केंद्र सरकार ने 10,000 करोड़ रुपए के Startup India Fund of Funds 2.0 को मंजूरी दी। Deep Tech और Advanced Manufacturing सेक्टर को मिलेगा लंबी अवधि का निवेश।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई रफ्तार देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10,000 करोड़ रुपए के ‘Startup India Fund of Funds 2.0’ को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि यह फंड खास तौर पर Deep Tech, Advanced Manufacturing और शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को लंबी अवधि की पूंजी उपलब्ध कराएगा। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब देश में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2 लाख के पार पहुंच चुकी है और सरकार 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ने की बात कर रही है।
पहले चरण के बाद अब दूसरा बड़ा कदम
यह योजना 2016 में शुरू की गई Startup India पहल के तहत शुरू किए गए पहले फंड ऑफ फंड्स का दूसरा चरण है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पहले चरण में भी 10,000 करोड़ रुपए का कोष विभिन्न निवेश फंड्स के माध्यम से तैनात किया गया था। इसके जरिए 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स को समर्थन मिला। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थकेयर और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में 25,500 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश आकर्षित हुआ।
किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?
सरकार का कहना है कि Fund of Funds 2.0 का फोकस उन सेक्टर्स पर रहेगा जहां निवेश का जोखिम ज्यादा होता है और रिटर्न लंबी अवधि में मिलता है।
- Deep Tech
- Advanced Manufacturing
- Early-stage Startups
- Innovation-driven sectors
इन क्षेत्रों में निजी निवेशक अक्सर शुरुआती चरण में पैसा लगाने से बचते हैं। ऐसे में सरकार की Patient Capital यानी धैर्यपूर्ण दीर्घकालिक पूंजी अहम भूमिका निभाएगी।
बड़े शहरों से बाहर भी पहुंचेगा निवेश
नई योजना का एक बड़ा लक्ष्य यह भी है कि निवेश सिर्फ बेंगलुरु या दिल्ली जैसे बड़े स्टार्टअप हब तक सीमित न रहे। सरकार चाहती है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी स्टार्टअप्स को समान अवसर मिलें। इससे घरेलू दीर्घकालिक पूंजी को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी निवेश पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2016 में जहां मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या करीब 500 थी, वहीं अब यह बढ़कर 2 लाख से अधिक हो चुकी है। सरकार का मानना है कि यह नया फंड न सिर्फ नवाचार को मजबूती देगा बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार सृजन, विनिर्माण क्षमता में वृद्धि और आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी गति देगा।