नई दिल्ली। प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण गुरुवार को ओडिशा के तट पर हुआ। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से इस स्वदेशी मिसाइल को दागा। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक परीक्षण में तय किए गए सारे लक्ष्य हासिल हो गए।
सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर दागी गई मिसाइल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर इस परीक्षण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिसाइल गुरुवार सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर दागी गई। यह परीक्षण यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल का हिस्सा था। राजनाथ सिंह के मुताबिक प्रलय ने सभी निर्धारित उद्देश्य पूरे किए। अलग-अलग रेंज उपकरणों से जो आंकड़े जुटाए गए, उनसे भी परीक्षण की कामयाबी की पुष्टि हुई। रक्षा मंत्री ने इसे स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और अहम उपलब्धि बताया। प्रलय सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है।
DRDO successfully conducted the flight test of the indigenously developed Pralay Missile off the coast of Odisha today at 1110 hrs. The test was conducted as part of user evaluation trials and successfully met all the stipulated objectives, as validated by data captured through various range instruments. This successful trial marks another significant milestone in strengthening India’s indigenous defence capabilities.
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) November 5, 2026
एक महीने पहले हुआ था हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म का टेस्ट
डीआरडीओ ने पिछले महीने भी एक बड़ा परीक्षण किया था। उस बार स्वदेशी हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम को आसमान में उतारा गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह प्लेटफॉर्म औसतन 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा। इसके बाद इसे 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर आधे घंटे से ज्यादा समय तक चलाया गया। फिर इसे नीचे उतारा गया और सुरक्षित बरामद कर लिया गया। उड़ान में जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण भी किया गया।
समताप मंडल में काम करने की ताकत
इस परीक्षण में प्लेटफॉर्म ने समताप मंडल यानी स्ट्रैटोस्फियर में उड़ान भरने की क्षमता दिखाई। यह इलाका लंबे समय तक निगरानी, संचार और मॉनिटरिंग वाले अभियानों के लिहाज से अहम माना जाता है। उड़ान के दौरान प्लेटफॉर्म से ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तक रियल टाइम वीडियो और विमान के प्रदर्शन के आंकड़े लगातार पहुंचते रहे। अधिकारियों ने बताया कि सिस्टम में इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट, जीपीएस रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे और ऊंचाई नियंत्रित करने वाले उपकरण लगे थे। मिशन में सभी सब-सिस्टम उम्मीद के मुताबिक चले।
कई एजेंसियों ने मिलकर किया था परीक्षण
यह उड़ान परीक्षण भारतीय वायुसेना, सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दिनेस एंड सर्टिफिकेशन, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और अन्य नागरिक एजेंसियों के तालमेल से पूरा हुआ।