अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूसी तेल और गैस पर 100% टैरिफ लगाने की योजना को रोक दिया, जिससे भारत समेत पांच देशों पर आर्थिक दबाव कम होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की राह खोलने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है. उन्होंने शुक्रवार को इससे जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि फैसला अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें और महंगाई राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं
100% टैरिफ लगाने की थी योजना
रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए प्रस्तावित कानून का मकसद उसकी तेल और गैस से होने वाली कमाई सीमित करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए उसे आर्थिक संसाधन जुटाने में मुश्किल हो. इस प्रस्ताव के तहत रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था.रूस से अधिक कच्चा तेल खरीदने वाले देशों की सूची में भारत और चीन के अलावा स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान के नाम भी शामिल थे। ऐसे में प्रस्ताव लागू होने पर भारत के साथ दूसरे देशों के व्यापार पर भी असर पड़ सकता था।
भारत के लिए क्यों अहम है फैसला?
भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. खबर में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45% थी। इस दौरान भारत ने रूस से रोजाना औसतन 20.8 लाख बैरल तेल खरीदा.ऐसे में रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ लगाने का खतरा भारत के लिए चिंता का विषय था। इससे तेल की खरीद महंगी होने के साथ भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी दबाव बढ़ सकता था.