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इस मिशन की मदद से महिलाएं बनीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सूत्रधार

इस मिशन की मदद से महिलाएं बनीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सूत्रधार
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भोपाल। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मदद से ग्रामीण महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सूत्रधार बन गई हैं। स्व-सहायता समूह के रूप में संगठित यह महिलाएं गांव में परचून, कपड़े की दुकानों से लेकर अगरबत्ती और साबुन जैसी दैनिक उपयोग की चीजों का गांव में ही उत्पादन कर रही हैं। इन महिलाओं के समूहों द्वारा निर्मित सामग्रियों की नगरीय क्षेत्रों में बड़ी मांग है।


ज्ञानवती बनी कपड़ा व्यवसायी

सीधी जिले के विकासखण्ड कुसमी के ग्राम भुड़माड़ की ज्ञानवती आजीविका मिशन की मदद से सफल कपड़ा व्यवसाई बन गई हैं। गंभीर आर्थिक तंगी से गुजर चुकी ज्ञानवती ने आजीविका मिशन के समूह के सदस्य के रूप में एक हजार का ऋण लेकर व्यापार शुरू किया था। हाट-बाजार में जाकर कपड़े बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे समूह से 10-20 हजार का ऋण लेकर कपड़े और अनाज का बड़े पैमाने पर व्यापार शुरू किया। आज ज्ञानवती अपने क्षेत्र की स्थापित कपड़ा और अनाज व्यवसाई हैं और प्रति माह 20 हजार रुपये से अधिक मुनाफा कमा रही हैं।

बिकती है आगर-मालवा की अगरबत्ती मुम्बई में

आगर-मालवा जिले के ग्राम फतेहपुर मेंढकी में स्व सहायता समूह की शान गौड़ द्वारा बनाई जा रही रातरानी, मोगरा, गुलाब, चंदन की खुशबू वाली अगरबत्ती की इंदौर-उज्जैन के साथ-साथ प्रदेश के बाहर मुम्बई और राजस्थान में भी अच्छी डिमांड है। खेतों पर मजदूरी करने वाली शानू और उसकी साथी महिलाओं ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अगरबत्ती निर्माण का काम सीखा। फिर थोड़ा-थोड़ा उत्पादन और मार्केटिंग शुरू किया। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि उनकी बनाई गई अगरबत्ती की मांग दिन-पर-दिन बढ़ती ही जा रही है।

आजीविका साबुन ने बनाया आत्म-निर्भर

टीकमगढ़ जिले की शशिप्रभा अहिरवार के संतोषी स्व-सहायता समूह के बनाए साबुन और वाशिंग पावडर की महक दूर-दूर तक फैल रही है। स्व-रोजगार की तलाश में एकत्र हुई 10 महिलाओं के इस समूह ने ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ जुड़कर नहाने का साबुन और वाशिंग पावडर का उत्पादन शुरू किया है। बैंक ने भी उनकी आर्थिक मदद की। समूह की सदस्यों ने स्वयं ही मार्केटिंग कर घर-घर जाकर अपना साबुन और पावडर बेचा। आज टीकमगढ़ अंचल में उनके उत्पाद की अलग पहचान और मांग है। समूह की सभी महिलाएं अपने इस कारोबार से आसानी से 4-5 हजार रुपये प्रति माह कमा रही हैं।

Updated : 2018-09-02T20:34:35+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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