार्थों का। अवैध शराब के नशे में हर आयुवर्ग और धर्म के लोग शामिल थे। अवैध शराब के निर्माण में पकड़े जाने वाले ज्यादातर लोग आदिवासी समुदाय के थे। इनमें कंजरों की संख्या सबसे ज्यादा थी। कंजरों के डेरे यहां अवैध शराब के अड्डों के रूप में प्रचलित हैं। यह अड्डे शहर के नजदीक ग्रामीण क्षेत्रों में पाए जाते हैं ताकि पुलिस की नजर से बचे रहें। दूसरा ट्रेंड स्मैक, गांजा तथा अन्य मादक पदार्थों का है, इसमें बेचने वाले और प्राप्तकर्ता दोनों ही युवा वर्ग से संबंधित हैं।

पुलिस ने पूरे साल में जितने स्मैक और गांजा तस्कर पकड़े है उनकी उम्र 18 से 45 वर्ष के बीच रही है। युवाओं के बीच स्मैक के नशे का प्रचलन लगातार बढ़ रहा है। स्मैक के तस्करों ने महविद्यालय, विविद्यालय, छात्रावास तक अपनी लिंक पहुंचाई है। यह चोरी-छिपे स्मैक की पुड़िया सप्लाई करते हैं। अभी तक पुलिस ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है इसलिए इस तरह का मामला रिपोर्ट नहीं हुआ है। हालांकि पुलिस तक इस तरह की सूचनाएं लगातार पहुंचती रही हैं।

नशा मुक्ति केन्द्रों को देखने का नजरियां

बहोड़ापुर में संचालित पहले नशा मुक्ति केन्द्र के संचालक का कहना है कि प्रशासन मदद नहीं करता है। सालों हो जाते हैं अधिकारी इस ओर देखते भी नहीं हैं। जब नशा केन्द्र में कोई कांड हो जाता है उस समय प्रशासन जागता है। नशा मुक्ति केन्द्रों को घृणित निगाहों से देखा जाता है। व्यवसाय के अलावा हम लोगों को नशे से मुक्ति दिलाने का प्रमुख काम करते हैं और सैकड़ों परिवारों की खुशियां लौटाई है। नशा मुक्ति केन्द्रों में भी अनैतिक गतिविधि भी संचालित हो रही है। उसको प्रशासन को देखना चाहिए। आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी इस धंधे में आ गए हैं। हमें नशा मुक्ति केन्द्र चलाने का अनुभव भी नहीं है। सुधार के लिए प्रशासन को टीम गठित करना चाहिए जिसमें एसडीएम कार्यालय के कर्मचारी के अलावा पुलिस विभाग का कर्मचारी भी शामिल हो। नशा मुक्ति केन्द्रों में कई लोग डेढ़ वर्ष से अधिक भर्ती हैं। शहर में इन केन्द्रों में दबड़ों में जानवरों की तरह कैद करके रखा जाता है। इनमें काफी सुधार की आवश्यकता है

प्रमुख बातें

  • ग्वालियर में उच्च शैक्षणिक परिसरों में भी नशे के कारोबारी पहुंचने लगे हैं जिससे इन संस्थानों में भी नशे का सेवन बढता जा रहा है।

  • ग्वालियर शहर में नशे की अधिकांश आपूर्ति निकटवर्ती राज्य उत्तर प्रदेश से सटे इटावा, जालौन, उरई के अतिरिक्त राजस्थान के धौलपुर से की जाती है।

  • जिले में अपराध शाखा ने गोला का मंदिर, मेला मैदान से 28 लाख की स्मैक पकड़ी थी। यह आंकड़ा 2025 का है।

  • शहर के पॉश इलाकों में भी नशे का सेवन करने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। हालांकि इस पर लगाम कसने के लिए पुलिस समय-समय पर छापामार कार्रवाई करती है लेकिन इस पर फिर भी लगाम नहीं कसी जा पा रही है।

  • स्थानीय नागरिकों के अतिरिक्त हॉस्टल में बाहर के रहने वाले छात्र- छात्राएं नशे के सेवन में लिप्त हैं।