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केंद्र ने राज्यों से मांगा निजी स्कूलों में ईडब्ल्यूएस श्रेणी की खाली सीटों का ब्यौरा

केंद्र ने राज्यों से मांगा निजी स्कूलों में ईडब्ल्यूएस श्रेणी की खाली सीटों का ब्यौरा

नई दिल्ली/स्वदेश वेब डेस्क। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राज्यों से निजी स्कूलों में प्री-स्कूल, प्री-प्राइमरी और पहली कक्षा में आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी की खाली पड़ी सीटों का विवरण मांगा है।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि हमने राज्यों से ईडब्ल्यूएस की खाली पड़ी सीटों के बारे में जानकारी मांगी है। उन्होंने कहा कि राज्यों द्वारा इस संबंध में आंकड़ा मुहैया कराए जाने के बाद इस श्रेणी के तहत उपलब्ध प्रावधानों के बेहतर इस्तेमाल का विश्लेषण किया जाएगा।

केंद्र ने यह कदम दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) की एक हालिया रिपोर्ट के चलते उठाया है। रिपोर्ट में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के तहत आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) और वंचित समूह (डीजी) श्रेणियों के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों में बड़ी धांधली का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में शैक्षणिक सत्र 2018-19 में नर्सरी कक्षा में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के बच्चों के लिए आरक्षित लगभग 13 हजार नर्सरी सीटें रिक्त पड़ी होने का दावा किया है। रिपोर्ट में यह भी बताया है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 74 निजी स्कूल ऐसे भी हैं, जिन्होंने गत दो अकादमिक सत्रों में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत एक भी छात्र को दाखिला नहीं दिया था।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद दिल्ली में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उपराज्यपाल अनिल बैजल से इस मामले पर उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने की मांग की ताकि इस बात की जिम्मेदारी निर्धारित की जा सके कि प्राइवेट स्कूलों में किन कारणों से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित सीटें भरने से रह गईं।

नेता विपक्ष विजेन्द्र गुप्ता के अनुसार प्रति वर्ष 45,122 सीटें ईडब्ल्यूएस श्रेणी के बच्चों के लिए आरक्षित रखी जाती हैं। इस प्रकार गत तीन वर्षों में 1,44,366 सीटों में से मात्र 74,500 सीटें ही भरी गईं। वर्ष 2018-19 में 35,500, वर्ष 2017-18 में 20,000 तथा वर्ष 2016-17 में 19,000 सीटें ही भरी गईं। उन्होंने कहा कि यह बात समझ से परे है कि 74 स्कूलों में इस वर्ष एक भी आरक्षित सीट नहीं भरी गईं।

गुप्ता ने कहा कि जनता काे यह जानने का अधिकार है कि आखिरकार पिछले तीन वर्षों में 69,866 आरक्षित सीटें क्यों खाली रह गईं। उन्होंने कहा कि शिक्षा अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत वह प्राइवेट स्कूल, जिन्हें रियायती दरों पर भूमि मिली है, 25 प्रतिशत सीटें ईडब्ल्यूएस तथा डीसी के लिए आरक्षित रखने के लिए बाध्य है ।

Updated : 2018-10-21T22:39:04+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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