Top
Home > राज्य > मध्यप्रदेश > ग्वालियर > कहीं अधूरा ना रह जाए सिंधिया समर्थकों का मंत्री पद का सपना

कहीं अधूरा ना रह जाए सिंधिया समर्थकों का मंत्री पद का सपना

सिंधिया के दिल्ली दरबार में हुआ विधायकों का प्रदर्शन बना गले की फांस, राहुल गांधी ने बनवाई गुप्तचर रिपोर्ट, सिंधिया के अगेंस्ट गया प्रदर्शन, राहुल हैं नाखुश

कहीं अधूरा ना रह जाए सिंधिया समर्थकों का मंत्री पद का सपना
X

ग्वालियर/स्वदेश वेब डेस्क। मध्यप्रदेश में गुटों में बंटी कांग्रेस को इस बार जनता ने जीत का तोहफा दिया है। हालाँकि चुनाव लड़ने से पहले राहुल गांधी के निर्देश पर सभी नेताओं ने एकजुटता दिखाते हुए बहुत मेहनत की जिसका परिणाम भी उन्हें मिला। लेकिन ये एकता का दिखावा ज्यादा दिन तक नहीं चल सका। कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया जाना सिंधिया समर्थकों को नहीं भाया तो उन्होंने सिंधिया के दिल्ली दरबार में धरना प्रदर्शन कर एकता की हकीकत को उजागर कर दिया। जिसके चलते कई विधायकों का मंत्री पद खतरे में जा सकता है। इसमें सबसे ऊपर नाम प्रद्युम्न सिंह तोमर का है।

प्रदेश में 15 साल के लम्बे अंतराल से सत्ता सुख से दूर रही कांग्रेस को इस बार जनता ने प्रदेश की सत्ता की बागडोर सौंप दी। लेकिन एकता के साथ चुनाव लड़ने का बार बार ढिंढोरा पीटने वाली कांग्रेस की कलई मुख्यमंत्री पद को लेकर खुल गई। कमलनाथ और सिंधिया के समर्थक आपस में ऐसे लड़ रहे थे जैसे ये एक पार्टी के नहीं विरोधी पार्टी के नेता हों। पहले भोपाल में पीसीसी मुख्यालय के बाहर लगातार हंगामा हुआ, दोनों गुटों के नेताओं ने अपनी अपनी ताकत दिखाने के लिए बड़े बड़े कटआउट और बैनर लेकर हंगामा किया और नारेबाजी की. मामला दिल्ली पहुंचा और कमलनाथ के नाम पर मुहर लग गई और बस यही बात ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों को अच्छी नहीं लगी। 17 दिसंबर को कमलनाथ के शपथ लेते ही सिंधिया समर्थक दिल्ली पहुँच गए और 18 एवं 19 दिसंबर को सिंधिया दरबार में उनके बंगले के बाहर धरना प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने राहुल गांधी से मांग की कि सिंधिया को उप मुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ बनाया जाये। करीब 40 से 50 विधायक शुरुआत में धरने में शामिल हुए बाद में कुछ विधायक कार्रवाई के डर से चले गए और कुछ "महाराज सिंधिया" समर्थक वहीँ डंटे रहे। इनमें प्रद्युम्न सिंह तोमर धरने को लीड कर रहे थे उनके अलावा गोविन्द राजूपत, इमरती देवी , ओपीएस भदौरिया, तुलसी सिलावट, गिररराज दंडोतिया आदि प्रमुख रूप से शामिल थे इन विधायकों ने तो यहाँ तक कह दिया कि हम मर जायेंगे , इस्तीफा दे देंगे। टीवी चेनल्स पर विधायकों ने बाइट्स दी कि हमारे साथ धोखा हुआ है युवा नेता को आगे लाकर बुजुर्ग को बागडोर सौंप दी इसलिए हम न्याय की मांग कर रहे हैं।

