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बुंदेलखंड में कांग्रेस-बसपा बनेगी भाजपा का सिरदर्द

मत विभाजन की आशंका को लेकर परेशान भाजपा

बुंदेलखंड में कांग्रेस-बसपा बनेगी भाजपा का सिरदर्द
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विशेष संवाददाता/भोपाल। प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व बसपा के बीच गठबंधन होना लगभग तय माना जा रहा है। दिल्ली में बसपा प्रमुख मायावती व कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओ के बीच इस संबंध में चर्चा हो चुकी है और सीट बटवारे को लेकर भी सहमति बन गई है ।

सूत्रो का कहना है कि कांग्रेस व बसपा गठबंधन के तहत कांगे्रस 30 सीटे बसपा के लिए छोड़ेगी और वहा अपने प्रत्याशी खड़े नही करेगी। गत दिनो इस मामले में बसपा सुप्रिमो मायावती से वरिष्ठ नेता कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने मुलाकात की थी उसके बाद इस गठबंधन पर सहमति बनी है। हालाकि इस गठबंधन पर दोनो दलो ने चुप्पी साध रखी है।वही इस गठबंधन ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। बुंदेलखंड को फोकस करते हुए भाजपा यहां अतिरिक्त ताकत लगाकर अपनी सीटों में विपक्षियों की सेंधमारी रोकने के लिए प्रयासरत है। यही वजह है कि भाजपा संगठन एक के बाद एक दौरे, बैठक, समेलन करके अपने जनाधार को बरकरार रखने की जुगत लगा रहा है।

मतदाताओं का बढ़ा झुकाव

उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे बुंदेलखंड के काफी बड़े इलाके में बहुजन समाज पार्टी का काफी प्रभाव है। सीटों के गणित में भले ही बसपा मप्र में संतोषजनक नतीजा न ला पाई हो। लेकिन मत प्रतिशत में यह पार्टी काफी वजनदार बनी हुई है। जब से बसपा ने आलोकप्रिय नारों और अपने कार्यक्रमों को बदला है। उसके बाद से ही आम मतदादाताओं का झुकाव बसपा की ओर देखा गया है।

यूपी का फॉमूला मप्र में

उत्तरप्रदेश के दो बड़े उप-चुनाव में जिस तरह से बसपा ने सपा के साथ गठबंधन कर भाजपा की नींद उड़ाई है। ठीक यही फार्मूला मप्र में होने वाले विस चुनाव में भी बसपा प्रयोग करेगी। यह ऐलान पूर्व में किया गया था। लेकिन कुछ दिन पूर्व ही मप्र में अपने संगठन और राजनैतिक जमीन की तलाश में दौरे पर आए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने खजुराहो में मीडिया के सामने स्पष्ट कहा था कि वह इस प्रदेश में सभी 230 सीटों पर चुनाव लडेÞंगे।हालाकि सपा का प्रदेश में खास प्रभाव नही है इसलिए कांग्रेस को सपा से गठबंधन करने में कोई रूची नही है वही भाजपा को भी सपा से कोई खतरा नही है।

खतरा देखा भाजपा सक्रिय

यहां इन दिनों क्षेत्र में यह चर्चा भी सरगर्म हो रही है कि यदि बसपा और कांग्रेस गठबंधन के साथ चुनाव में उतरते हैं तो भाजपा को सबसे अधिक दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं का मत बिखरने और इस संभाविक गठबंधन के आस-पास एकत्रित होने का खतरा नजर आ रहा है। हाल के दिनों में खतरे की इस आशंका को ध्यान में रखते हुए भी बुदेलखंड के इस अंचल में भी राजनैतिक गतिविधि और दिशा-निर्देशों में गति पकड़ ली है।

Updated : 2018-07-14T17:53:04+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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