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Mohan Bhagwat Addresses Social Harmony Meet in Luc

भारतीय मुसलमानों की जड़ें इसी भूमि से जुड़ीं हैं : डॉ. भागवत

लखनऊ में सामाजिक सद्भाव बैठक में शामिल हुए डॉ. मोहन भागवत, घर वापसी, जनसंख्या संतुलन और घुसपैठ पर दिया जोर


भारतीय मुसलमानों की जड़ें इसी भूमि से जुड़ीं हैं  डॉ भागवत

लखनऊ में सामाजिक स‌द्भाव बैठक में सम्मिलित हुए सरसंघचालक

घर वापसी और जनसंख्या संतुलन पर भी दिया जोर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में सम्मिलित हुए। यहां उन्होंने जनसंख्या, घर वापसी, घुसपैठ, यूजीसी गाइडलाइंस और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। वे दो दिन के लखनऊ प्रवास पर हैं। पहले दिन निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के सभागार में कार्यक्रम आयोजित हुआ।

डॉ. भागवत ने कहा कि भारत में रहने वाले मुसलमानों की जड़ें भी इसी भूमि से जुड़ीं हैं। वे किसी अरब देश से नहीं आए, बल्कि यहीं के पूर्वजों की संतान हैं। समाज को बांटने के बजाय जोड़ने की आवश्यकता है। 'घर वापसी' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई तात्कालिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवाद और सामाजिक समझ के माध्यम से धीरे-धीरे होने वाला कार्य है।

यूजीसी गाइडलाइंस पर यह कहा: यूजीसी से जुड़े विवाद पर डॉ. भागवत ने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए नियम किसी एक वर्ग के खिलाफ नहीं होते। यदि किसी को कोई कानून गलत लगता है तो उसे संवैधानिक तरीके से बदलने की प्रक्रिया उपलब्ध है। मामला न्यायालय में लंबित है, इसलिए समाज को जातीय संघर्ष में नहीं उलझना चाहिए। कानून का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है

सामाजिक समरसता और संवाद पर जोरः सामाजिक समरसता पर बोलते हुए उन्होंने उदाहरण दिया कि यदि कोई व्यक्तिगड्ढे में गिरा है, तो बाहर निकलने के लिए उसे स्वयं भी प्रयास करना होगा और बाहर खड़े व्यक्ति को भी झुककर सहारा देना होगा। उनका कहना था कि समाज में संवाद और सहयोग दोनों पक्षों से जरूरी है।

घुसपैठ समस्या पर सख्त रुख

डॉ. मोहन भागवत ने बढ़ती घुसपैठ पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि घुसपैठियों को 'डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे लोगों को रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए।जनसंख्या असंतुलन पर जताई चिंताः हिंदू समाज की घटती जन्मदर पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा वर्तमान जनसंख्या दर 2.1 है, जबकि यह कम से कम 3 होनी चाहिए। नवविवाहित दंपतियों से अपील की कि वे कम से कम तीन बच्चों के बारे में विचार करें, ताकि सामाजिक संतुलन बना रहे।