ट्रम्प ने पोप लियो के ईरान पर दिए बयान की आलोचना करते हुए दावा किया कि ईरान में हजारों लोग मारे गए हैं और परमाणु खतरा बढ़ रहा है। मध्य-पूर्व तनाव के बीच कई देशों में कूटनीतिक हलचल तेज।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और कैथोलिक चर्च के प्रमुख Pope Leo XIV के बीच ईरान को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रम्प ने पोप के शांति और बातचीत के आह्वान पर नाराजगी जताते हुए ईरान में मानवाधिकार उल्लंघन और परमाणु खतरे को लेकर कड़े आरोप लगाए हैं।
पोप के शांति संदेश पर ट्रम्प की आपत्ति
पोप लियो ने हाल ही में ईरान मुद्दे पर बातचीत और शांति की अपील की थी। इसके जवाब में ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान में पिछले दो महीनों में हजारों निहत्थे लोगों की हत्या हुई है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ट्रम्प ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता और अमेरिका इस पर सख्त रुख अपनाएगा।
पोप लियो का जवाब: “हम राजनीति में नहीं पड़ते”
वहीं, पोप लियो ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य राजनीतिक बहस में शामिल होना नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका ध्यान केवल वैश्विक शांति और युद्ध समाप्ति की अपील पर केंद्रित है। उन्होंने ट्रम्प के साथ किसी भी तरह की बहस से दूरी बनाने की बात कही।
ईरान को लेकर बढ़ता वैश्विक तनाव
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल के दिनों में तेल आपूर्ति, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय बयान सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल
इस बीच कई देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। कुछ यूरोपीय देश समुद्री व्यापार सुरक्षा के लिए नए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की योजना पर भी विचार कर रहे हैं। कनाडा और रूस जैसे देशों ने मानवीय सहायता और परमाणु नियंत्रण को लेकर अलग-अलग प्रस्ताव दिए हैं, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर भी संकेत मिले हैं।इजराइल, लेबनान और अन्य देशों के बीच सैन्य गतिविधियों में वृद्धि देखी जा रही है। रॉकेट हमलों और जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्र की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचता है तो वैश्विक आर्थिक विकास दर पर गंभीर असर पड़ सकता है और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दुनिया को मध्य-पूर्व संकट की ओर धकेल दिया है, जहां कूटनीति और तनाव दोनों साथ-साथ आगे बढ़ते दिख रहे हैं।