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बीएस-IV वाहनों की बिक्री पर लगेगी रोक

बीएस-IV वाहनों की बिक्री पर लगेगी रोक
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नई दिल्ली/स्वदेश वेब डेस्क। जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार और आटोमोबाइल निर्माता संघ की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है की 31 मार्च, 2020 के बाद बीएस-4 वाहनों की बिक्री नहीं की जा सकती।

याचिका में कहा गया था कि आटोमोबाइल निर्माताओं को अपने स्टॉक खत्म करने के लिए 31 मार्च, 2020 के बाद भी वाहनों की बिक्री करने की अनुमति दी जाए ।

आटोमोबाइल निर्माताओं की दलील थी कि वे अंतिम समय सीमा खत्म होने के पहले बीएस-4 वाहनों का उत्पादन बंद कर देंगे लेकिन अपना स्टॉक खत्म करने के लिए छह महीने का ग्रेस पीरियड दिया जाए। कोर्ट ने उनकी दलील खारिज करते हुए कहा कि 31 मार्च 2020 के बाद न तो बीएस-4 वाहनों की बिक्री होगी और न ही उत्पादन।

पिछली 23 जुलाई को केंद्र सरकार ने कहा था कि 1 अप्रैल, 2020 से देश में सिर्फ बीएस-6 गाड़ियों की बिक्री होगी। यानि 1 अप्रैल 2020 से केवल बीएस-6 वाली गाड़ियां का ही उत्पादन होगा । केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर ये बात बताई थी। पेट्रोलियम मंत्रालय ने अलग तरह की गाड़ियों के लिए डीज़ल की अलग कीमत रखने के सुझाव को अव्यावहारिक बताया था।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने पूछा था कि क्या पेट्रोल-डीजल बीएस-2, 4 और 6 के लिए अलग-अलग रंग के स्टीकर और नंबर प्लेट जारी किए जा सकते हैं, ताकि पता चल सके कि ये कौन सी गाड़ियां हैं। कोर्ट ने सुझाव दिया था कि इसकी शुरुआत बीएस-6 से की जाए ताकि अलग रंग का होने से इसकी पहचान हो सके। कोर्ट के इस सुझाव पर केंद्र सरकार ने कहा था कि वह सुझाव पर काम करेगी ।

केंद्र सरकार ने कहा था कि व्यावसायिक वाहनों और निजी वाहनों के लिए डीज़ल की कीमतें अलग-अलग नहीं रखी जा सकती हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि दिल्ली में कितनी टैक्सी हैं? तब कोर्ट को बताया गया कि दिल्ली में लगभग 68 हज़ार गाड़ियां हैं।

पहले की सुनवाई के दौरान पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने डीजल वाहनों से होने वाले प्रदूषण को चिंता का विषय बताया था। कोर्ट ने सरकार को सुझाव दिया था कि वह माल ढोने वाले वाहनों से दूसरे वाहनों के लिए डीजल और पेट्रोल की कीमत एक समान निर्धारित करने पर विचार करे लेकिन आज केंद्र सरकार ने इसे अव्यावहारिक बताया।

Updated : 2018-10-25T20:53:28+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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