पार्टी प्रदेश अध्यक्ष की पहल पर हुई थी सत्ता और संगठन के समन्वय की शुरुआत
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की पहल पर पार्टी के प्रदेश कार्यालय में शुरू हुई राज्य सरकार के मंत्रियों द्वारा कार्यकर्ताओं की दैनिक जन-सुनवाई व्यवस्था अब बिखरती नजर आ रही है। इस व्यवस्था के सुचारू संचालन में जहां मंत्रियों ने आना बंद कर दिया है, वहीं कार्यकर्ता भी इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रदेशभर से राजधानी भोपाल पहुंचने वाले कार्यकर्ताओं से संवाद और उनकी समस्याओं को सुनने के लिए सप्ताह में पांच दिन (सोमवार से शुक्रवार) राज्य सरकार के दो-दो विभागों के मंत्रियों के प्रदेश भाजपा कार्यालय में दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक उपस्थित रहने की व्यवस्था 1 दिसंबर 2025 से शुरू हुई थी। इसी दिन से मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र भी शुरू हुआ था, जिसके कारण एक सप्ताह तक यह व्यवस्था पूरी तरह सुचारू और नियमित रही।
पहले दिन, 1 दिसंबर को उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने पार्टी कार्यालय में उपस्थित होकर कार्यकर्ताओं से संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं।
2 दिसंबर को लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और मंत्री दिलीप अहिरवार,
3 दिसंबर को खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग और सहकारिता मंत्री लखन पटेल,
4 दिसंबर को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी,
5 दिसंबर को जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह और नरेन्द्र शिवाजी पटेल
द्वारा सुनवाई पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुई।
मंत्री पहले दो से एक, फिर वो भी गायब
पार्टी व्यवस्था के अनुसार, राज्य सरकार के प्रत्येक कैबिनेट और राज्यमंत्री को पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं की सुनवाई के लिए दो घंटे का समय निर्धारित किया गया था। शुरुआत में यह व्यवस्था अपेक्षाकृत सुचारू रही, लेकिन विधानसभा सत्र की समाप्ति के बाद यह धीरे-धीरे कमजोर नजर आने लगी।
ज्यादातर कार्यकर्ता व्यक्तिगत शिकायतें और आवेदन लेकर ही पहुंचते हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया था कि उन्हें अपने क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए मंत्रियों की जन-सुनवाई में भाग लेना चाहिए। इसी कारण अब कार्यकर्ताओं की संख्या बहुत सीमित रह गई है।
अब तक की जन-सुनवाई में अधिकांश मंत्रियों ने शुरूआती आधे घंटे में ज्यादातर कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनी, जबकि शेष समय में वे कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अनौपचारिक चर्चा करते नजर आए।
हालांकि, सप्ताहभर बाद हुई सुनवाई में सिर्फ एक-एक मंत्री उपस्थित रहे। अंतिम सुनवाई, 30 दिसंबर, सोमवार को केवल राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर द्वारा की गई। इसके पहले भी सोमवार से शुक्रवार के बीच मंत्री जन-सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए। 8-9 दिसंबर को खजुराहो में विभागीय समीक्षा और मंत्रिपरिषद की बैठक के चलते भी पार्टी कार्यालय में मंत्री उपस्थित नहीं रह सके थे।