सिंधिया के घर के बाहर कांग्रेस विधायकों के धरने की खबर जैसे ही नेशनल चेनल्स और अखबारों की हेडलाइन बनीं राहुल गांधी की त्योरियां चढ़ गेन उन्होंने इंटेलिजेंस से रिपोर्ट मांगी कि कौन कौन विधायक बैठे हैं. इसके बाद राहुल गांधी ने सिंधिया को बुलाकर पूछा ये क्या है ? सूत्र बताते हैं कि पहली बार राहुल गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से कड़े शब्दों में बात की। सिंधिया ने राहुल से कहा कि विधायक दुखी हैं, आहत हैं , इस्तीफा देने की बात कर रहे हैं। सिंधिया का इतना कहते ही राहुल ने कहा ले लो इस्तीफा वरना आधे घंटे में इसे तत्काल बंद कराइये। राहुल का कड़ा रुख देखते ही सिंधिया ने तत्काल विधायकों को वहां से चलता कर दिया।

सूत्र बताते हैं कि उस दिन की घटना के बाद से राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया की कम ही मुलाकात हुईं हैं। वे सिंधिया समर्थक विधायकों के धरना प्रदर्शन से नाखुश हैं। सूत्र ये भी बताते हैं कि इससे पहले मंत्रिमंडल को लेकर कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं की बात हो गई थी जिसमें ये तय हुआ था कि मंत्रिमंडल में सभी संभागों के विधायकों को जगह दी जाये। लेकिन अब दिल्ली में हुए धरने और राहुल के तेवर देखकर लगता है कि इसका ग्वालियर चम्बल संभाग को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सूत्र बताते हैं कि ग्वालियर जिले से दो नाम डबरा विधायक इमरती देवी और ग्वालियर विधायक प्रद्युम्न सिंह के नाम पर हरी झंडी मिल चुकी थी , दोनों ही सिंधिया की पहली पसंद के रूप में शामिल किये गए थे लेकिन जिस तरह प्रद्युम्न सिंह तोमर ने धरने को लीड किया और नेशनल टीवी चेनल्स पर बाइट्स दीं उससे ये लग रहा है कि उनका मंत्री बनना अब बहुत मुश्किल है जबकि इमरती देवी को महिला , आदिवासी और सबसे अधिक वोटों से जीतने का लाभ मिल सकता है।

इधर मध्यप्रदेश में तेजी से बदल रहे घटनाक्रम में कुर्सी सँभालते ही कमलनाथ ने आईएएस, आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर भी शुरू कर दिए हैं। कमलनाथ के द्वारा की गई प्रशासनिक सर्जरी में अशोकनगर के कलेक्टर को छोड़कर ग्वालियर चम्बल संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर बदल दिए गए हैं। विशेष बात ये है कि ये सब मंत्रिमंडल गठन के पहले ही कर दिया गया जिससे मंत्री अपने अपने जिले में अपनी पसंद के अधिकारियों की पैरवी नहीं कर सकें। सूत्र बताते हैं कि पूरी प्रशासनिक सर्जरी में दिग्विजय सिंह की पसंद को बहुत तबज्जो दी जा रही है क्योंकि परदे के पीछे कमलनाथ के साथ वही मख्य रूप से शामिल हैं। मतलब साफ है कमलनाथ और दिग्विजय की जोड़ी ने स्पष्ट कर दिया है कि जो उनके हिसाब से चलेगा उसका राजनितिक भविष्य उज्जवल रहेगा। अब देखना ये है कि क्या राहुल गांधी सचिन पायलट की तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी डिप्टी सीएम और पीसीसी चीफ का ऑफर देते है और क्या सिंधिया इसे स्वीकार करते हैं यदि ऐसा नहीं हुआ तो इस बात में कोई दो राय नहीं कि ग्वालियर चम्बल संभाग के विधायकों की स्थिति अनाथों जैसी हो जाएगी, कमलनाथ भी उनके नाथ नहीं बन पाएंगे।

Updated : 2019-01-05T14:17:33+05:30
Tags:    

Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


Next Story
Share it
Top