Breaking News
  • स्वदेश के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जुड़ें और हर बड़ी खबर सबसे पहले पाएं।
  • YouTube: @SwadeshNews, Facebook: @DainikSwadesh, Instagram: @swadesh_news1, X: @DainikSwadesh

होम > प्रदेश > छत्तीसगढ़ > रायपुर

देवकीनंदन की भागवत कथा में नया नियम

'नो तिलक, नो एंट्री' से चर्चा में देवकीनंदन ठाकुर की भागवत कथा, बोले- यह प्रतिबंध नहीं, संस्कृति से जोड़ने का प्रयास

रायपुर में देवकीनंदन ठाकुर की भागवत कथा 'नो तिलक, नो एंट्री' नियम के साथ आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति से युवाओं को जोड़ना है।


नो तिलक नो एंट्री से चर्चा में देवकीनंदन ठाकुर की भागवत कथा बोले- यह प्रतिबंध नहीं संस्कृति से जोड़ने का प्रयास 

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर की श्रीमद्भागवत कथा इस बार 'नो तिलक, नो एंट्री' नियम को लेकर सुर्खियों में है। कथा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं से माथे पर तिलक लगाकर आने की अपील की गई है। इस पहल का उद्देश्य लोगों, खासकर युवाओं को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ना बताया गया है।

प्रतिबंध नहीं, सांस्कृतिक जागरूकता का प्रयास

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि इस व्यवस्था का मकसद किसी भी श्रद्धालु को कथा से बाहर रखना नहीं है। उनका कहना है कि तिलक भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रतीक है। इसके माध्यम से लोगों में अपनी सांस्कृतिक पहचान और संस्कारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

बच्चों को कथा में भेजने की अपील

कथावाचक ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को कथा में लेकर आएं और उन्हें भारतीय परंपराओं से परिचित कराएं। उनके अनुसार, तिलक केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों का भी प्रतिनिधित्व करता है। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

8 से 14 जुलाई तक चलेगी सात दिवसीय कथा

यह सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा रायपुर के बूढ़ापारा इंडोर स्टेडियम में 8 जुलाई से 14 जुलाई तक आयोजित की जा रही है। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है और 'नो तिलक, नो एंट्री' पहल को लेकर भी व्यापक चर्चा हो रही है।

 

Related to this topic: