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डॉ. मोहन भागवत ने किया सम्मेलन को संबोधित

अगर धर्म संकट में है, तो देश को भी नुकसान होगा: डॉ. भागवत

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित विहार सेवा सम्मेलन में धर्म और राष्ट्र के संयोजन पर जोर दिया। उन्होंने धर्म को जीवन और समाज के लिए महत्वपूर्ण बताया।


अगर धर्म संकट में है तो देश को भी नुकसान होगा डॉ भागवत

सरसंघचालक ने ऑल इंडिया विहार सेवा ग्रुप के 14वें सम्मेलन को किया संबोधित
  • धर्म जीवन और समाज को सही दिशा देने वाली सोच है

  • धर्म-राष्ट्र को अलग नहीं देखा जा सकता

मुंबई।धर्म और राष्ट्र को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। धर्म केवल पूजा या किसी एक धार्मिक पहचान का नाम नहीं है, बल्कि यह जीवन और समाज को सही दिशा देने वाली सोच है। भारत ने दुनिया को बिना किसी हमले या धर्म परिवर्तन के शांति और समृद्धि का रास्ता दिखाया है। यदि धर्म संकट में है, तो देश को भी नुकसान होगा।

यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शुक्रवार को कही। वे मुंबई में ऑल इंडिया विहार सेवा ग्रुप के 14वें सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनिया विकास और पर्यावरण सुरक्षा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन खोज रही है।

भक्ति से ईश्वर के करीब पहुंच सकते हैं

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भक्ति और सही सोच के जरिए इंसान ईश्वर के करीब पहुंच सकता है। उनके अनुसार, इंसान को अपने जीवन में सत्य और सही रास्ते की तलाश करनी चाहिए।

भारत के पास विशाल ज्ञान परंपरा

सरसंघचालक ने कहा कि भारत के पास वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और गीता जैसी विशाल ज्ञान परंपरा है। इसमें जैन आगम, त्रिपिटक, गुरु ग्रंथ साहिब और संतों की शिक्षाएं भी शामिल हैं।

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