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राष्ट्र धर्म सिर्फ भाजपा में : विधायक संजय पाठक

जन्मदिन पर विशेष बातचीत

राष्ट्र धर्म सिर्फ भाजपा में : विधायक संजय पाठक
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- अब मैं किसी व्यवसाय में नहीं, कांग्रेस अब नेतृत्व विहीन

ग्वालियर/ राजलखन सिंह संजय पाठक प्रदेश की राजनीति में आज एक बड़ा नाम है। विजयराघवगढ़ जिले, कटनी के भाजपा से विधायक हैं। आप प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे हैं पर यह आपका अधूरा परिचय है। आप एक सफल व्यवसाई भी हैं और बुलंदियों को स्पर्श किया है। आप अपनी जीवन शैली से भी पहचाने जाते हैं, साथ ही नम्रता एवं सौजन्यता भी आपके स्वभाव का विशेष गुण है। श्री पाठक भाजपा को राष्ट्रधर्म निभाने वाली सबसे पहली पार्टी मानते हैं। यही कारण रहा कि कांग्रेस छोड़ उन्होंने भाजपा को अपनाया। पार्टी ने भी उनके मान-सम्मान का ख्याल रखते हुए विधायक बनवाने के साथ ही मंत्री पद से भी नवाजा। इसका परिणाम प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने पर कमलनाथ के क्रोध का सामना उन्होंने अपने व्यवसायिक नुकसान को उठाकर किया। फिर भी वे विचलित नहीं हुए और आजीवन भाजपा में बने रहने का संकल्प लेते हुए प्रदेश में हो रहे 28 विधानसभा क्षेत्रों के प्रचार में जी-जान से जुटे हुए हैं। इस चुनावी चकल्लश के बीच स्वदेश ने उसने विशेष बातचीत की।

प्रश्न:- विधानसभा उप-चुनाव में भाजपा की क्या स्थिति है, आप भी लगातार दौरे कर रहे हैं?

उत्तर:- भाजपा का कार्यकर्ता जुझारू है और हर लड़ाई को बखूबी जीतना जानता है। पिछले कुछ दिनों से परिस्थितियां बदल गई हैं और कार्यकर्ता घर-घर जाकर जनता को जागरूक कर रहे हैं, इसका निश्चित रूप से भाजपा को फायदा होगा। कांग्रेस ने पूरे चुनाव में दलगत राजनीति से हटकर गंदी भाषा शैली का उपयोग कर भ्रम फैलाने का जो काम किया है उसका खामियाजा कांग्रेस को उठाना पड़ेगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में हुए विकास कार्य को देखते हुए जनता वोट देगी और भाजपा 28 की 28 सीटें जीतेगी।

प्रश्न:-राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में आने से पार्टी कितनी मजबूत हुई है, आने वाले समय में पार्टी पर इसका क्या असर पड़ेगा?

उत्तर:- श्री सिंधिया ऊर्जावान व युवा नेता हैं। राजनीति उन्हें विरासत में मिली है, उनकी विरासत का इतिहास बहुत बड़ा है। इस पूरे क्षेत्र में उनकी रियासत रही है और उनके प्रति लोगों में सम्मान एवं समर्पण के भाव हैं। इन सबको अगर देखें तो सिंधिया जी के आने से भाजपा को इस क्षेत्र में मजबूती मिली है। साथ ही कांग्रेस पार्टी नेतृत्व विहीन और शून्यता की ओर चली गई है।

प्रश्न:- आपका पूरा परिवार कांग्रेसी रहा है और भाजपा में आने के बाद आप यहां की संस्कृति व विचारधारा में कैसे तालमेल बैठा रहे हैं?

उत्तर:- भाजपा परिवार में आने के बाद सरलता महसूस हुई है। इसका मूल कारण है कि मैं सनातन धर्म में जन्मा हूं, पला-बढ़ा हूं, धर्मध्वज लेकर परिवार, राजनीति, व्यापार को आगे बढ़ाया है और धार्मिक क्षेत्र में भी जीवनभर योगदान दिया है। जो धर्मध्वजा लेकर चलता है, आगे बढ़ता है उसके मूल में हम जाएं तो सबसे पहला राष्ट्र धर्म है जो सिर्फ भाजपा में है। भाजपा की विचारधारा का मैं हमेशा से प्रशंसक रहा हूं। मेरे पूज्य पिताजी कांग्रेस में रहते हुए भी 12 साल तक संघ की शाखा में जाते रहे।

प्रश्न:- आप सफल उद्योगपति, व्यवसायी व राजनेता हैं लेकिन इस सब में सामंजस्य कैसे बैठा पाते हैं?

