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11 हार से हताश कांग्रेस ठोक रही ताल

11 हार से हताश कांग्रेस ठोक रही ताल
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विदिशा। इतिहास के पन्ने पलटो या धरती की कोख खंगालो, विदिशा की धरती में छिपा हीरा अपनी चमक से आपकी आंखें चौंधिया देगा और हर पन्ना यहां के वजूद की कहानी बयां करेगा, लेकिन सत्ता में भी इस माटी की हनक कम नहीं है, इस मिट्टी ने जिसे अपनाया, उसे फर्श से अर्श पर पहुंचाने में भी कोई कोताही नहीं की।

लोकसभा सीट मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में भाजपा का अभेद्य किला माना जाता है। यह बेतवा नगरी के नाम से मशहूर है। ऐतिहासिक उदयगिरी भी इस शहर का हिस्सा है। दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यहां का नेतृत्व कर चुके हैं, जबकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अभी यहां का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। 1967 से अस्तित्व में आई विदिशा सीट ज्यादातर समय भाजपा के कब्जे में रही है। यही वजह है कि भाजपा के लगभग हर बड़े नेता की इस सीट पर नजर रहती है।विदिशा संसदीय सीट के इतिहास पर नजर डालें तो 1967 में इस सीट पर हुए पहले आम चुनाव में जनसंघ ने जीत दर्ज की थी। तब जनसंघ के एस शर्मा विदिशा के पहले सांसद बने थे। 1971 के चुनाव में जब पूरे देश में इंदिरा गांधी की लहर चल रही थी, तब भी जनसंघ के टिकट पर इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के संस्थापक रामनाथ गोयनका विदिशा से चुनाव जीते थे।तीसरी बार 1977 के चुनाव में यहां से जनसंघ के उम्मीदवार राघवजी ने जीत दर्ज की थी, लेकिन 1980 के चुनाव में विदिशा सीट भाजपा के हाथ से निकल गयी और पहली बार कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की। तब कांग्रेस के प्रताप भानू शर्मा ने जनसंघ के प्रत्याशी राघवजी को हराया था। इसके बाद 1984 में प्रताप भानू शर्मा ने जीत का सिलसिला बरकरार रखा। हालांकि, ये जीत विदिशा में कांग्रेस की आखिरी जीत थी क्योंकि 1989 के आम चुनाव में राघवजी ने बदला चुकाते हुए प्रताप भानू शर्मा को हराया और भाजपा की जीत का जो सिलसिला शुरु हुआ वह अब तक जारी है।

1991 के आम चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी ने विदिशा का प्रतिनिधित्व किया और जनता ने उन पर खूब प्यार लुटाया, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने इस सीट से इस्तीफा दे दिया और अपने उत्तराधिकारी के रुप में उस वक्त के उभरते नेता शिवराज सिंह को चुनाव लड़ाया। शिवराज ने भी इस सीट पर जबरदस्त जीत दर्ज की और अगले पांच चुनावों तक यह सिलसिला बरकरार रखा। शिवराज सिंह 2006 में जब प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, तब विदिशा में हुए उपचुनाव में पार्टी ने रामपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया और रामपाल ने भी यहां जीत दर्ज की, जबकि 2009 के चुनाव में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज ने विदिशा से चुनाव लड़ा और प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की और 15वीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहीं। 2014 के चुनाव में भी सुषमा ने कांग्रेस प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह को बड़े अंतर से मात दी थी और केंद्र की एनडीए सरकार में विदेश मंत्री बनीं। ऐसे में इस सीट का सियासी इतिहास तो यही कहता है कि विदिशा में भाजपा का एकतरफा दबदबा है। यहां हुए 13 चुनावों में से पार्टी को 11 बार जीत मिली है तो वहीं कांग्रेस 2 बार ही अपना खाता खोल पाई है। फिलहाल इस बार यहां की सांसद सुषमा स्वराज ने चुनाव लडऩे से मना कर दिया है। जिससे उम्मीद की जा रही है कि विदिशा में भाजपा की तरफ से नया चेहरा देखने को मिल सकता है। हालांकि, अब तक विदिशा में शानदार जीत दर्ज करने वाली बीजेपी के लिए इस बार यहां की परिस्थितियां थोड़ी बदलती दिख रही हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां अच्छा प्रदर्शन किया है। जिसके चलते कांग्रेस भाजपा के इस गढ़ को भेदने का दावा कर रही है। ऐसे में भाजपा को अपने इस गढ़ को बचाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।

विदिशा लोकसभा क्षेत्र परिचय

विदिशा भारतवर्ष के प्रमुख प्राचीन नगरों में से एक है। कुछ विद्वानों का मानना है कि विविध दिशाओं के लिए यहां से मार्ग जाने के कारण ही इस नगर का नाम विदिशा पड़ा। इसका पुराना नाम भेलसा भी है। विदिशा पर्यटकों एवं दर्शकों की रुचि के ऐतिहासिक एवं दर्शनीय प्राचीन स्मारकों से भरा पड़ा है।

जनसंख्या : 2011 की जनगणना के मुताबिक विदिशा की जनसंख्या 24 लाख 89 हजार 435 है। यहां की 81.39 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और 18.61 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है।

मतदाताओं की संख्या : साल 2014 के चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक यहां मतदाताओं की संख्या 16 लाख 34 हजार 370 है, जिसमें 7 लाख 61 हजार 960 महिला और 8 लाख 72 हजार 410 पुरुष मतदाता हैं।

अर्थव्यवस्था: विदिशा में खेती-किसानी का कार्य प्रमुख रूप से किया जाता है। साथ ही यहां नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। यहां 30 करोड़ रुपए की लागत से उद्योगों के लिए आवश्यक सुविधाएं जुटाई जा रही हैं।

भौगोलिक स्थिति : विदिशा मालवा के उपजाऊ पठारी क्षेत्र के उत्तर-पूर्व हिस्से में स्थित है तथा पश्चिम में मुख्य पठार से जुड़ा हुआ है। इस क्षेत्र की जलवायु अत्यंत स्वास्थ्यवर्धक है। कर्क रेखा के आसपास स्थित इस क्षेत्र में न अधिक ठंड पड़ती है, न ही अधिक गर्मी।

जातिगत समीकरण पर नजर: विदिशा संसदीय क्षेत्र में इस बार जातिगत समीकरण पर भाजपा और कांग्रेस दोनों की निगाहें लगी हुई हैं। विदिशा संसदीय क्षेत्र के लगभग चार लाख ठाकुर मतदाता, ढाई लाख मुस्लिम मतदाता और साढ़े तीन लाख दलित मतदाता चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। कांग्रेस इन तीनों वर्गों के वोट हासिल करने की रणनीति तैयार कर रही है, तो वहीं भाजपा अपने पिछले वोट बैंक को बरकरार रखने की पुरजोर कोशिश में जुटी है।

16वीं लोकसभा में स्थिति: भाजपा की दिग्गज नेता और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज यहां की सांसद हैं। वे लगातार दो बार यहां से लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं। सुषमा स्वराज ने चुनाव में मप्र के पूर्व मुख्?यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई कांग्रेस के लक्ष्मण सिंह को हराया था। यह लोकसभा सीट देश की हाईप्रोफाइल सीटों में से एक है। 1967 से अस्तित्व में आए इस लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस सिर्फ 1980 और 1984 में ही चुनाव जीत पाई है।

Updated : 2019-03-26T21:06:21+05:30

Naveen Savita

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