बिहार के सीतामढ़ी की बागमती नदी में 40 यात्रियों से भरी नाव पलट गई। क्षमता से ज्यादा लोगों के बैठने की बात सामने आई। हालांकि ग्रामीणों ने सभी को सुरक्षित बचा लिया गया।
सीतामढ़ी। भारत के पड़ोसी देश नेपाल में हो रही मूसलाधार बारिश का असर देश के मैदानी इलाके बिहार में देखने को मिल रहा है। बिहार की कोसी, बागमती समेत जिले से गुजरने वाली कई नदियां उफान पर है। इसी बीच सीतामढ़ी जिले में रविवार को नाव हादसा सामने आया। यहां रुन्नीसैदपुर इलाके में बागमती नदी के बीच 40 लोगों से भरी नाव अचानक पलट गई।
नाव पलटते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि स्थानीय लोगों की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कुछ लोग नदी में गिरने के बाद खुद तैरकर किनारे पहुंच गए। वहीं, कई यात्रियों को स्थानीय ग्रामीणों और गोताखोरों ने बचाया।
कब्रिस्तान से लौटते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, खड़का गांव निवासी मोहम्मद फरहान की मौत के बाद परिवार और ग्रामीण उन्हें दफनाने के लिए नदी पार स्थित कब्रिस्तान गए थे। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी लोग वापस लौट रहे थे। इसी दौरान नाव बीच नदी में पहुंचते ही डगमगाने लगी और अचानक पलट गई। नाव में सवार लोग पानी में गिर गए। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत मदद शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाव चालक लोगों को जल्दी नदी पार कराने का भरोसा देकर बैठाया था। लोगों के मना करने के बाद भी उसने लोगों को जबरन बैठाया।
क्षमता से ज्यादा यात्रियों को बैठाने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि हादसे वाली नाव की क्षमता करीब 15 से 20 लोगों की थी। लेकिन उसमें करीब 40 लोग सवार थे। स्थानीय निवासी ने बताया कि खड़का घाट से बड़ी संख्या में लोग रोजाना नाव के जरिए नदी पार करते हैं। गांव के लोगों की मजबूरी है क्योंकि दूसरी तरफ जाने के लिए कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि छोटी नावों में क्षमता से ज्यादा लोगों को बैठाया जाता है। उनका कहना है कि प्रशासन को यहां सुरक्षित नावों और पुल जैसी सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए।
बिहार की कई नदियों में बढ़ा पानी का दबाव
बारिश के चलते कोसी समेत राज्य की कई प्रमुख नदियों में पानी का दबाव बढ़ गया है। कोसी बराज से भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया है, जिससे नदी किनारे बसे गांवों में चिंता बढ़ गई है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और जोखिम भरी यात्रा से बचने की सलाह दी जा रही है।