उत्तर:- एक साथ सभी कार्य करना बहुत मुश्किल होता है, इसीलिए मैंने 2015 में सभी सार्वजनिक पदों, व्यावसायिक पदों से अपने आपको पूर्णरूप से अलग कर लिया। अब मैं सेवाभाव के साथ राजनीति में हूं। अब किसी प्रकार के व्यवसाय से मेरा नाम कहीं नहीं है।

प्रश्न:- प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिराने में आपकी महती भूमिका रही, इसे कैसे अंजाम तक पहुंचाया?

उत्तर:- वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में जब भाजपा को 109 और कांग्रेस को 114 सीटें मिलीं तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मेरे संपर्क में थे लेकिन परिणाम वाले दिन रात में पता लगा कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देकर सरकार बनाने से इन्कार कर दिया है। सवा साल बाद कांग्रेस में घुटन महसूस कर रहे विधायकों के साथ श्री सिंधिया ने सरकार गिराने का काम किया।

प्रश्न:- चूंकि आप पुराने कांग्रेसी हो इस नाते कांग्रेस नेताओं से आपके संबंध हैं, ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा रहती है कि आप कभी भी कांग्रेस में जा सकते हैं?

उत्तर:- मैं मूलरूप से हिन्दू हूं और सनातन धर्म में जन्मा-पला बढ़ा हूं। जिसके मूल में धर्म होता है वह स्वयं भाजपा का सदस्य है। भाजपा ने मुझे जितना मान-सम्मान दिया, उतना कांग्रेस में नहीं मिला इसीलिए मैंने कांग्रेस का साथ छोड़कर देश व प्रदेश का विकास करने वाले पार्टी भाजपा का सदस्य बना हूं और आजीवन सेवा करता रहूंगा। इसीलिए कांग्रेस में जाने का सवाल ही नहीं।

प्रश्न:-शनिवार को आप अपने जीवन के पचासवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, जीवन में कई मोड़ आए होंगे उनमें से प्रमुख क्या रहे?

उत्तर:-राजनीति व व्यवसायिक क्षेत्र में कई क्षण आएं लेकिन कुछ क्षण ऐसे हैं जो आज भी प्रेरण देते हैं। मुझे आज भी याद है कि 18 साल का होने पर पिता जी ने खर्च देना बंद कर दिया और व्यापार एवं खेती-बाड़ी में प्रवेश नहीं दिया तब मैंने आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए खुद का व्यवसाय शुरू किया। इसके लिए मात्र तीन हजार रुपए ब्याज में पैसा लेकर छुई(सफेद मिट्टी) की बंद खदान ली और व्यापार शुरू किया। 16 किमी साइकिल चलाकर प्रतिदिन जाता था। कुछ सालों बाद 24 से 25 हजार रुपए प्रति माह कमाने लगा। बाद में पिताजी से सामग्री खरीदने लगा। उनकी डांट और मारपीट का नतीजा है कि एक छोटे से व्यवसाय को प्रदेश-देश नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया।

प्रश्न:-राजनीतिक जीवन में आपका टर्निंग प्वाइंट क्या था?

उत्तर:-जिला पंचायत का अध्यक्ष बनना राजनीतिक जीवन का टर्निंग प्वाइंट रहा। 1999 में चुनाव पूरे प्रदेश में करीब 990 के जिला पंचायत सदस्य चुने गए और सर्वाधिक मतों से मैंने चुनाव जीता था और बाद में सबसे युवा जिला पंचायत अध्यक्ष भी बना। 2003 में पिताजी भाजपा प्रत्याशी धु्रवप्रताप सिंह से चुनाव हार गए। तभी मैंने भाजपा प्रत्याशी धु्रवप्रताप सिंह को चैलेंज किया कि अगले विधानसभा चुनाव में आपको दोहरे मतों से हराऊंगा। 2008 के चुनाव में मैंने उन्हें 24 हजार मतों से पराजित किया। फिर राजनीति में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

Updated : 2020-10-31T07:16:09+05:30
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