भोपाल में राजू ईरानी की तलाश में 6 राज्यों की पुलिस, देशभर में संरक्षण देने वालों का डेटा तैयार

Update: 2026-01-02 06:07 GMT

भोपाल के ईरानी डेरा अमन कॉलोनी के प्रमुख कुख्यात अपराधी राजू ईरानी और उसके गिरोह के पांच सदस्यों की तलाश में 6 राज्यों की पुलिस सक्रिय हो गई है। पुलिस केवल भोपाल में ही नहीं, बल्कि उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अन्य राज्यों में मौजूद उनके करीबी सहयोगियों और संरक्षण देने वालों का डेटा भी तैयार कर रही है।

पुलिस ने गिरफ्तार ईरानी गैंग के सदस्यों से पूछताछ कर उनकी वारदातों, काम करने के तरीकों और अन्य राज्यों में रहने वाले रिश्तेदारों व सहयोगियों की जानकारी हासिल की। बताया जा रहा है कि गैंग के सदस्य नर्मदापुरम, देवास, मुंबई, बैंगलुरू, दिल्ली और छत्तीसगढ़ जैसी जगहों में फरारी काटते हैं। वहीं उनके परिवार और रिश्तेदार वारदातों के बाद भोपाल की अमन कॉलोनी में लौट आते हैं।

डेरे की जमीन और मकानों की जांच

अमन कॉलोनी में बने ईरानी डेरे के कागजात और रजिस्ट्री की जांच प्रशासन की टीम कर रही है। साथ ही नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन और अतिक्रमण शाखा भी डेरा परिसर के मकानों की जांच में जुटी है। नियम विरुद्ध पाए जाने वाले मकानों पर जल्द बुल्डोजर कार्रवाई भी हो सकती है।

पुलिस फिलहाल राजू ईरानी, सालिक ईरानी, गुलाब ईरानी और सबदर की तलाश में है। ये सभी पुलिस की कार्रवाई के बाद से फरार हैं।

अपराधियों की सफर प्रणाली

ईरानी डेरे के सदस्य चोरी, लूट और ठगी जैसी वारदातों को अंजाम देने के लिए महीनों तक अलग शहरों और राज्यों में रहते हैं। इसे पुलिस में सफर में होना कहा जाता है. इस दौरान गिरोह के दो सदस्य सीधे वारदात में शामिल नहीं होते, बल्कि चोरी या लूटे माल को सुरक्षित रूप से कबीले तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाते हैं. अक्सर यह सफर लुक्जरी कार और बाइक से सैकड़ों किलोमीटर का होता है. पुलिस ने बताया कि यह प्रणाली गिरोह को पकड़ने में कठिनाइयाँ पैदा करती है।

2014 में अमन कॉलोनी में हुई हिंसा

अमन कॉलोनी के ईरानी समुदाय ने 2014 में आफताब मस्जिद के पास खाली जमीन पर इमामबाड़ा बनाने के प्रयास किए। इस पर सुन्नी समुदाय ने विरोध किया, जिससे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पत्थरबाजी और मारपीट के बाद ईरानी पक्ष ने फायरिंग कर दी. इस खूनी संघर्ष में करीब 39 मकानों में आगजनी हुई और दर्जनों लोग घायल हुए। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग कर मामला शांत कराया। 12 दिसंबर 2014 को कॉलोनी में पुलिस फोर्स तैनात किया गया था और ईरानी समुदाय के लोग रात भर पहरा देते रहे।

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