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ममता की शादी गूगल पर सबसे ज्यादा खोजी गई, ट्विटर पर भी छाई रहीं

ममता की शादी गूगल पर सबसे ज्यादा खोजी गई, ट्विटर पर भी छाई रहीं
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कोलकाता। अरबों रुपये के चिटफंड घोटाला मामले में साक्ष्यों को मिटाने के आरोपित कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के घर सीबीआई टीम के पहुंचने के बाद गत रविवार से मंगलवार रात तक धरने पर बैठी रहीं ममता बनर्जी इन तीन दिनों के दौरान गूगल पर सबसे ज्यादा खोजी गई हैं। गूगल के साथ-साथ ममता इन तीन दिनों तक ट्विटर पर सबसे ज्यादा छाई रहीं। ट्विटर पर सबसे अधिक ममता को ट्रेंड किया गया| कोई पक्ष में तो कोई विपक्ष में, लेकिन रविवार रात से लेकर मंगलवार रात तक टि्वटर पर एक नंबर पर ममता ही रही हैं। बुधवार सुबह पता चला है कि न केवल देश बल्कि विदेशों में भी लोगों ने ममता के बारे में सर्च किया है| ऐसा उनकी नेतृत्व क्षमता अथवा राजनीति के बारे में नहीं, बल्कि सबसे अधिक लोगों ने यह जानना चाहा है कि ममता बनर्जी की शादी हुई है या नहीं।

ममता बनर्जी के बारे में यह सवाल बार-बार उठता है कि उन्होंने शादी क्यों नहीं की? कुंवारी क्यों रहीं? दरअसल स्वभाव से बागी ममता सामाजिक परंपराओं की विरोधी भी हैं। शादी के बाद औरत की सीमाओं में वह बंधना नहीं चाहती थीं| उन्होंने जीवनभर समाज सेवा की प्रतिज्ञा की थी| बाद में समाजसेवा के लिए उन्‍होंने कभी शादी न करने का फैसला ले लिया।

शादी के बाद दूसरी सबसे अधिक खोजी गई चीज उनके बारे में उनकी शिक्षा थी। दक्षिण कोलकाता के जोगमाया देवी कॉलेज से ममता बनर्जी ने इतिहास में बीए ऑनर्स की डिग्री हासिल की है। बाद में कलकत्ता विश्वविद्यालय से उन्होंने इस्लामिक इतिहास में मास्टर डिग्री ली। श्री शिक्षायतन कॉलेज से उन्होंने बीएड की डिग्री ली, जबकि कोलकाता के जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से उन्‍होंने कानून की पढ़ाई की है। शादी और शिक्षा के बारे में जानने के अलावा ऐसे लोगों की संख्या कम नहीं थी जिन्होंने ममता बनर्जी की जाति के बारे में सर्च किया है। ममता बनर्जी ब्राह्मण हैं| उनके पिता का नाम प्रोमिलेश्वर बनर्जी और उनकी मां का नाम गायत्री देवी था। पांचवें नंबर पर ममता बनर्जी के बारे में खोजने वाले वे लोग थे जो यह जानना चाहते थे कि क्या ममता बांग्लादेश की रहने वाली हैं? हालांकि ममता बनर्जी का बांग्लादेश से कोई लेना-देना नहीं है। उनका घर कोलकाता की हरीश चटर्जी स्ट्रीट में शक्तिपीठ कालीघाट के पास है जबकि उनका पैतृक आवास वीरभूम जिले में स्थित है।

इन सवालों के अलावा ऐसे भी कम लोग नहीं थे जिन्होंने ममता की राजनीति के बारे में भी सर्च किया। अधिकतर लोगों ने यह जानना चाहा कि सबसे पहले ममता ने कब जीत दर्ज की थी। वह 1984 का दौर था। ममता बनर्जी 1984 के चुनावों में जादवपुर सीट से एमपी चुनी गई थीं, लेकिन उनकी जीत में बड़ी बात यह थी कि उन्होंने माकपा के कद्दावर नेता सोमनाथ चटर्जी को मात दी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी तुलना करते हुए सर्च करने वाले लोग भी कम न थे। लोग यह जानना चाहते थे कि ममता- मोदी में किस बात का टशन है। अटल बिहारी वाजपेयी के पूरे शासन के दौरान एनडीए का हिस्सा रहीं ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस रही है। साल 2001 की शुरुआत में भाजपा के खिलाफ हुए एक स्टिंग के खुलासों के बाद ममता नाराज हो गई थीं और उन्होंने अपनी पार्टी को एनडीए से अलग कर लिया था। अब तो मोदी विरोध ही उनकी पहचान बन चुकी है।

इन सवालों के अलावा ममता बनर्जी के घर और उम्र के बारे में भी लोगों ने बड़े पैमाने पर सर्च किया है। इन सवालों का जवाब ढूंढने वाले लोगों को गूगल ने बताया है कि ममता का घर कोलकाता के 30 बी हरीश चटर्जी स्ट्रीट में स्थित है। ममता बनर्जी की उम्र 64 साल साल है। उनका जन्म 1955 में हुआ था। जब 9 साल की उम्र में उनके पिता का देहांत हुआ था तो उस समय वह बहुत गरीब थे। गरीबी में रहीं ममता को कपड़े खरीदने और इकट्ठा करने का शौक ही नहीं है। आज भी उनके घर जो मेहमान आते हैं वो उन्‍हें मुरमुरे और पानी ही देती हैं।

उल्लेखनीय है कि चिटफंड घोटाला मामले में साक्ष्यों को मिटाने के आरोपित कोलकाता पुलिस आयुक्त के घर रविवार शाम 6:00 बजे के करीब 20 से 25 की संख्या में सीबीआई की टीम पहुंच गई थी जिन्हें कोलकाता पुलिस ने न सिर्फ हिरासत में लिया था बल्कि उनका कॉलर पकड़कर घसीटते हुए पुलिस वैन में डाला था। इसके बाद ममता बनर्जी पुलिस आयुक्त के घर पहुंची थीं और सीबीआई की कार्रवाई को भाजपा द्वारा निर्देशित करार देते हुए कोलकाता के मेट्रो चैनल पर धरने पर बैठ गई थीं। उन्होंने पूरे पुलिस बल को केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया था और चेतावनी दी थी कि अगर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने के बारे में सोचा गया तो वह धारा 144 लगाकर किसी को भी नहीं घुसने देंगी। इसके बाद पूरे देश की निगाहें पश्चिम बंगाल पर टिक गई थीं और मंगलवार रात तक ममता बनर्जी का धरना जब तक खत्म नहीं हुआ तब तक वह पूरे देश में सबसे अधिक चर्चित नेता बनी रहीं। मंगलवार सुबह सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दे दिया कि कोलकाता पुलिस आयुक्त को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा| हालांकि पूछताछ के लिए उन्हें सीबीआई दफ्तर में हाजिर होना ही होगा| उसके बाद मौके की नजाकत को समझते हुए ममता ने अपना धरना खत्म कर दिया था।

Updated : 6 Feb 2019 6:31 AM GMT
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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