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एससी-एसटी अत्याचार उन्मूलन (संशोधन) विधेयक 2018 लोकसभा से पारित

दलित उत्पीड़न विरोधी कानून के कुछ प्रावधानों को नरम बनाने संबंधी उच्चतम न्यायालय के एक फैसले को पलटने के लिए केंद्र सरकार ने इस अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण (संशोधन) विधेयक 2018 पेश किया।

एससी-एसटी अत्याचार उन्मूलन (संशोधन) विधेयक 2018 लोकसभा से पारित
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नई दिल्ली। दलितों और अनुसूचित जनजातियों के उत्पीड़न के रोकने के लिए कानूनी प्रावधानों को पहले जैसा ही सख्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया अनुसूचित जाति - अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारक (संशोधन) विधेयक 2018 को सोमवार को लोकसभा से पारित कर दिया गया। सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने विधेयक को सदन के पटल पर चर्चा के लिए रखा।

दलित उत्पीड़न विरोधी कानून के कुछ प्रावधानों को नरम बनाने संबंधी उच्चतम न्यायालय के एक फैसले को पलटने के लिए केंद्र सरकार ने इस अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण (संशोधन) विधेयक 2018 पेश किया। इस विधेयक में कानून को पहले की तरह सख्त बनाए रखने का प्रावधान किया गया है। दलित उत्पीड़न के आरोपी को शिकायत के बाद तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है और उसको अग्रिम जमानत नहीं मिल सकेगी। सरकारी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।

उच्चतम न्यायालय की एक खंडपीठ ने गत 20 मार्च को इस कानून के प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकने के लिए कुछ ऐहतियाती बदलाव किए थे। इसके बाद देशभर में दलित संगठनों ने आंदोलन किया था तथा दो अप्रैल को भारत बंद का आयोजन किया था। दलित आंदोलन के कारण नरेन्द्र मोदी सरकार ने उच्चतम न्यायालय के फैसले से उत्पन्न स्थिति के मद्देनजर संसद में विधेयक पेश करने की घोषणा की थी।

उल्लेखनीय है कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून में निम्नलिखित संशोधन किए जाएंगे। इसके तहत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के केस में प्राथमिकी दर्ज करने से पहले कोई प्रारंभिक जांच की जरूरत नहीं होगी। अभियुक्त की गिरफ्तारी करने के लिए कोई पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं होगी। इसके साथ दंड प्रक्रिया संहिता (सीआर-पीसी) की धारा-438 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्यानचार निवारण कानून पर लागू नहीं होगी। उच्चतम न्यायालय ने गत 20 मार्च को इस कानून के कुछ सख्त प्रावधानों को हटा दिया था, जिससे इससे जुडे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लग गई थी। न्यायालय के फैसले के बाद आरोपी को अंतरिम जमानत लेने की अनुमति भी मिल गई थी।

Updated : 2018-08-09T02:47:29+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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