भोपाल में भैय्याजी जोशी ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और चिंतन क्षमता उसे दुनिया का नेतृत्व देने योग्य बनाती है
भोपाल में विशिष्टजन संवाद आयोजन
अपनी सामर्थ्य, शक्ति और सकारात्मक सोच के साथ हम भारत को विश्वगुरु बनाएंगे। भारत की चिंतन परंपरा और विरासत समग्र मानवता को साथ लेकर चलने वाली है। इसी परंपरा ने विश्व को प्राणी और प्रकृति के कल्याण के साथ सहअस्तित्व और सहकार का दर्शन दिया है। यह कहना है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश भैय्याजी जोशी का।
वे आज भोपाल के एकलव्य संकुल में आयोजित विशिष्टजन संवाद को संबोधित कर रहे थे। एमपी नगर स्थित वनवासी कल्याण परिषद कार्यालय, एकलव्य संकुल में यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भोपाल विभाग द्वारा आयोजित किया गया था। संवाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यभारत प्रांत के संघचालक अशोक पाण्डे और भोपाल विभाग संघचालक सोमकांत उमालकर भी मंच पर मौजूद रहे।
श्री जोशी ने भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए शिक्षा, उद्योग, कला, धार्मिक क्षेत्र और राजनीतिक क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कथनी और करनी में अंतर की वजह से कई तरह की समस्याएं खड़ी हुई हैं। यही कारण है कि हमारे पास वसुधैव कुटुम्बकम जैसा सर्वोत्कृष्ट चिंतन होने के बावजूद हमारा देश कई मामलों में पिछड़ गया है।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि स्वयं को पहचान कर हम समयानुकूल राष्ट्रधर्म को नागरिक जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि देश में हिन्दू समाज को ध्यान में रखकर काम करने की जरूरत है। क्योंकि हिंदुत्व ही भारत का आत्मतत्व है। इसकी पहचान देश के महापुरुषों, ग्रंथों, तीर्थों, इतिहास और संस्कृति में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
भारत में है दुनिया का नेतृत्व करने की योग्यता
श्री जोशी के अनुसार, दुनिया भर की मान्यताओं और विचारों से यह स्पष्ट हो चुका है कि जो सबको साथ लेकर चलेगा, वही दुनिया में नेतृत्व करेगा। विश्व एक परिवार है और यह संदेश सबसे पहले भारत ने दिया। वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के कारण यह योग्यता भारत में है। यहां बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय के बजाय सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय को सर्वोत्तम माना गया है।