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इतिहास बताने वाली स्वर्ण रेखा की सांसों में जमी गंदगी....

  • प्रशांत शर्मा -
  • करोड़ों रुपए खर्च कर कंक्रीट बिछाई, फिर भी नहीं हुआ सौंदर्यीकरण

इतिहास बताने वाली स्वर्ण रेखा की सांसों में जमी गंदगी....
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ग्वालियर,न.संराजशाही के जमाने में मेरी खूब पूछ परख होती थी। मेरा उद्गम हनुमान बांध से हुआ है। लेकिन अब मेरा आस्तित्व समाप्त होकर महज एक गंदा नाला रह गया है। आज मेरी सांसों में गंदगी जम चुकी है। शायद यह मौन पीड़ा कभी शहर के भूजल स्तर को बढ़ानेे वाली और शहर के बीच बहने वाली स्वर्ण रेखा नदी की है। करीब 30 किलोमीटर लंबी यह नदी कभी शहर की जीवन रेखा थी। इस नदीं में आजादी के समय का इतिहास भी समाया हुआ है।

यह नदी है फूलबाग के पास। जिसके किनारे अंग्रेजों से लोहा लेने वाली वीरांगना लक्ष्मीबाई ने अंतिम सांस ली थी। जहांं वीरांगना का समाधि स्थल बना हुआ है। आज इसका काफी भाग नाले में बदल चुका है। शहर के बीच से होकर बहने वाला स्वर्ण रेखा नाला कभी स्वर्ण रेखा नदी हुआ करती थी। यह नदी इस शहर की शान हुआ करती थी। इस नदी का उद्गम हनुमान बांध से हुआ है। लेकिन आज स्वर्ण रेखा नदी का नाम सरकारी कागजोंं में तो है, लेकिन असल मेंं यह बेरहम लोगों और प्रशासन की लापरवाही से एक नाला बन चुकी है। जब से स्वर्ण रेखा कंकरीट की बनी है तब से नगर मेंं भूजल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। जिसका परिणाम यह है कि स्मार्ट सिटी वाले इस महानगर में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है।

हैंडपंप सूख चुके हैं तो बोरिंंंग पानी छोड़ती जा रही है। शहरवासियों की प्यास तिघरा का पानी नहीं बुझा पा रहा है, जिसके कारण नगर निगम पानी के लिए बोरिंग कर धरती का कलेजा छलनी करने में लगा है। विकास के नाम पर अधिकारियों ने शहरवासियों को स्वर्ण रेखा में साफ पानी बहाकर उसमें नाव चलाने का सपना दिखा कर करीब एक डेढ़ दशक पहले करोड़ोंं-अरबों रुपए खर्च कर इस स्वर्ण रेखा को कंकरीट का बना दिया। नाव तो यदा-कदा चली किन्तु स्थाई तौर पर ऐसा नहीं हो सका।

इन अधिकारियों ने की थी कोशिशें

  • तत्कालीन जिलाधीश आकाश त्रिपाठी ने शहर में अतिक्रमण हटाने के दौरान स्वर्ण रेखा नदी से भी अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। उनके जाने के बाद सब पहले जैसा हो गया।
  • तत्कालीन जिलाधीश पी नरहरि ने मुरार नदी और स्वर्णरेखा नदी के संवर्धन मामले में खासी रुचि लेकर काम कराया था। मुरार नदी से कुछ हद तक अतिक्रमण भी हटा। लेकिन गंदे पानी को नहीं रोका जा सका।
  • तत्कालीन निगमायुक्त विनोद शर्मा ने स्वर्ण रेखा को सैलानी स्पॉट बनाने की कोशिश की थी। इसके लिए नदी का बहुत सा हिस्सा साफ भी किया गया था। इसके बाद इसके दोनों किनारों पर सर्विस रोड भी डालने की योजना बनाई थी। ताकि शहर की यातायात व्यवस्था काबू में आए और नदी को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। लेकिन उनके सेवानिवृत्त के बाद सारे काम पूरी तरह से बंद हो गए।

अमृत योजना के तहत डलनी है सीवर लाइन

स्वर्ण रेखा नदी में सीवर के लिए अमृत योजना के तहत लाइन डाली जानी है। नाम न छापने की शर्त पर निगम के एक अधिकारी ने कहा कि दो साल से इस स्वर्ण रेखा में सीवर लाइन नहीं डल पाई है। अधिकारी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारी यह तय नहीं कर पा रहे हंै कि सीवर लाइन बाहर से डाली जाएं या अंदर से।

इन कामों ने किया नदी को नाले में परिवर्तित

  • 2009 से पहले स्वर्ण रेखा को सिंचाई विभाग के माध्यम से पक्का किया गया।
  • आसपास की दीवारों के साथ-साथ सरफेस भी पक्का किए जाने से पानी जमीन में बैठना बंद हो गया।
  • बारिश का पानी व्यर्थ बहकर शहर से बाहर चले जाने की वजह से जल स्तर नीचे चला गया।
  • लश्कर और ग्वालियर उपनगर के अधिकतर गंदे नालों का निकास इसी नदी में है।
  • पीएचई ने शहर के सीवर को बाहर ले जाने के लिए स्वर्णरेखा के नीचे सीवर लाइन बनाई है।
  • सीवर लाइन की गंदगी लगातार नदी में घुलती जा रही है।
  • -बीते सात साल से स्थिति यह है कि नदी में बने सीवर के चेम्बर्स से गंदगी निकलती हुई साफ देखी जा सकती है।

इनका कहना है

ग्वालियर शहर के विकास में पुरातन समय से स्वर्ण रेखा नदी का बड़ा योगदान रहा है। ग्वालियर का विकास और नदी का विकास समानांतर होना था। किंतु दुर्भाग्य से पिछले कई वर्षों से इस नदी को सुसज्जित करने के लिए योजनाएं तो बहुत बनी, लेकिन क्रियान्वयन नहीं हो सका। इसके पीछे सच्चाई यह है कि शासकीय धन से नेता और अधिकारियों ने अपने पेट भरे। मैंने कांग्रेस सरकार के 15 महीने के कार्यकाल में इसकी दशा और दिशा बदलने के लिए काफी प्रयास किए, अब भाजपा सरकार इसे पूरी तरह नजर अंदाज कर रही है। इसकी लड़ाई जारी रहेगी।

प्रवीण पाठक, विधायक

अभी हमारा ध्यान मुरार नदी के सौंर्दयीकरण की ओर है। शीघ्र ही स्वर्ण रेखा नदी का कायाकल्प किया जाएगा।

कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, जिलाधीश

Updated : 2020-06-26T14:34:41+05:30

स्वदेश वेब डेस्क

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