सेंसेक्स 650 अंक चढ़ा, निफ्टी 212 अंक ऊपर। एक दिन में निवेशकों की संपत्ति ₹3 लाख करोड़ बढ़ी, बैंकिंग शेयरों ने बढ़त की अगुवाई की।
नई दिल्ली। सप्ताह की शुरुआत शेयर बाजार ने जिस आत्मविश्वास के साथ की, उसने निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी। सोमवार का कारोबारी सत्र मजबूती के साथ बंद हुआ और बड़ी कंपनियों के शेयरों में आई तेज खरीदारी ने पूरे बाजार का मिजाज बदल दिया।एक ही दिन में निवेशकों की संपत्ति करीब ₹3 लाख करोड़ बढ़ गई। पिछले कुछ सत्रों की सुस्ती के बाद यह उछाल अहम माना जा रहा है।
बाजार की मजबूत क्लोजिंग
16 फरवरी को भारतीय शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ।
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BSE Sensex 650 अंक उछलकर 83,277.15 पर बंद
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Nifty 50 212 अंक चढ़कर 25,682.75 पर स्थिर
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बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 0.64% की बढ़त
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बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.16% की हल्की गिरावट
इस तेजी में व्यापक भागीदारी दिखी, लेकिन सबसे ज्यादा असर बड़ी कंपनियों के शेयरों का रहा।
एक दिन में 3 लाख करोड़ का इजाफा
सबसे अहम आंकड़ा बाजार पूंजीकरण का रहा। पिछला स्तर 465 लाख करोड़ रुपए रहा तो सोमवार का स्तर 468 लाख करोड़ रुपए। कुल बढ़त 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई। एक ही ट्रेडिंग सत्र में इतनी बड़ी संपत्ति का सृजन यह संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत हुआ है।
तेजी के पीछे क्या रहे बड़े कारण?
यह रैली अचानक नहीं आई। इसके पीछे कई कारक एक साथ काम कर रहे थे। पिछले सप्ताह बाजार में गिरावट रही थी। कई ट्रेडर्स ने गिरावट की दिशा में पोजीशन बनाई थी। सोमवार को जैसे ही माहौल बदला, शॉर्ट कवरिंग शुरू हो गई। इससे तेजी को अतिरिक्त गति मिली। बढ़त में प्रमुख योगदान देने वाले शेयर देखें तो
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HDFC Bank
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Reliance Industries
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Axis Bank
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Bharti Airtel
इन हैवीवेट शेयरों की तेजी ने पूरे सूचकांक को ऊपर खींचा। बाजार की इस तेजी का असली इंजन बैंकिंग शेयर रहे।
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निफ्टी बैंक इंडेक्स: +1.27%
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निफ्टी पीएसयू बैंक: +1.50%
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निफ्टी प्राइवेट बैंक: +1.19%
जब बैंकिंग सेक्टर में मजबूती आती है, तो उसका सीधा असर बेंचमार्क इंडेक्स पर पड़ता है। यही इस सत्र में देखने को मिला।
रुपये की स्थिरता ने दिया सहारा
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.66 पर स्थिर बंद हुआ। फरवरी में अब तक रुपया करीब 1.5% मजबूत हुआ है। निर्यातकों की डॉलर बिक्री और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश ने इसे समर्थन दिया। मुद्रा की स्थिरता से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और उसका असर सीधे इक्विटी बाजार पर दिखता है।
अमेरिका से आए सकारात्मक संकेत
अमेरिका में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के नरम आंकड़ों ने वैश्विक बाजारों को राहत दी। जनवरी में महंगाई 0.2% बढ़ी, जो दिसंबर के 0.3% से कम रही। वार्षिक महंगाई भी 2.7% से घटकर 2.4% पर आ गई। इससे ब्याज दरों में संभावित नरमी की उम्मीद मजबूत हुई और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई। भारतीय बाजार ने भी इस सकारात्मक माहौल का फायदा उठाया।
बाजार का बदला हुआ मिजाज
पिछले सप्ताह जहां सतर्कता और दबाव का माहौल था, वहीं इस सप्ताह की शुरुआत में आत्मविश्वास साफ दिखा। बड़ी कंपनियों में संगठित खरीदारी, बैंकिंग सेक्टर की निर्णायक भूमिका व वैश्विक संकेतों से समर्थन और रुपये की स्थिरता. यह रैली घबराहट में की गई खरीदारी नहीं थी, बल्कि सुनियोजित और संरचित मूवमेंट रहा।