"ताहि बधे कछु पाप न होई" टिप्पणी दर्ज कर मोहम्मद नसीम ने पापी को दे दिया मृत्युदंड...
नेकी की दीवार ने उठाया रेप पीड़ित मासूम बच्ची के इलाज का बीड़ा। 3 बरस पहले 3 बरस की बिटिया से हैवान ताऊ ने की थी दरिंदगी, 6 साल की हो चुकी बिटिया के मल-मूत्र द्वार में पड़ी हैं पाइप, 5 अगस्त को हुई है शैतान को फांसी की सजा।
हरदोई। अपने के दिए जख्म की टीस लिए बच्ची पिता गोद में कोर्ट पहुंची। सरकारी वकील ने पूछा तुम्हारी ये हालत किसने की, जवाब में बिटिया ने कटघरे में खड़े वहशी की ओर हाथ के इशारे से कहा, बड़े पापा ने। कोर्ट रूम में मौजूद लोग आंसू नहीं रोक पाए। तीन साल में पिता बच्ची के इलाज पर काफी कुछ खर्च चुका है। पास कुछ नहीं बचा तो गवाही के बाद बीवी संग दिल्ली में मजदूरी कर बेटी का इलाज कराने लगा। बिटिया के साथ इतना बुरा हुआ था कि फांसी की सजा सुनाने वाले जज मोहम्मद नसीम की प्रतिक्रिया आई, दरिंदा, भेड़िया, पिशाच है भतीजी का रेपिस्ट इशू...और, ताहि बधे कछु पाप न होई, इस टिप्पणी के साथ पापी को मृत्युदंड दे दिया।
फैसले के मुताबिक दुष्कर्म के कारण बच्ची के मल और मूत्र के रास्ते में कोई अंतर नहीं रह गया था। बच्ची को मल और मूत्र त्याग करने के लिए अलग जगह शरीर में बनानी पड़ी और तब उसकी जान की रक्षा हो पाई। जज ने इसे पशुवत व्यवहार की संज्ञा दी। कहा, सगी भतीजी के साथ ऐसा व्यवहार इंसान के रूप में एक वहशी जानवर ही कर सकता है। उन्होंने लिखा है कि भारतीय संस्कृति के समाज को ऐसे पैशाचिक व्यक्ति की आवश्यकता नहीं है और इस प्रवृत्ति के व्यक्ति को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है।जज नसीम ने लिखा है, 3 साल उम्र, 3 फीट लंबाई, 13 किलो वजन...शर्म भी नहीं आई, हवस के लिए उसने बच्ची की उम्र, रिश्ते का भी लिहाज नहीं किया। आधुनिक सभ्यता में हम बेटियों सहित संपूर्ण स्त्री जाति के कल्याण व सुरक्षा के लिए अभियान चला रहे हैं, ताकि उन्हें समाज में सुरक्षित और सम्मानित जीवन जीने का अधिकार हो। ऐसी घटनाओं के प्रति समाज में कठोर रुख नहीं अपनाया जाता है, तो ना ही बेटियां बचेंगी और ना ही सुरक्षित और सम्मानित जीवन जी सकेंगी। समाज की न्याय के लिए गुहार को नहीं सुना गया तो न्याय प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएगा। समाज में असुरक्षा और भयावह स्थिति का उत्पन्न होना स्वाभाविक है।
जज ने लिखा, केस को पढ़ा तो ठीक से सो नहीं पाया। सोचकर बेचैनी होती रही कि जिस पर जान की रक्षा और इज्जत की सुरक्षा का भार है उसी ने घटना को अंजाम दे दिया। सात घर डायन भी छोड़ती है। इस मामले में तो सारी हदें ही पार हो गईं। पीड़िता जिसे बड़े पापा कहती थी, उसी ने दुष्कर्म किया। बड़े पापा और भतीजी का रिश्ता अटूट भरोसे और विश्वास का होता है। इस रिश्ते को वासना की भूख के कारण अभियुक्त ने तार-तार कर दिया। बच्ची की मां को भी छेड़ता था और कई बार पिट चुका था। जज मोहम्मद नसीम ने फैसले में रामचरित मानस के किष्किंधा कांड की पंक्तियों का भी जिक्र किया है। लिखा है, अनुज वधू भगिनी सुत नारी, सुन सठ कन्या सम ए चारी, इन्हहि कुदृष्टि बिलोकइ जोई, ताहि बधे कछु पाप न होई। इसका मतलब यह हुआ कि छोटे भाई की स्त्री, बहिन, पुत्र की स्त्री और कन्या यह चारों समान हैं। इन्हें जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है उसका वध करने में कोई पाप नहीं होता।
*हरदोई वाले न्यायाधीश को सेल्यूट*
— डॉ.अतुल मोहन सिंह | Dr.Atul Mohan Singh (@AtulMohanSingh) August 6, 2024
हरदोई के पॉक्सो कोर्ट के जज मोहम्मद नसीम ने 3 वर्ष की अपनी भतीजी के साथ ताऊ द्वारा बलात्कार किए जाने के जुर्म में रामचरितमानस की चौपाई लिख मृत्युदंड की सजा सुनाई। इस निर्णय के लिए जज बधाई के पात्र हैं। बेटी का जिम्मा 'नेकी की दीवार' ने उठाया है। pic.twitter.com/n8btywhiqo
जज ने विवेचक सांडी के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अखिलेश यादव की सराहना की है, जो इन दिनों सीतापुर जनपद के सिधौली थाने में निरीक्षक अपराध के पद पर हैं। लिखा है, विवेचक का कार्य सराहनीय है। घटना के बाद अखिलेश निजी वाहन से बेहोश बच्ची को सीएचसी से जिला अस्पताल और फिर लखनऊ ले गए थे। सरकारी अस्पताल में बच्ची को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने वाली डॉ.श्वेता तिवारी और राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ के प्रो.तनवीर रोशन खान की सराहना भी जज ने की है। बच्ची की तरफ से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि घटना न सिर्फ क्रूरतम है, शर्मनाक भी है। पुलिस विवेचना, एफएसएल (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) रिपोर्ट और गवाहों के बयानों से स्पष्ट हो गया था, अभियुक्त l फांसी की सजा सुनाने लायक ही है।
अच्छी बात ...बिटिया अब नेकी की दीवार की महफूज गोद में:
बच्ची अभी भी बहुत ठीक नहीं है। राम जी बस उसकी सांसें थाम रखीं हैं। अच्छे इलाज की बहुत जरूरत है उसे। लेकिन, अब उसे आगे इलाज की परेशानी नहीं होगी। नेकी की दीवार के संयोजक सचिन मिश्रा ने बिटिया की सेहत की हिफाजत ओढ़ ली है। इतना ही नहीं संस्था के अकाउंट में एक लाख रुपए पहुंचाने का दिन भर का लक्ष्य था जो समाचार लिखे जाने तक करीब करीब पूरा था, और दिन में अभी कई घंटे बाकी हैं।