Breaking News
  • टी-20 वर्ल्ड कप- न्यूजीलैंड सुपर-8 में पहुंचा, कनाडा को 8 विकेट से हराया
  • 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज, शाम 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगा, भारत में दिखाई नहीं देगा
  • जम्मू कश्मीरः श्रीनगर में नाजिर अहमद भट के ठिकानों पर NIA की रेड
  • फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत पहुंचे, मुंबई एयरपोर्ट पर किया लैंड
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अप्रत्यक्ष रूप से ईरान के साथ परमाणु वार्ता में शामिल होंगे
  • तेलंगाना निकाय चुनाव- 86 निकायों में जीते कांग्रेस के मेयर-अध्यक्ष
  • श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से हराया, सुपर 8 पहुंचने की राह हुई कठिन

होम > देश

Mohan Bhagwat on Family Strength at RSS Gorakhpur

कुटुम्ब का साथ नहीं मिलता तो ‘संघ’ खड़ा नहीं होता – डॉ. मोहन भागवत

गोरखपुर में संघ के कुटुम्ब स्नेह मिलन कार्यक्रम में डॉ. मोहन भागवत ने परिवार, संस्कार और पंच परिवर्तन पर विस्तार से विचार रखे।


कुटुम्ब का साथ नहीं मिलता तो ‘संघ’ खड़ा नहीं होता – डॉ मोहन भागवत

गोरखपुर। परिवार अगर साथ खड़ा हो जाए तो समाज बदलता है, और अगर परिवार बिखर जाए तो कोई संगठन टिक नहीं सकता। कुछ इसी भाव के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने गोरखपुर में आयोजित कुटुम्ब स्नेह मिलन कार्यक्रम में अपनी बात रखी। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में यह आयोजन शहर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में हुआ, जहां गोरखपुर महानगर के 20 नगरों चौरी-चौरा, गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र के कार्यकर्ता और उनके परिवारजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।  

height=729

कुटुम्ब केवल चार दीवार नहीं, एक भाव है

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि एक छत और एक पुरुष-महिला से कुटुम्ब नहीं बनता। कुटुम्ब वह है जहां अपनापन हो, रिश्तों में आत्मीयता हो। उन्होंने कहा कि बच्चे का जन्म होते ही परिवार उसे सामाजिक बनाना शुरू कर देता है। समाज में कैसे रहना है, दूसरों के लिए कैसे सोचना है, यह शिक्षा सबसे पहले घर से ही मिलती है। उनका कहना था कि भारत में कुटुम्ब अपनेपन पर आधारित है, जबकि पश्चिमी देशों में संबंध अक्सर करार या समझौते जैसे हो जाते हैं। उन्होंने कहा हम विवाह को कर्तव्य मानते हैं करार नहीं। 

परिवार से ही राष्ट्र की शक्ति

डॉ. भागवत ने उदाहरण देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब शास्त्री जी ने देश के लिए लोगों से सोना-चांदी देने का आह्वान किया, तब परिवारों ने आगे बढ़कर राष्ट्रहित में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों का केंद्र भी परिवार है। उत्पादन, बचत, संसाधन सबकी शुरुआत घर से होती है। उन्होंने कहा मैं अकेला नहीं हूं, हम सब हैं, यह भावना कुटुम्ब सिखाता है। उन्होंने महिलाओं की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पीढ़ी तैयार करने का कार्य माता करती है। इसी भाव से भारत माता की संकल्पना जीवित रहती है।

‘संघ’ को जानना है तो स्वयंसेवक का परिवार देखिए

डॉ. भागवत ने कहा कि कुटुम्ब का साथ नहीं मिलता तो संघ खड़ा नहीं होता। संघ को समझना है तो उसकी शाखा देखिए, स्वयंसेवक को देखिए और उसके परिवार को देखिए। जो बातें कही जाती हैं, उन्हें आचरण में उतारना ही संघ की परंपरा है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज को बदलना है तो परिवर्तन की शुरुआत परिवार से करनी होगी। वर्ष में दो-तीन बार छोटे स्तर पर कुटुम्ब मिलन हो, बैठकर चर्चा हो, इससे पश्चिमीकरण से आए भ्रम दूर होंगे।

पंच परिवर्तन और दैनिक जीवन

डॉ. भागवत ने ‘पंच परिवर्तन’ को केवल भाषण का विषय न बनाकर आचरण में उतारने की बात कही। उन्होंने पर्यावरण की चिंता घर से शुरू करने पर जोर दिया पानी बचाना, प्लास्टिक हटाना, पेड़ लगाना।भाषा, भूषा, भवन, भोजन और भजन को अपनी परंपरा से जोड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा घर में मातृभाषा बोलिए, जिस प्रांत में रहते हैं उसकी भाषा सीखिए। परंपरागत भोजन अपनाइए, स्वदेशी का प्रयोग कीजिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सप्ताह में एक दिन पूरा परिवार साथ बैठे, छोटे बच्चे से लेकर बड़े तक, और इन विषयों पर चर्चा करे। जो सहमति बने, उसे व्यवहार में लाया जाए।

height=853

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ और समापन भारत माता की आरती के साथ। मंच पर प्रांत संघचालक डॉ. महेंद्र अग्रवाल और विभाग संघचालक शेषनाथ जी भी उपस्थित रहे। 

Related to this topic: