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नहीं थम रही एम्बुलेंस चालकों की अवैध वसूली

नहीं थम रही एम्बुलेंस चालकों की अवैध वसूली
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मामला जयारोग्य अस्पताल का, जगह-जगह एम्बुलेंस का डेरा

ग्वालियर, न.सं.

गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के जयारोग्य अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को ठगने के लिए एक ओर जहां दलाल सक्रिय हैं तो वहीं दूसरी तरफ एम्बुलेंस की सुविधा के नाम पर सौदेबाजी भी हो रही है। अस्पताल परिसर में सुबह से शाम तक मरीजों के परिजनों की जेब खाली करने दलाल खुलेआम घूम रहे हैं। कोई सुविधा के नाम पर तो कोई सेवा करने का भरोसा दिलाकर रुपए ऐंठने में लगा है।

यह सब अस्पताल प्रबंधन और अधिकारियों की आंखों के सामने हो रहा है। इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन इन दलालों पर कोई लगाम नहीं कस पा रहा है। अस्पताल में बने एम्बुलेंस बूथ पर अवैध रूप से एम्बुलेंस खड़ी तो होती ही हैं, साथ ही शाम होते ही निजी एम्बुलेंस आईसीयू, न्यूरोलॉजी, कमलाराजा अस्पताल सहित अन्य विभागों के बाहर खड़ी हो जाती हैं। इतना ही नहीं, एम्बुलेंस चालकों की दबंगई इतनी है कि वे चिकित्सकों के सामने ही खुलेआम खड़े रहते हैं। फिर भी प्रबंधन इन पर कार्रवाई से बचता दिखाई देता है। अस्पताल परिसर में बने प्री-पेड बूथ पर खड़े होने वाले एम्बुलेंस चालकों से प्रत्येक माह किराए के रूप में जयारोग्य अस्पताल प्रबंधन को करीब ढाई हजार रुपए महीना जमा कराना होता है। यहां पर करीब 22 एम्बुलेंस संचालक अपनी एम्बुलेंस खड़ी करते हैं। इनमें से करीब 12 एम्बुलेंस संचालकों ने ही किराया जमा कराया है।

सुरक्षा कर्मियों की मिलीभगत

अवैध रूप से खुलेआम खड़ी होने वाली एम्बुलेंस चालकों से सुरक्षा कर्मियों की भी सेटिंग होती है, इसलिए एम्बुलेंस चालक पूरे परिसर में कहीं भी अपनी एम्बुलेंस खड़ी कर लेते हैं और सुरक्षा कर्मी भी उन्हें बाहर करने के कोई प्रयास नहीं करते हैं।

परिहार की सबसे अधिक एम्बुलेंस

जयारोग्य अस्पताल परिसर में सबसे ज्यादा एम्बुलेंस जितेन्द्र परिहार की हैं। उसकी एम्बुलेंस जगह-जगह खड़ी रहती हैं। सूत्रों के अनुसार जितेन्द्र खुद एक हॉस्पीटल संचालित कर रहा है। उसकी एम्बुलेंस मरीजों को उसके हॉस्पीटल तक भी पहुंचाती हैं। जितेन्द्र खून की दलाली से लेकर अन्य काम खुलेआम करता है।

अच्छे उपचार के नाम पर होता है सौदा

निजी एम्बुलेंस चालक अच्छे इलाज के नाम पर मरीजों को निजी अस्पतालों में शिफ्ट करने का काम भी करते हैं। यह एम्बुलेंस चालक जयारोग्य अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों को कम पैसों में अच्छे उपचार की बात कहकर मरीजों को निजी अस्पताल में शिफ्ट कराते हैं। मरीज के एम्बुलेंस में बैठते ही उसका सौदा हो जाता है। मरीज के तीमारदारों को जब तक बात समझ में आती है, तब तक मरीज फंस चुका होता है। मरीजों को गुमराह कर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराने के बदले में एम्बुलेंस चालक को तय कमीशन मिल जाता है।

इनका कहना है

अस्पताल में अवैध रूप से खड़ी होने वाली एम्बुलेंस को बाहर करने के लिए प्री-पेड बूथ बनाया जाएगा, जिससे सभी एम्बुलेंसे बाहर हो जाएंगी और अस्पताल परिसर की भूमि भी खाली हो जाएगी।

डॉ. अशोक मिश्रा, जयारोग्य अस्पताल अधीक्षक

Updated : 2019-02-22T01:49:23+05:30

Naveen

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