रायबरेली: 102 साल की वीर नारी का देहावसान
पति के शहीद हो जाने के बाद शिवनाथ कुमारी ने एक योगिनी की भांति ईश्वर की आराधना में ही अपना सम्पूर्ण जीवन व्यतीत किया। वर्ष 2019 में इनकी आयु के 100 वर्ष पूरे होने पर मायके पक्ष के लोगों ने इनकी जन्म शती बड़े धूमधाम से मनाई।
रायबरेली: खीरों क्षेत्र के देवगांव निवासी भारत मां के वीर सपूत सैनिक भीषम सिंह ने वर्ष 1962 में भारत और चीन के मध्य हुए युद्ध में वीर गति को प्राप्त हुए थे। इनकी पत्नी शिवनाथ कुमारी का शुक्रवार की रात निधन हो गया। बताया गया कि वे 102 साल की थीं। मायके पक्ष के लोगों ने शनिवार की सुबह गाजे बाजे और पूरे सम्मान के साथ बरौंडी गांव से बाहर अन्तिम संस्कार कर दिया ।
वीर नारी की भतीजी विद्यावती सिंह ने बताया कि देवगांव निवासी भीषम सिंह भारतीय सेना में सैनिक के रूप में देश की सेवा कर रहे थे । वर्ष 1962 में जब वह अरुणाचल प्रदेश में तैनात थे, उसी दौरान भारत चीन के बीच युद्ध शुरू हो गया । भीषम सिंह को भारतीय सीमा के किमिन बार्डर पर चीनी सेना से लोहा लेने के लिए तैनात किया गया । उन्होंने बड़ी वीरता के साथ लड़ते हुए चीनी सैनिकों के दाँत खट्टे कर दिए । अपनी टुकड़ी के साथ चीन की सीमा में घुसकर कई किलोमीटर तक कब्जा कर तिरंगा लहरा दिया । युद्ध के दौरान ही उनकी सेना की टुकड़ी चीनी सेना के बीच घिर गई तब भी उन्होंने बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था।
युद्ध के दौरान ही देश की रक्षा में भारत माता के चरणों में अपने प्राण अर्पण कर दिए। इस घटना के बाद उनकी पत्नी शिवनाथ कुमारी अकेली रह गई। निःसंतान होने के कारण उनका कोई आश्रयदाता नहीं रहा। उन्होंने सास-ससुर की बेटी की तरह सेवा की, लेकिन उनके स्वर्ग सिधारने के बाद शिवनाथ कुमारी ससुराल देवगाँव से मायके बरौंडी आ गई। उनकी भतीजी विद्यावती सहारा बनी। उन्हें भारत सरकार की ओर से अमर शहीद की पत्नी के रूप में पेंशन मिल रही थी। बरौंडी के अलावा आसपास के गांव के ग्रामीण उन्हें बड़े फाटक वाली बुआ के नाम से बड़े आदर के साथ बुलाते थे।
पति के शहीद हो जाने के बाद शिवनाथ कुमारी ने एक योगिनी की भांति ईश्वर की आराधना में ही अपना सम्पूर्ण जीवन व्यतीत किया। वर्ष 2019 में इनकी आयु के 100 वर्ष पूरे होने पर मायके पक्ष के लोगों ने इनकी जन्म शती बड़े धूमधाम से मनाई। वे एक माह पूर्व से भोजन नहीं कर पा रही थीं, केवल पेय पदार्थों के सहारे जीवित थीं। शुक्रवार की देर रात उन्होंने अन्तिम सांस ली और इस संसार को अलविदा कह दिया। ग्रामीण बताते हैं कि इन्होंने 59 वर्ष तक अपना वैधव्य एक वैरागी की तरह व्यतीत किया। शनिवार की सुबह परिवारजनों व ग्रामीणों ने गाजे बाजे के साथ उनकी शव यात्रा निकालकर भाई के खेत में अन्तिम संस्कार कर दिया।