नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट का उद्घाटन। मैक्रों, लूला समेत वैश्विक नेता और टेक दिग्गज शामिल, AI गवर्नेंस पर चर्चा।
भारत इस सप्ताह वैश्विक तकनीकी मंच पर एक अहम भूमिका निभा रहा है। नई दिल्ली में शुरू हुए पांच दिवसीय AI इम्पैक्ट समिट में दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, नीति निर्माता और टेक उद्योग के दिग्गज एक साथ जुटे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार दोपहर समिट का उद्घाटन करते हुए कहा कि यह आयोजन भारत की वैज्ञानिक क्षमता और युवाओं की प्रतिभा का प्रमाण है। उन्होंने इसे वैश्विक AI शासन और सहयोग के लिए साझा रोडमैप तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
20 राष्ट्राध्यक्ष, 45 मंत्री स्तरीय प्रतिनिधिमंडल
सरकार के अनुसार अब तक का यह सबसे बड़ा संस्करण है। आयोजन में लगभग 2.5 लाख प्रतिभागियों के आने की उम्मीद है, जिनमें 20 राष्ट्रीय नेता और 45 मंत्री स्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा भी इसमें भाग लेने वाले प्रमुख नेताओं में हैं।
टेक जगत के बड़े नाम भी मौजूद
केवल राजनीतिक नेतृत्व ही नहीं, बल्कि वैश्विक टेक उद्योग के शीर्ष चेहरे भी इस मंच पर दिखाई देंगे।
इनकी मौजूदगी से साफ है कि AI अब केवल तकनीक नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था और राजनीति का भी केंद्रीय मुद्दा बन चुका है।
एजेंडा: रोजगार, बाल सुरक्षा और AI नैतिकता
समिट के मुख्य विषय हैं लोग, प्रगति और ग्रह”। चर्चा में रोजगार पर AI के प्रभाव, श्रम बाजार में बदलाव, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी और AI के नैतिक उपयोग जैसे मुद्दे शामिल हैं। जनरेटिव AI टूल्स, जो टेक्स्ट और इमेज तैयार कर सकते हैं, से लेकर रक्षा, स्वास्थ्य और जलवायु मॉडलिंग में इस्तेमाल हो रहे उन्नत सिस्टम तक हर पहलू पर मंथन हो रहा है।
भारत की रणनीति: ग्लोबल साउथ और विकसित देशों के बीच सेतु
भारत खुद को विकसित अर्थव्यवस्थाओं और ग्लोबल साउथ के बीच एक पुल के रूप में पेश कर रहा है। सरकार का दावा है कि डिजिटल पहचान और भुगतान प्लेटफॉर्म जैसे बड़े डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अनुभव कम लागत में बड़े पैमाने पर AI तैनाती का मॉडल दे सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि लक्ष्य स्पष्ट है कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग मानवता को आकार देने, समावेशी विकास और स्थायी भविष्य के लिए होना चाहिए।
क्या निकलेगा ठोस नतीजा?
पिछले संस्करणों की तरह इस बार भी किसी बाध्यकारी वैश्विक समझौते की संभावना कम है। उम्मीद है कि समिट का समापन एक गैर-बाध्यकारी घोषणा या प्रतिज्ञा के साथ होगा, जिसे नई दिल्ली घोषणा” का नाम दिया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चर्चा का केंद्र यह रहेगा कि सरकारें सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें, लेकिन अत्यधिक विनियमन से नवाचार बाधित न हो। AI अब भविष्य की तकनीक नहीं, वर्तमान की वास्तविकता है। नई दिल्ली में हो रहा यह मंथन इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में AI सिर्फ उद्योग नहीं, बल्कि समाज और शासन की दिशा भी तय करेगा। दुनिया देख रही है कि भारत इस भूमिका को किस तरह आकार देता है।